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चीन से घटेगी कपास की मांग, कीमतों में गिरावट की संभावना

COMMODITY TEAM

Sep 23,2014 03:16:00 PM IST
चीन अपने कपास रिजर्व को कम करने के लिए अक्टूबर शुरु हो रहे कपास का नया मार्केटिंग सीजन में इंपोर्ट में भारी कटौती कर दी है। जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास की कीमतें 5 साल के निचले स्तर पर फिसल गया है। घरेलू वायदा बाजार में कॉटन की कीमतें फरवरी 2013 के बाद पहली बार 17,000 रुपये के नीचे पहुंच गया। हालांकि मंगलवार को कीमतों में रिकवरी आई है। दरअसल दुनिया के सबसे बड़े कॉटन इंपोर्टर चीन ने अगले सीजन के लिए कर मुक्त कॉटन इंपोर्ट की सीमा को घटा कर 894,000 टन कर दिया है। चीन में कपास आयात पर 40 फीसदी टेक्स लगता है।
भारत से होने वाले कुल कॉटन एक्सपोर्ट में चीन की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी की है। ऐसे में चीन के इस कदम का घरेलू बाजार पर असर पड़ सकता है। साथ ही अमेरिका में कपास का बम्पर उत्पादन होने की संभावना है। ICE पर कपास की कीमतें इस साल 27 फीसदी तक घट चुकी है।
कपास के लिए लोन लेना होगा मुश्किल
बाजार के जानकारों के मुताबिक घरेलू बाजार में कपास की कीमतों में गिरावट का रुख रह सकता है। चीन कपास के रिजर्व को घटा रहा है जिसके चलते चीन के ग्राहकों को कपास खरीदने के लिए बैंक से लोन लेना मुश्किल हो जाएगा।
चीन का कपास आयात घटा
2014 के पहले आठ महीने में चीन ने 18.8 लाख टन कपास का निर्यात किया है, जो कि पिछले साल के मुकाबले 38 फीसदी कम है। रिजर्व के लिए निर्धारित कीमत और बाजार कीमतों में भारी अंतर होने की वजह से इंपोर्टेड कपास की भी स्टॉक के लिए खरीददारी की गई। 2013-14 में चीन का कपास निर्यात 32 फीसदी घटकर 30 लाख टन हुआ है। दरअसल चीन के घरेलू टेक्सटाइल सेक्टर से कमजोर मांग और मिलों के कपास की जहग यान आयात करने से इंपोर्ट घट गई है।
भारत पर पड़ेगा आयात सीमा घटने का सबसे ज्यादा असर
चीन से कपास का इंपोर्ट घटने का सबसे बुरा असर भारतीय कपास एक्सपोर्ट पर पड़ेगा। भारत अपने कुल एक्सपोर्ट का करीब 75% चीन को भेजता है। 2013-14 में भारत ने करीब 125 लाख गांठ (170 किलो) कपास का एक्सपोर्ट किया है जिसमें 70-75% एक्सपोर्ट चीन को हुआ है। अगर चीन इंपोर्ट घटाता है तो भारतीय एक्सपोर्टर्स को कपास एक्सपोर्ट में दिक्कत हो सकती है।
देश में होगा कपास का रिकॉर्ड उत्पादन
देश में इस साल कपास का रिकॉर्ड उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक इस साल उत्पादन 4 करोड़ गांठ को पार कर सकता है। हालांकि सरकारी अनुमान के मुताबिक इस साल उत्पादन 350 लाख गांठ से भी कम होने के आसार हैं। लेकिन अन्य सभी एजेंसियां इस साल भारत में रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान लगा रही हैं।
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