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    कालेधन के मसले पर सरकार को मिलेगी चुनौती

    कालेधन के मसले पर सरकार को मिलेगी चुनौती
    कालेधन पर पिछली यूपीए सरकार के ढुलमुल रवैये के बाद नई सरकार ने एसआईटी बनाकर इस मुद्दे पर अपनी गंभीरता का परिचय दिया है। लेकिन आगे भी सरकार को इस मुद्दे पर कई कठोर निर्णय लेने होंगे। देश भर में रिकॉर्ड रैलियों, जोशीले भाषणों और विपक्षियों पर तल्ख टिप्पणियों की लंबी श्रंखला के बाद नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक बहुमत के साथ देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं। नरेंद्र मोदी की विजय जितनी ऐतिहासिक है। उतना ही ऐतिहासिक उनका शपथ ग्रहण समारोह भी रहा है। अब जब सरकार ने तेजी से अपना कामकाज शुरू किया है, ऐसे में पीएमओ के सामने सबसे अहम काले धन का मुद्दा है। जिस पर तुरंत बड़ा निर्णय लेना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
     
    पहली केबिनेट बैठक यह दिखाई भी दिया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम-कोर्ट के दिशानिर्देशों के साथ चलते हुए विदेशों में जमा काले धन पर एक स्पेशल इंवेस्‍टीगेशन टीम (एसआईटी) गठित कर दी। आलोचक मान सकते हैं कि सरकार के पास इसके अलावा कोई अन्‍य विकल्प था ही नहीं। लेकिन पिछली यूपीए की बात की जाए तो सुप्रीम-कोर्ट द्वारा सितंबर 2011 में दिए गए कठोर निर्देश के बाद सरकार का रुख संदेहास्पद रहा है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के एसआईटी बनाने के आदेश के बावजूद सरकार इसे टालती रही।

    अब जस्टिस एमबी शाह की अध्‍यक्षता में एसआईटी गठित हो चुकी है। जस्टिस शाह कह भी चुके हैं कि उनका मुख्‍य कार्य उनके पास आए मामलों के त्वरित परिणाम के लिए सही पद्धति तय करना है। देश के कई अन्‍य प्रति‍ष्ठित व्‍यक्ति भी नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए इस साहसिक कदम की प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन जहां तक मेरा सवाल है, मैं अपना बयान आगे के लिए सुरक्षित रखना चाहूंगा। एसआईटी का गठन एक न्‍यायिक आदेश के बाद हुआ है। अभी भी अगले कुछ महीनों में सरकार की ओर से बड़े कदम उठाए जाने हैं।

    भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनाव घोषणापत्र में यूपीए-2 सरकार द्वारा शुरू किए गए टैक्‍स आतंकवाद के खिलाफ महायुद्ध छेड़ने का वादा किया था। कालाधन भी कहीं न कहीं से इसी टैक्‍स आतंकवाद की ही उपज है। अब नमो सरकार को अपने घोषणापत्र में किए वादे को पूरा करना ही होगा।
     
    अब चूंकि मोदी सरकार आ चुकी है तो अब जरूरी है कि सरकार काले धन के संबंध में पॉलिसी और विधायी उपाय सामने लाए। इसमें सबसे जरूरी काले-धन के पैदा होने, इसके उपयोग के प्रचलित तरीकों, टैक्‍स हेवन माध्यमों से इसे खपाने के मुफीद अड्डों का पता लगाना होगा। साथ ही पॉलिसी के माध्यम से काले धन , इसके चैनल का पता कर विदेशों को कालाधन भेजने पर लगाम लगानी होगी।

    भाजपा पिछले 6 सालों से इसी काले धन के मुद्दे को सरकार के विरोध का सबसे बड़ा हथियार बनाए हुए है। अब ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा की बारी है कि इस मामले पर ठोस पहल करे। हालांकि इसमें काफी समय लग सकता है। लेकिन जरूरी है कि सरकार पी.चिदंबरम के कार्यकाल में काले धन के आंकलन के लिए हुए अध्ययन की रिपोर्ट को सार्वजनिक करे।
     
    भारत में कितना काला धन है अभी भी यह कल्पना का विषय ही बना हुआ है। आधिकारिक अध्ययन के बिना विश्लेषकों को दूसरे देशों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों पर निर्भर रहना पड़ता है। जीएफआई के एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि भारत 1948 के बाद से अभी तक अवैध राजस्व प्रवाह के चलते 462 बिलियन डॉलर गवां चुका है।  
     
    लेखक जाने-माने टैक्‍स एक्‍सपर्ट और  taxindiaonline.com में एडिटर हैं।

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