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    निर्यात के लिए एफडीआई क्यों है जरूरी?

    निर्यात के लिए एफडीआई क्यों है जरूरी?
    भारत को निर्यात में सफलता हासिल करने के लिए विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तरफ भी ध्यान केंद्रित करना होगा। क्योंकि निर्यात के लिए एक तरफ जहां नए बाजार को साधना होगा वहीं  पुराने बाजार से तालमेल भी बैठाना होगा। 
     
    निर्यात के लिए भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं को छोड़कर भले ही एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका के भीतर नए बाजार तलाश रहा है। लेकिन विकिसित अर्थव्यवस्थाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि, विकसित अर्थव्यवस्थाएं  इंपोर्ट में बहुत बड़ा स्थान रखती हैँ। भारत को छोड़ दें तो 13 देश ऐसे हैं जो 200 अरब यूएसडॉलर से भी ज्यादा कीमत का आयात करते हैं, इन देशों में 11 विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। हमारे पास काफी मौका है कि हम अपने व्यापार को नया आयाम दे सकते हैं। सरकार को ऐसी नीतियों की तरफ ध्यान देना होगा जिससे विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भारत की व्यापारिक हिस्सेदारी बढ़ सके। अगर ऐसा संभव हुआ तो 2020 तक वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी दोगुनी हो सकती है।
    व्यापारिक हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए हमें कौन से कदम उठाने चाहिए? सबसे बड़ी चीज है उत्पादन में बढ़ोतरी करना। यह घरेलू उत्पादन को बढ़ाने से ही संभव होगा। मसलन, घरेलू उत्पादन को रफ्तार मिलने से साल-दर-साल उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा। हालांकि, औद्योगिक उत्पादन का ग्रोथ महीने-दर-महीने फर्क करती है जो अभी तक राहत देने वाले स्तर पर नहीं पहुंच पाई है। यदि चीन से हम अपनी तुलना करें तो पाएंगे कि उसने बीते वर्षों में अपने निर्यात को काफी बढ़ाया है। इसका श्रेय पिछले दो वर्षों में वहां के औद्योगिक उत्पादन में हुई ग्रोथ को दिया जा सकता है। 
    आखिर हम घरेलू उत्पादन में कहां चूक रहे हैं? इस सवाल की गहराई से पड़ताल करेंगे तो आपको पता चलेगा कि बीते दो सालों में महंगाई बढ़ने से उत्पादन लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है, वहीं डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी ने आयात को महंगा किया है। पिछले दो सालों में कर्ज लेना भी महंगा हुआ है। इन सबका प्रतिकूल असर हमारे घरेलू उत्पादन पर पड़ा है। यदि हम उत्पादन पर ध्यान देंगे तो एक्सपोर्ट को बल मिलना तय है। 
    सरकार और आरबीआई को यह तय करना चाहिए कि उत्पादन क्षेत्र को आसान कर्ज मिल सके। बड़ी कंपनियों को आजादी देनी चाहिए कि वह बाहर जाकर कंपटेटिव रेट्स में पूंजी बढ़ा सकें। इसके अलावा सरकार छोटे उद्यमों को ब्याज दरों में छूट देकर क्रेडिट कास्ट दस फीसदी तक कर सकती है।
    प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टैक्स रिफॉर्म पर हमें तुरंत पहल करनी चाहिए। डायरेक्ट टैक्स कोड जैसी चीजें प्रत्यक्ष कर के लिए फायदेमंद हैं। जरूरत है कि अप्रत्यक्ष टैक्स के लिेए एक  टैक्स प्रणाली जीएसटी को सरकार जल्द लागू करे। यह जितनी जल्दी लागू होगा उतनी ही जल्दी सुधार संभव होगा।  
    इन टैक्स के लागू होने से हम अपने आधार को बढ़ा पाएंगे टैक्स में ज्यादा लोगों की भागीदारी हासिल कर सकेंगे। निर्यात के लिए एफडीआई का आना बहुत जरूरी है। एफडीआई अकेले नहीं आएगी यह निर्यात के लिए टेक्नोलॉजी औऱ मार्केटिंग साझेदारी भी लेकर आएगी।
    हम सेज में इसका अनुभव ले चुके हैं। विदेशी निवेश वाली इंटरप्राइजेज मैन्युफैक्चरिंग के लिए सबसे बढ़िया पद्धति अपनाती हैं। कुछ समय बाद यह पद्धित स्थानीय कंपनियों के लिए प्रोटोकॉल बन जाएगी। श्रम उत्पादन में इजाफा होगा। बहुआयामी विकास के बेहतर परिणाम मिलेंगे।  
     
    लेखक एफआईईओ में महानिदेशक और सीईओ हैं।  

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