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    एक्सपोर्ट बढ़ाना डेयरी इंडस्ट्री के सामने बड़ी चुनौती

    एक्सपोर्ट बढ़ाना डेयरी इंडस्ट्री के सामने बड़ी चुनौती
     
    डेयरी के क्षेत्र में भारत का दुनिया में सानी कोई देश नहीं है। हालांकि, नीतियों और नियमों के अंतर्जाल में उलझा डेयरी उद्यम अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया है। दूध और उनसे निर्मित उत्पादों की सिर्फ घरेलू ही नहीं बल्कि विदेशी बाजारों में जबरदस्त मांग है। भारत के पास इस क्षेत्र में विकास के काफी मौके हैं।
     
    दो दशक पहले डेयरी उद्यम को निर्यात की अनुमति मिली। इसके बाद डेयरी सेक्टर ने सफलता के काफी रोचक आंकड़े दिए हैं। यदि सरकार दुग्ध उत्पादन से जुड़े लोगों की मदद करती है तो न सिर्फ उत्पादन में हम बढ़ेंगे। बल्कि वैश्विक स्तर पर डेयरी उत्पादों की मांग और आपूर्ति के बड़े और मजबूत सेतु बन सकते हैं।  
     
    1992 में सरकार ने डेयरी सेक्टर के आधुनीकिकरण को मंजूरी दी। साथ ही डेयरी प्रोडक्ट के एक्सपोर्ट करने को भी मंजूरी मिल गई। किंतु ये सिर्फ नाम के लिए था, जबकि एक्सपोर्ट नगण्य था। इस पर पॉलिसी और निर्णय में लगातार विरोधाभास देखने को मिला था। सरकार पॉलिसी का आधार विदेशी कंपनियों के साथ अच्छे संबंध बनाकर घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना था।
     
    सरकार ने 8 जून 2012 को नोटिफिकेशन जारी करके सभी तरह के डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट को मंजूरी दी थी। इसके बाद 2013-2014 में डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट में काफी तेजी आई थी। DGCIS के मुताबिक भारत 113 देशों में डेयरी प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करता है। इनमें ज्यादातर एक्सपोर्ट विकसित देशों में किया जाता है। 2013-2014 में भारत के एक्सपोर्ट करीब दोगुना हो गया था। इसकी बड़ी वजहें न्यूजीलैंड के एक्सपोर्ट पर विकसति देशों में प्रतिबंध था। 
     
    2013 में स्किम्ड मिल्ड पाउडर के दाम 4200 डॉलर प्रति टन थे, जो कि अक्सर 2600-2800 डॉलर प्रति होते थे। इन कीमतों से स्किम्ड मिल्ड पाउडर (SMP) के दाम पूरी दुनिया में काफी नीचे आ गए हैं। देश में सप्लाई बढ़ने और पिछले दो महीने से कम मांग के चलते इसकी कीमत कम हुई है। इंडिया में SMP का दाम घटकर 232 रुपये से 240 रुपये प्रति किलो रह गया है। हालांकि, इंटरनेशनल मार्केट में इसका दाम 158 से 160 रुपये प्रति किलो ही है।
     
    कोऑपरेटिव और प्राइवेट डेयरी प्लेयर्स का कहना है कि मिल्क और मिल्क प्रॉडक्ट्स की कीमतें अगले छह महीनों में स्टेबल हो जाएंगी। इंडस्ट्री का एक सेगमेंट चाहता है कि सरकार SMP इंपोर्ट्स को मंजूरी दे ताकि दूध और इसके प्रॉडक्ट्स के ऊंचे बने हुए दाम नीचे आ सकें और ओवरसीज मार्केट्स में चल रहे रेट के साथ बना हुआ गैप कम हो सके। डेयरी इंडस्ट्री को फिलहाल गुणवता में सुधार होना चाहिए। 
     
    एक्सपोर्ट बढ़ाने के स्ट्रैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOP) के नियमों पर खरा उतरने के लिए दूध उत्पादकों को कई सुधार करने की जरूरत है। इसमें फिलहाल एक्सपोर्ट इन्सपेक्शन एजेंसी (EIA) चाहती है कि एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी को कड़े कदम उठाने चाहिए, क्योंकि नियमों को अक्सर तोड़ा जाता है। कुछ ही दिनों पहले मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में शिपमेंट रद्द किया गया है। इस शिपमेंट में एंटीबायोटेक दवा पाई गई थी। साथ ही पशुओं के लिए बीमारी फ्री जोन बनाना चाहिए। साथ ही जानवारों के लिए अच्छा पर्यावरण भी मुहैया कराने की जरूरत है। बड़े कॉर्पोरेट के साथ बड़े फार्म की भी जरूरत है। किसानों को भी डेयरी फार्मिंग दूसरी नहीं पहली प्राथमिकता में रखने के लिए बढ़ावा देना होगा।
     
    भारत का सबसे ज्यादा गाय का दूध एक्सपोर्ट किया जाता है। भारत सरकार को भैस के दूध के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने की जरूरत है। भारत के भैस के दूध को बढ़ावा देने के लिए APEDA को बोर्ड या एजेंसी की स्थापना करनी चाहिए।
     
    सरकार और डेयरी उद्योग को मिलकर एक्सपोर्ट के इश्यू को सुधारना चाहिए। साथ ही डेयरी उद्योग को विंडफॉल की तरह एक बार वाला मौका नहीं, बल्कि बड़ी ग्रोथ की आदत बनाना चाहिए।

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