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Home » क्या आप जानते हैं » इन्फ्लेशन » फैक्ट्सKnow what is inflation Rate, what impact rise and fall of

जानिए क्या होती है महंगाई दर, इसके बढ़ने और घटने का क्या होता है असर

जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें सामान्य से अधिक हो जाती हैं तो इस स्थिति को महंगाई (इंफ्लेशन) कहते हैं।

Know what is inflation Rate, what impact rise and fall of
नई दि‍ल्ली। भारत में महंगाई दर बाजारों में सामान्य तौर पर कुछ समय के लिए वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव महंगाई को दर्शाती है। जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें सामान्य से अधिक हो जाती हैं तो इस स्थिति को महंगाई (इंफ्लेशन) कहते हैं। वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाने की वजह से परचेजिंग पावर प्रति यूनिट कम हो जाती है। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं कि बाजार में मुद्रा की उपलब्धता और वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोत्तरी को मापने की एक तरकीब है। भारत में वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कई फैसले सरकार थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के हिसाब करती है।
 
महंगाई दर का अर्थव्‍यवस्‍था पर क्‍या होता है असर
महंगाई दर का असर अर्थव्‍यवस्‍था पर दो तरह से होता है। यदि महंगाई दर बढ़ती है तो बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। वहीं यदि महंगाई दर घटती है तो बाजार में वस्तुओं के दाम घट जाते और लोगों की खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है। महंगाई के बढ़ने और घटने का असर सरकार की नीतियों पर भी पड़ता है। जिससे भारत में वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कई फैसले सरकार थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के हिसाब करती है।
 
महंगाई दर जानने का क्‍या है तरीका
दरअसल में हम हमेशा जानने की कोशिश करते हैं कि महंगाई का पता कैसे लगता है। महंगाई जानने के कई तरीके हैं। भारत में सबसे प्रमाणिक तरीका है थोक बिक्री मूल्य में हो रहे उतार-चढ़ाव को मापना। इसके लिए एक सूचकांक (इंडेक्स) है जिसे थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) कहते हैं। थोक मूल्य सूचकांक के बढ़ने का मतलब हुआ महंगाई में तेजी और इसके गिरने का मतलब हुआ महंगाई में कमी। इस सूचकांक में 435 अलग-अलग वस्तुओं का लेखा-जोखा रखा जाता है। सूचकांक में शामिल हर वस्तु को एक वेटेज यानी वजन दिया गया है। इस आधार पर तय किया गया है कि किन वस्तुओं की हमारी जिंदगी में कितनी अहमियत है।
 
क्‍या है थोक महंगाई दर
भारत में नीतियों के निर्माण में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर का इस्तेमाल किया जाता रहा है। थोक बाजार में वस्तुओं के समूह की कीमतों में सालाना तौर पर कितनी बढ़ोत्तरी हुई है इसका आकलन महंगाई के थोक मूल्य सूचकांक के जरिए किया जाता है। भारत में इसकी गणना तीन तरह की महंगाई दर, प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई में बढ़त के आधार पर की जाती है। अभी तक भारत में वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के कई फैसले थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर के हिसाब से ही की जाती रही है।
 
क्‍या है रीटेल महंगाई दर
रीटेल महंगाई दर (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) वह महंगाई दर है जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है और खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में रीटेल महंगाई दर खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी 45 फीसदी के करीब है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में रीटेल महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियों का निर्माण होता है। भारत में भी अब नए आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट कह दिया है कि ब्याज दरें तय किए जाने से पहले रीटेल महंगाई दर पर नजर रखा जाएगा। हाल ही में सरकार ने महंगाई से बचने के लिए निवेशकों के लिए रीटेल महंगाई से जुड़े बांड जारी किए हैं।  

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