विज्ञापन
Home » Do You Know » Inflation » FAQhyperinflation

क्या है हाइपर इन्फ्लेशन

हाइपर इन्फ्लेशन ऐसी स्थिति होती है, जिसमें महंगाई की दर काफी ऊंचे स्तर पर चली जाती है और वह उत्प्रेरक महंगाई का काम करती है।

hyperinflation
हाइपर इन्फ्लेशन एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें महंगाई की दर काफी ऊंचे स्तर पर चली जाती है। सामान्य स्थितियों में, किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और मुद्रा की कीमत मोटे तौर पर स्टेबल रहती है, लेकिन हाइपर इन्फ्लेशन की स्थिति में किसी अर्थव्यवस्था में चीजों की कीमतें घरेलू स्तर पर बड़ी तेजी से बढ़ती हैं। इसका मतलब यह है कि उस देश की मुद्रा की कीमत में उथल-पुथल होती है, जबकि विदेशी करेंसी में कोई ज्यादा बदलाव नहीं होता है।
इसका परिणाम यह होता है कि उस देश की घरेलू मुद्रा अपनी वास्तविक कीमत बड़ी तेजी से खोने लगती है।
 
दुनिया भर में हाइपर इन्फ्लेशन के कई उदाहरण हैं। स्टीव एच हेंक और निकोलस क्रूज ने एक अध्ययन के जरिए बताया है कि पिछली शताब्दी में हाइपर इन्फ्लेशन के लगभग 56 मामले दर्ज किए गए हैं। हाइपर इन्फ्लेशन का सबसे बड़ा मामला 1945-46 के दौरान हंगरी में दर्ज किया गया था, जब चीजों की कीमतें औसतन हर 15 घंटे में दोगुनी हो जाती थीं। ताजा उदाहरण देखें तो जिंबाब्वे में आए हाइपर इन्फ्लेशन के दौर को देखा जा सकता है, जहां मार्च 2007 से नवंबर 2008 के बीच वस्तुओं की कीमत औसतन हर 24.7 घंटे में दोगुनी हो जाती थीं। जर्मनी में भी 1922-23 के दौरान हाइपर इन्फ्लेशन का दौर आया था।
 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन