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    करेंसी बाजार पर कौन से कारक असर डालते हैं

    करेंसी बाजार पर कौन से कारक असर डालते हैं
    मुद्रा बाजार में प्रवेश करने से पहले निवेशक को वैश्विक आर्थिक मुद्दों की व्यापक समझ होना जरूरी है। अलग-अलग देशों के आर्थिक आंकड़े भी मुद्रा बाजारों की चाल पर अपना असर डालते हैं। किसी भी देश की महंगाई दर मुद्रा की स्थिति पर असर डालती है। दो देशों में जहां महंगाई दर कम होगी वहां की करेंसी ज्यादा मजबूत होने के आसार हैं। महंगाई से जुड़ी होती हैं ब्याज दरें, जो मुद्रा पर असर डालती हैं। अगर ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो विदेशी मुद्रा का प्रवाह भी ज्यादा होता है। कम ब्याज दरें विदेशी मुद्रा के प्रवाह को कम कर सकती हैं। इसलिए जिन देशों में ब्याज दरें कम होंगी, मुमकिन है कि वहां की मुद्रा तुलनात्मक रूप से कमजोर हो जाए।
    चालू खाता घाटा शायद सबसे अहम आंकड़ा है जो मुद्रा पर अलग छोड़ता है। किसी भी देश और उसके कारोबारी देशों के बीच में वस्तुओं, सेवाओं, ब्याज और लाभांश आदि को मिला कर विदेशी मुद्रा में जो भुगतान किया जाता है उसके अंतर को चालू खाता घाटा कहते हैं। घाटे का मतलब हुआ कि देश को अपनी खरीददारी के लिए जितनी विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है उससे कम उसकी कमाई है और उस घाटे की कमी के लिए वो विदेशी मुद्रा के स्रोतों पर निर्भर है। जिस देश का चालू खाता घाटा जितना ज्यादा होता है, तुलनात्मक रूप से उसकी मुद्रा उतनी कमजोर होती है।   

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