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क्‍या है रेपो रेट, रिवर्स रेपो, बेस रेट, माईबोर और एमएसएफ

क्‍या है रेपो रेट, रिवर्स रेपो, बेस रेट, माईबोर और एमएसएफ
  • क्या है रेपो दर
  • रोजमर्रा के कामकाज के लिए बैंकों को भी पैसे की ज़रूरत पड़ जाती है। रिजर्व बैंक ही बैंकों को कर्ज देता है, जो एक दो दिन के लिए होता है। यह कर्ज ओवरनाइट कर्ज कहा जाता है। इसके लिए रिजर्व बैंक जिस दर से उनसे ब्याज वसूल करता है, उसे रेपो रेट कहते हैं। जब बैंकों को कम दर पर ऋण उपलब्ध होगा, वे भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपनी ब्याज दरों को कम कर सकते हैं । इसी तरह यदि रिजर्व बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी करेगा तो बैंकों के लिए लोन लेना महंगा हो जाएगा  और वे भी अपने ग्राहकों से वसूल की जाने वाली ब्याज दरों को बढ़ा देंगे।
  • क्या है रिवर्स रेपो रेट
  • जैसा इसके नाम से ही साफ है  यह रेपो रेट से उलट होता है। जब कभी बैंकों के पास दिन-भर के कामकाज के बाद बड़ी रकमें बची रह जाती हैं वे उस रकम को रिजर्व बैंक में रख दिया करते हैं  जिस पर आरबीआई उन्हें ब्याज दिया करता है। अब रिजर्व बैंक इस ओवरनाइट रकम पर जिस दर से ब्याज अदा करता है  उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं। दरअसल, रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है। जब भी बाजार में बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है तब आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्‍यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकमें उसके पास जमा करा दें  और इस तरह बैंकों के कब्जे में बाजार में छोड़ने के लिए कम रकम रह जाएगी।
  • बेस रेट
  • यह व्यवस्था पहली जुलाई 2010 से लागू हुई। बेस रेट को बैंचमार्क प्रमुख कर्ज दर ( प्राइम लेंडिंग रेट) की जगह लागू किया जा रहा है। इसके लागू हो जाने के बाद कोई भी व्यापारिक बैंक बेस रेट से कम दर पर लोन नहीं दे सकेगा। इसके लागू हो जाने पर छोटे उद्योगों को लाभ होगा। अभी तक बैंक बड़ी कंपनियों को बहुत कम ब्याजदर पर लोन दे देते थे और छोटे उद्यमों को ज्यादा दर पर कर्ज मिलता था।
  • एमएसएफ क्या है?
  • आरबीआई ने पहली बार फाइनैंशल ईयर 2011-12 में सालाना मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू में एमएसएफ का एलान किया था। यह कॉन्सेप्ट 9 मई 2011 को लागू हुआ। इसमें सभी शेड्यूल कमर्शल बैंक एक रात के लिए अपने कुल डिपॉजिट का 1 फीसदी तक लोन ले सकते हैं। बैंकों को यह सुविधा शनिवार को छोड़कर सभी वर्किंग डे में मिलती है। इंटरेस्ट रेट रेपो से 1 फीसदी ऊपर होता है। रेपो वह रेट है, जिस पर बैंक आरबीआई से शॉर्ट टर्म लोन ले सकते हैं।
  • क्‍या है माइबोर 
  • माइ्बोर यानी मुंबई इंटर बैंक ऑफर्ड रेट- यह भारत के इंटरबैंक मनी मार्केट की मुख्‍य दैनिक, इंडीकेटर ब्‍याज दर है। मनी मार्केट कारोबार बैंकों के बीच कर्ज के लेन पर आधारित होता हैं। बैंक अपनी तात्‍कालिक कैश जरुरतों के लिए आपस कर्ज का लेन देन करते हैं। इस कर्ज की दर माइबोर पर आधारित होती है। माइबोर की गणना नेशनल स्‍टॉक एक्‍सचेंज करता है। यह चुनिंदा बैंको की दैनिक कर्ज दरों के  औसत पर आधारित होती है। इसमें वही कर्ज शामिल होता है जो बैंक अपने सबसे अच्‍छी साख वाले ग्राहकों को देते हैं। प्रतिदिन सुबह सुबह नौ से दस के बीच कर्ज दरों को आधार बनाकर माइबोर तय की जाती है। जिस पर मनी मार्केट में कर्ज का लेन देन होता है। ठीक इसी तरह लंदन में लाइबोर, टोकियो में टोरीबोर और यूरोप के बााजारों के लिए यूरीबोर काम करती हैं। 
  • भारत में जब वित्तीय बाजार विकसित हुआ तो डेट बाजार में एक रेफरेंस रेट की जरूरत पड़ी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने मुंबई इंटर बैंक बिड रेट (मिबिड) को विकसित किया और बेंचमार्क के लिए गठित समिति की रिपोर्ट के बाद एनएसई माईबोर का विकास किया। इसे 15 जून 1998 को लॉन्च किया गया।
  • माईबोर की गणना एक डाटा के आधार पर की जाती है जिसे 30 बैंकों और प्राइमरी डीलरों से इकट्ठा किया जाता है। इस पैनल में सार्वजनिक और निजी दोनों ही क्षेत्रों के बैंक शामिल हैं। इनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, मसलन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक व निजी क्षेत्र के एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक शामिल हैं। साथ ही सिटी बैंक और ड्यूश जैसे विदेशी बैंक भी शामिल हैं। इसके अलावा प्राइमरी डीलरों में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज लिमिटेड, पीएनबी गिल्ट्स लिमिटेड आदि शामिल हैं। यह रेट दो मेथड के कॉम्बिनेशन से बनता है जो पोलिंग व बूट स्ट्रेपिंग है। पोलिंग मेथड में  रेट तय करने के लिए बाजार में हिस्सेदारी लेने वाले कुछ लोगों से रेट लिए जाते हैं

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