क्या है वायदा कारोबार और कमोडिटी एक्सचेंज, कैसे करते हैं हेजिंग

moneybhaskar.com

Jul 26,2014 03:32:00 PM IST

वायदा कारोबार में कोई कारोबारी अपनी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर सौदे करता है और इसमें पूरा पैसा भी एक साथ नहीं दिया जाता है, लेकिन एक्सपायरी की तारीख आने तक आपको अपना सौदा क्लियर करना होता है। भारत में कई कमोडिटी एक्सचेंज हैं, जिनमें कमोडिटी का वायदा कारोबार होता है। इनमें एमसीएक्स, एनसीडीईएक्स, एनएमसीई और आईसीईएक्स प्रमुख हैं।

कमोडिटी एक्सचेंज

कमोडिटी एक्सचेंज वे इंटरमीडियरी होते हैं, जो कमोडिटी कारोबार के लिए प्लेटफॉर्म मुहैया कराते हैं। इस समय देश में पांच राष्ट्रीय स्तर के कमोडिटी एक्सचेंज हैं- एमसीएक्स, एनसीडीईएक्स, एसीई, आईसीईएक्स और एनएमसीई।
ये सभी एक्सचेंज भारत सरकार द्वारा वायदा बाजार के नियमन के लिए स्थापित वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) के नियंत्रण में काम करते हैं। हालांकि, इनके अलावा देश में 20 और कमोडिटी एक्सचेंज हैं, लेकिन देश में कमोडिटी कारोबार के काफी बड़े हिस्से पर एमसीएक्स और एनसीडीईएक्स का ही कब्जा है।

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें स्पॉट प्राइस और हेजिंग के बारे में-
स्पॉट प्राइस किसी कमोडिटी का नकदी बाजार में जो मूल्य होता है, उसे उसकी स्पॉट प्राइस कहते हैं। यह ठीक वैसा ही है, जैसे हम नकदी देकर बाजार से कोई जिंस खरीदते हैं, जबकि उसका फ्यूचर प्राइस वह कीमत होती है, जो भविष्य में होने की संभावना है। किसी जिंस का फ्यूचर प्राइस उसके स्पॉट प्राइस से कम भी हो सकता है या अधिक भी हो सकता है। जब निकट भविष्य में फसल आने वाली होती है तो उस कृषि उत्पाद का फ्यूचर प्राइस उसके स्पॉट प्राइस से कम हो जाता है।क्या है हेजिंग? शेयर बाजार या कमोडिटी बाजार में निवेश के दौरान जोखिम से बचने के लिए निवेशक हेजिंग का इस्तेमाल करते हैं। खासकर, शेयर बाजार में वायदा अनुबंधों के दौरान किसी कंपनी के शेयरों में निवेश किए गए भावों में अचानक गिरावट दर्ज की जाने लगे, तो ऐसी विपरीत परिस्थितियों से बचने के लिए हेजिंग का उपयोग किया जाता है। सामान्य तौर पर हेज का इस्तेमाल शेयर बाजार में विपरीत परिस्थितियों से बचने के लिए किया जाता है। आप इसे एक उदाहरण के जरिए समझ सकते हैं। आपने किसी कंपनी का शेयर खरीदा और फिर उसको वायदा अनुबंधों के तहत किसी को बेच दिया। जाहिर है कि वायदा अनुबंध करते समय कोई कीमत भी तय कर दी जाती है। भविष्य के लिए किए गए सौदे की तारीख में आपको तय कीमत मिल सके, इसलिए हेजिंग का सहारा लिया जाता है। निवेशक हेजिंग का सहारा बाजार की अनिश्चितताओं से बचने के लिए करते हैं। एक बेहतर हेजिंग रणनीति उस निवेशक के जोखिम को शून्य की स्थिति तक पहुंचा सकती है।ऐसे करते हैं लॉन्ग हेज भविष्य में मार्केट में कीमतों की अस्थिरता को देखते हुए एक कमोडिटी निवेशक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में आगे के सौदे के लिए हेजिंग करते हैं, जिसे लॉन्ग हेज कहा जाता है। कंपनियां जब फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट करती हैं तब उनके लिए लॉन्ग हेजिंग फायदेमंद होती है। कंपनियों को यह पता होता है कि उन्हें भविष्य में कोई संपत्ति खरीदनी है या शेयर खरीदना है और फ्यूचर्स में मार्केट ऊपर की ओर जाएगा, तब स्वाभाविक सी बात है कि उसकी कीमतों में बढ़ोत्तरी होगी। इन हालात में कंपनियां सौदा या संपत्ति की कीमतों के लिए फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट कर लेती हैं। कंपनियों को इसका बहुत लाभ मिलता है। किसी कंपनी ने कोई सौदा छोटी अवधि के लिए किया है और उसे लगता है कि आगे भविष्य में मार्केट में उतार-चढ़ाव दर्ज किया जा सकता है तब वह अपने सौदों के अनुबंध में सुधार करके लॉन्ग हेजिंग में उसे तब्दील कर सकता है।कौन होते हैं हेजर्स? कमोडिटी बाजार में विभिन्न प्रकार के सहभागी होते हैं, उनमें हेजर्स काफी अहम भूमिका में होते हैं। ये कमोडिटी बाजार के वे सहभागी हैं, जो किसी कमोडिटी विशेष में निहित जोखिम का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। हेजर्स दो प्रकार के होते हैं- प्रोड्यूसर हेजर्स और कंज्यूमर हेजर्स। प्रोड्यूसर हेजर्स उस समय के जोखिम को कम करना चाहते हैं, जब बाजार में उत्पाद आने पर उसके मूल्य में कमी हो जाए।
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