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क्या है एफआरबीएम एक्ट

क्या है एफआरबीएम एक्ट
वित्तीय दायित्व और बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएमए) को भारतीय संसद ने वर्ष 2003 में पास किया था। इसका उद्देश्य वित्तीय अनुशासन को संस्थागत रूप देना, वित्तीय घाटे को कम करना व माइक्रो इकोनॉमिक मैनेजमेंट को बढ़ावा देने के साथ ही बैलेंस और पेमेंट को व्यवस्थित करना है।
इसे लागू करते समय यह लक्ष्य रखा गया था कि वर्ष 2008 तक वित्तीय घाटे को जीडीपी के तीन फीसदी के स्तर पर लाया जाएगा, लेकिन वर्ष 2008 में शुरू हुई आर्थिक मंदी के चलते यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया।
इसे देश में पारदर्शी वित्तीय मैनेजमेंट तंत्र की स्थापना करने के लिए लाया गया है। साथ ही, लंबी अवधि तक वित्तीय स्थिरता को सुनिश्चित करना भी इसका एक उद्देश्य है। इसमें इस बात का भी प्रावधान किया गया है कि केंद्र सरकार रिजर्व बैंक से कर्ज नहीं लेगी। हालांकि, इसमें किए गए प्रावधानों के मुताबिक सरकार कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक से कर्ज ले सकती है। कुछ कारणों से इसकी आलोचना भी की जाती है।
जानकारों का कहना है कि वित्तीय घाटे को कम करने के लिए सरकार को सामाजिक योजनाओं के खर्च में कमी करनी होगी। इसके साथ ही आलोचकों का यह भी कहना है कि इससे ग्रामीण विकास का काम प्रभावित होगा और उसमें रुकावट आएगी। हालांकि, कुल मिलाकर इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी माना जा रहा है।
 

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