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    जानिए, आखिर क्यों रेल बजट और आम बजट अलग-अलग किए जाते हैं पेश

    साल 1921 में ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ (Sir William Acworth) ने यह देखा कि पूरे रेलवे सिस्टम को एक बेहतर मैनेजमेंट की जरूरत है। साल 1924 में उन्होंने आम बजट से रेल बजट को अलग करने का प्रस्ताव रखा।

    अगर साल 1924 की बात करें, तो पूरे देश के बजट में रेल बजट की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत थी। देश के बजट में रेल बजट की इतनी अधिक हिस्सेदारी देखकर रेल बजट को आम बजट से अलग करने का विलियम का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। तब से लेकर अब तक रेल बजट को आम बजट से अलग पेश किया जाता है। जब रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया था, उस समय रेलवे का प्रयोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 75 फीसदी और माल ढुलाई में 90 फीसदी तक होता था। 

    साल 1843 में लॉर्ड डलहौजी ने देश में एक इंडियन रेलवे नेटवर्क शुरू करने का विचार किया। 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच देश की पहली ट्रेन चली। आइए जानते हैं भारतीय रेल की पूरी कहानी कुछ बिंदुओं में-

    => 1843- लॉर्ड डलहौजी ने देश में एक इंडियन रेलवे नेटवर्क शुरू करने का विचार किया।

    => 16 अप्रैल 1853- मुंबई से ठाणे के बीच पहली ट्रेन चली। इस सफर की दूरी 35 किलोमीटर थी।

    => 15 अगस्त 1854- हावड़ा से हुगली के बीच पहली पैसेंजर ट्रेन चलाई गई। ईस्ट इंडिया रेलवे को आम जनता के लिए खोल दिया गया।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें रेलवे की पूरी कहानी- 
     
    (सभी तस्वीरें प्रतीकात्मक हैं.)

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