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क्‍या है करेंट अकाउंट डेफिशिट और बैलेंस ऑफ पेमेंट?

बैलेंस ऑफ पेमेंट्स को आसान शब्दों में एक देश और शेष दुनिया के बीच हुए वित्तीय लेन-देन का हिसाब कहा जा सकता है।

what is balance of payments
करंट अकाउंट डेफिशिट
करेंट अकाउंट डे‍फिशिट देश में विदेशी मुद्रा की कुल आवक व निकासी का अंतर बताता है। विदेशी मुद्रा की आवक निर्यात, पूंजी बाजार में निवेश, प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश और विदेश रह रहे लोगों की स्‍वदेश में भेजे गए पैसे यानी रेमिटेंस के जरिये होती है। जब विदेशी मुद्रा की निकासी आवक से ज्‍यादा होती है तो घाटा बनता है। लेकिन विकासशील देशों में इस जीडीपी के अनुपात में एक निर्धारित स्‍तर का घाटा यह बताता है कि उस देश में विदेशी निवेश हो रहा है। इसके सीमा से अधिक होने पर ही विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है और घरेलू मुद्रा पर दबाव बनता है। भाारत में इसका आंकड़ा साल में चार बार जारी होता है। घाटा बढ़ने पर आयात सीमित किया जाता है और विदेशी मुद्रा की आवक बढाने के उपाय किये जाते हैं। 
भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स)
एक देश के अन्य देशों के बीच होने वाले वित्तीय लेन-देन के हिसाब को बैलेंस ऑफ पेमेंट्स कहा जा सकता है। दरअसल, एक देश और शेष दुनिया के बीच में आयात-निर्यात के लिए होने वाला वित्तीय लेन-देन शामिल रहता है। इस आयात-निर्यात में वस्तुएं, सेवाएं, वित्तीय पूंजी और वित्तीय हस्तांतरण शामिल है। यह एक विशेष अवधि के आधार पर तैयार होता है।
सामान्य रूप से इसे वार्षिक आधार पर तैयार किया जाता है। यह अकाउंट सरप्लस या डेफिसिट दोनों तरह का हो सकता है। 
 

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