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    बच्चों से पूछकर बनता है देश का बजट, गली-मोहल्लों तक घूमती है सरकार

    भारत में बजट सत्र का आगाज हो गया है। पहले 26 फरवरी को रेल बजट और फिर 28 को आम बजट पेश होना है। किसी भी देश का बजट उस देश के नागरिकों के जीवन को बहुत हद तक प्रभावित करता है। कभी बजट लोगों को कई राहत भी देता है तो कभी कई कठोर निर्णय मुश्किलें भी बढ़ाता है। किसी भी बजट की पारदर्शिता उस देश के लोगों के प्रति सरकार की एक बड़ी जवाबदेही होती है। इस मामले में आज भी दुनिया के कई देश बहुत पीछे हैं। 
     
    इंटरनेशनल बजट पार्टनरशिप द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक 100 में से 77 देश, जिनकी कुल जनसंख्या विश्व की आधी है, वे बजट में पारदर्शिता के मूलभूत मानदंडों को नहीं अपनाते हैं। हालांकि, सर्वे का कहना है कि इस मामले में भारत के बजट के सिस्टम में थोड़ा-सा आंशिक सुधार हुआ है। 
     
    बजट की पारदर्शिता से आशय है वित्तीय बजट से संबंधित पूर्ण सूचनाओं को समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से देश के आम नागरिकों के सामने प्रस्तुत करने से है। बजट ट्रांसपैरेंसी की पूर्व शर्त यह है कि बजट बनाने की प्रक्रिया में आम जनता की भागीदारी हो। बजट में पारदर्शिता और आम लोगों की इसमें भागीदारी और सरकारी एजेंसियों की प्रतिबद्धता बढ़ती है साथ ही जनता के फंड का सही और न्यायसंगत उपयोग होता है। 
     
    दक्षिण अफ्रीका में बजट के पूर्व बाजारों और गांवों की गलियों से लेकर चौराहों पर बच्चों से तक आर्थिक नीतियों पर चर्चा की जाती है और उन्हें क्या चाहिए और क्या नहीं चाहिए। सर्वाधिक ट्रांसपैरेंट बजट वाले देश की सरकारें नया बजट लाने से पहले आम लोगों, संस्थाओं, संगठनों के विचार और उनकी प्रतिक्रियाएं और आकाक्षाएं ही नहीं जानती, बल्कि इससे और आर्थिक गतिविधियों से संबंधित व्यापक सूचनाएं भी समयबद्ध तरीके से मुहैया कराती हैं।
     
    भारत भी दुनिया के उन टॉप 20 देशों में शामिल है, जो ओपन बजट इंडेक्स में अपना बेहतर स्कोर बनाए हुए हैं। नए सर्वे में भारत को कुछ अंकों की बढ़ोतरी मिली है, लेकिन वह अपनी पिछले रैंक में ही बरकरार है। जानिए, इस सूची में किस स्थान पर है भारत और कितना है इसका स्कोर और कितने अंक की हुई बढ़ोतरी।
     
    दैनिक भास्कर डॉट काम पर जानिए ऐसे 20 देशों के बारे में जहां बजट में पारदर्शिता लाने के लिए बेहतर तरीका अपनाया गया है और ये देश बजट में सर्वाधिक पारदर्शिता वाले देशों की श्रेणी में शामिल हैं। आगे की स्लाइड पर क्लिक कर जानें कहां बच्चों से पूछकर बनता है बजट, कौन सड़कों, गली-मोहल्लों में जाकर जनता से है पूछता, इन मामलों में भारत कहां है टिकता। 

     

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