छोटी पूंजी से घर बैठकर भी शुरू हो सकता है ये बिजनेस, देगा मोटा मुनाफा

BUSINESS TEAM

Nov 27,2014 12:52:00 PM IST
लुधियाना. अगर आप अपना कारोबार शुरू करने की प्लानिंग कर रहे हैं और इसके लिए आप छोटी पूंजी लगाना चाहते हैं तो कपड़े(गारमेंट) का कारोबार ऐसा है जिसमें पहले दिन से आप मुनाफा कमा सकते हैं। इस कारोबार को शुरू करने के लिए आपको किसी बड़ी दुकान या गोदाम की जरूरत नहीं है। ये कारोबार आप घर या फिर छोटी सी दुकान से शुरू कर सकते हैं और वो भी सिर्फ 1000 रुपए की पूंजी से। शुरुआती तौर पर 1000 रुपए से भी कपड़े का ऑर्डर बुक किया जा सकता है। कपड़े का कारोबार शुरू करने के लिए कुछ चीजों की जरूरत होती है। ऐसे में जरूरत है कि निवेश की पूंजी के बजाए आप इन चीजों की फॉर्मेलिटी को पहले पूरा कर लें।
इन चीजों की होती है जरूरत
टिन नंबर लें
कारोबार शुरू करने के लिए आपको टिन नंबर लेना होगा। टिन नंबर लेने से आपको कारोबार के लिए खरीदे गए सामान पर टैक्स भी अदा करना होगा। इस नंबर के जरिए ही सेल टैक्स डिपार्टमेंट आपके माल की जांच करके उसे पास करता है। टिन नंबर लेने के लिए पैन नंबर, आईडी और एड्रेस प्रूफ, बिजनेस टर्नओवर(अगर है तो) परचेज बिल, हस्ताक्षर के साथ बिजनेस नेम और सेल्फ डेक्लेरेशन के साथ प्रोडक्ट्स की जानकारी। इसके बाद कमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट आपको 11 अंकों को टिन नंबर जारी करेगा। हालांकि, 2 लाख रुपए तक के माल टैक्स में छूट है।
टिन नंबर के आधार पर मिलता है ऑर्डर
1000 रुपए बतौर टोकन मनी डिस्ट्रीब्यूटर लेता है। इसकी एवज में डिस्ट्रीब्यूटर आपको माल देता है। माल का पूरा पैसा आप अपना कारोबार शुरू करने और माल बेचने के बाद अदा कर सकते हैं। माल कितने का होगा आपकी टोकन मनी उस पर निर्भर करेगी। रजनी गारमेंट के मालिक राजेंद्र महेश्वरी का कहना है कि लुधियाना कपड़ों के थोक कारोबार का गढ़ है। इसके लिए लुधियाना के थोक व्यापारी से आप फोन पर भी अपना टिन नंबर कन्फर्म कराकर ऑर्डर बुक कर सकते हैं। इस तरह आप घर बैठे सिर्फ 1000 रुपए से कारोबार शुरू कर सकते हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़िए कारोबार शुरू करने के लिए और क्या-क्या चाहिए।
नोटः तस्वीरें प्रस्तुतिकरण के लिए इस्तेमाल की गई हैं।
 
वैट के लिए हों रजिस्टर्ड
 
11 अंकों का टिन नंबर मिलने के बाद आपकी हर ट्रांजैक्शन पर वैट लगने के बाद टिन नंबर अंकित होगा। इन 11 नंबर के पहले 3 नंबर दर्शाएंगे कि ये किस राज्य का टिन नंबर है इससे सेल टैक्स डिपार्टमेंट को जांच करने में आसानी रहेगी। यदि आपका नंबर बिल या ट्रांसपोर्टेशन बिल पर नहीं कटता तो आपको सेल्स टैक्स ऑफिस जाकर ये नंबर रजिस्टर्ड कराना होगा। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो कमर्शियल डिपार्टमेंट आपके माल को जब्त करके सेल्स की धाराओं के तहत जुर्माना वसूल कर सकता है।
 
 
माल उठाने के दो तरीके
 
बिजनेस शुरू करने के लिए फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद माल उठाने का नंबर आता है। माल उठाने के लिए आप दो तरीके अपना सकते हैं। पहला सीधे एजेंट के जरिए फैक्ट्री आउटलेट से और दूसरा डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए। एजेंट के जरिए माल लेने पर आपको पहले ही ऑर्डर बुक करना होगा। एजेंट आपकी पसंद की कंपनी का माल निकालकर ट्रांसपोर्ट के जरिए आपके पास भेज देगा। इसके बाद आप अपना मार्जिन लगाकर ये माल बेच सकेत हैं। दूसरा और आसान तरीका है डिस्ट्रीब्यूटर से माल खरीदना। यहां आपको वैरायटी मिल जाएगी और आप अपनी पसंद की दो-तीन कंपनियों का माल भी उठा सकते हैं। 
 
फॉर्म 32 लेना होगा
 
माल उठाने से पहले पेनेल्टी से बचने के लिए कमर्शियल डिपार्टमेंट से फॉर्म 32 लेना जरूरी है। आपका डिस्ट्रीब्यूटर या फैक्ट्री आउटलेट फॉर्म 32 दिखाने पर ही आपको माल देगा। हालांकि, अब इसे कुछ रिटेलर्स या फिर डिस्ट्रीब्यूटर रखने लगे हैं। इससे फायदा है कि आपका माल कभी भी सेल टैक्स के झमेले में नहीं फंसेगा और पूरे माल का पक्का बिल आपके पास होगा। इससे सेल टैक्स डिपार्टमेंट को भी जांच करने में आसानी होगी।
 
ट्रांसपोर्टर को करें बुक
 
फॉर्म 32 की फॉर्मेलिटी पूरी करने के बाद ट्रांसपोर्टर को बुक करके अपना माल अपने शहर में पहुंचाएं। इससे बाद आप अपने शहर में इस माल को बेच सकते हैं। माल बुक करने और कारोबार शुरू करने से पहले अपने मार्केट की पड़ताल कर लें और कुछ रिटेलर्स का ऑर्डर बुक कर लें। इसके बाद माल बेचकर आप मुनाफा कमा सकते हैं।
 
अपनी मार्जिन की करें प्राइसिंग
 
कुछ कारोबारी अपना मार्जिन फैक्ट्री आउटलेट के स्टीकर पर ही तय करा लेते हैं। ऐसा करना मुनाफे के लिहाज से ठीक नहीं है। क्योंकि फैक्ट्री आउटलेट आपको एक लिमिट तक मार्जिन देगा। लेकिन, आप अपनी ट्रांसपोर्टेशन और अन्य कॉस्ट को मिलाकर अपना मार्जिन तय कर सकते हैं। हालांकि, स्टैंडर्ड मार्जिन 25 फीसदी तक माना गया है। डिस्ट्रीब्यूटर्स और कारोबारियों की मानें तो इसके लिए 25 फीसदी मार्जिन बहुत अधिक होता है। लोग 10-15 मार्जिन पर भी माल बेच रहे हैं। दूसरा तरीका है कि अपना मार्जिन खुद तय करें और प्राइसिंग सेट कर उसे बेचें। उसमें सीधा मुनाफा आपका ही होता है।
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