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    घर खरीदते वक्त छिपी लागत की करें पड़ताल

    घर खरीदते वक्त छिपी लागत की करें पड़ताल

    घर बुक कराने से पहले हर लागत के बारे में पता कर लेना चाहिए। अगर विभिन्न लागत जोडऩे के बाद उनकी खरीदारी महंगी पड़ रही है तो दूसरा विकल्प देखना अच्छा रहेगा

    अलग-अलग करके लें घर की लागत की जानकारी
    स्टांपड्यूटी और रजिस्ट्री के बारे में भी करें पड़ताल
    पावरबैकअप के प्रति यूनिट शुल्क के बारे में करें पता
    सोसायटीचार्ज और मेंटिनेंस चार्ज की छानबीन है जरूरी
    सारीलागत जानने के बाद करें घर लेने का फैसला
    अगरखरीदारी महंगी पड़ रही है तो किसी और विकल्प का करें चयन

    घरकी खरीदारी करते वक्त आपका बजट चाहे जितना भी हो पर ऐन मौके पर ऐसा लगता है कि पैसे कम पड़ गए हैं। यही वजह है कि, जब लोग घर खरीदने जाते हैं तो बिल्डर से सबसे पहला सवाल पूछते हैं कि कुल मिलाकर यह खरीदारी उन्हें कितने की पड़ेगी। ऐसे में बिल्डर शुरुआत में तो ग्राहकों को खुश करने के लिए आकर्षक कीमत बता देते हैं, हालांकि बाद में कई अनाप -शनाप खर्च बताकर ग्राहकों से मोटी रकम वसूलते हैं।

    घर की खरीदारी के साथ कई खर्च जुड़े होते हैं जिन्हें हम हिडेन कॉस्ट कहते हैं। आज हम आपको घर की खरीदारी से जुड़ी कुछ हिडेन कॉस्ट यानि की छुपी हुई लागतों के बारे में बताएंगे जो आम तौर पर बिल्डर ग्राहकों से छुपा जाते हैं।

    प्राइम लोकेशन चार्ज (पीएलसी)
    अगर प्राइम लोकेशन पर घर लेते हैं तो कई बारे इसके लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर बिल्डर कहता है कि, घर गार्डन फेसिंग है तो इसके लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ेगी। अगर आप भी प्राइम लोकेशन वाला घर खरीद रहे हैं तो बिल्डर से पहले ही इस बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए। ऐसे न हो कि आपका बजट हद से ज्यादा बढ़ जाए।

    वास्तु कॉस्ट
    घर हमारी भावनाओं और मान्यताओं से जुड़ा हुआ मसला है। भले ही आज का माहौल बहुत ही आधुनिक हो चला हो पर घर को लेकर अभी भी हमारी सोच संस्कृति से जुड़ी हुई है। मसलन लोग आज कल वास्तु के हिसाब से  अपना घर चाहते हैं। ग्राहकों की इस कमजोरी का फायदा उठाते हुए कई बार बिल्डर वास्तु के लिए भी अतिरिक्त  राशि वसूलते हैं।
    सोसायटी चार्ज
    रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म प्रॉप इक्विटी के सीईओ और फाउंडर समीर जसूजा के मुताबिक ग्राहकों से बिल्डर सोसायटी चार्ज के नाम पर भी भारी भरकम राशि वसूलते हैं जिसका घर खरीदते वक्त जिक्र तक नहीं होता है। हालांकि जब ग्राहक घर खरीदने की प्रक्रिया में काफी आगे बढ़ चुका होता है तो उसे ऐसे चार्ज के बारे में बताया जाता है। लिहाजा आपको घर की खरीदारी से पहले ही इस बारे में पूछ लेना चाहिए जिससे बाद में आप ठगा हुआ सा महसूस न करें।

    पावर बैक अप और मेंटिनेंस चार्ज
    सोसायटीमें घर लेने के अपने ही फायदे हैं। उदाहरण के तौर पर आपको कभी बिजली पानी और पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। हालांकि इसके लिए बिल्डर ग्राहकों से काफी मोटी रकम वसूलते हैं। इस तरह की लागत की गणना के लिए ज्यादातर बिल्डर किसी मानक का पालन नहीं करते हैं।

    जसूजा के मुताबिक ऐसा देखने में आया है कि कई बिल्डर ग्राहकों को 13 रुपये प्रति यूनिट की दर से पावर बैकअप दे रहे हैं जबकि घरेलू बिजली के लिए ज्यादातर जगहों पर लोगों को प्रति यूनिट तीन से चार रुपये तक खर्च करने होते हैं।

    अक्लमंदी इसी में है कि आप घर खरीदने से पहले पावर बैकअप के बारे में जांच पड़ताल कर लें और बिल्डर से यह स्पष्ट कर लें कि आखिर आपको वह कितने रुपये में प्रति यूनिट की दर से पावर बैकअप उपलब्ध कराएगा।

    इसके अलावा बिल्डर मेंटिनेंस के नाम पर ग्राहकों से सालाना एक लाख से दो लाख रुपये तक की राशि वसूलते हैं। इसके बारे में घर खरीदते वक्त पता कर लेना चाहिए जिससे बाद में आपका बजट न बढ़े।

    स्टांप ड्यूटी
    वैसे तो स्टांप ड्यूटी के बारे में जानकारी देना बिल्डर की जिम्मेदारी नहीं है। इसके बावजूद लोग बिल्डर से यह सवाल जरूर पूछते हैं कि घर की कुल लागत कितनी आएगी जिसमें रजिस्ट्री की कीमत भी शामिल होती है।

    हालांकि बिल्डर घर की कीमत तो ऑल इंक्लूजिव कहकर बता देते हैं पर वे स्टांप ड्यूटी यानि की रजिस्ट्री की लागत का खुलासा नहीं करते हैं। इस बारे में ग्राहकों को आखिर में पता चलता है पर तब तक बजट काफी बढ़ चुका होता है।

    घर खरीदते वक्त ग्राहक सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि बिल्डर से अलग-अलग करके सारी लागत के बारे में नहीं पूछते हैं। आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी और क्रेडाई एनसीआर के वाइस प्रेसिडेंट अनिल शर्मा के मुताबिक ग्राहकों को घर बुक कराने से पहले हर लागत के बारे में अलग से छानबीन कर लेनी चाहिए।

    अगर अलग-अलग लागत जोडऩे के बाद उनकी खरीदारी महंगी  पड़ रही है और इस बजट में किसी बेहतर लोकेशन पर घर मौजूद है तो उन्हें ऐसा ही विकल्प चुनना चाहिए। कुल लागत की जानकारी आपके पास मौजूद होगी तो उसी हिसाब से फंड का इंतजाम भी किया जा सकेगा।

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