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    इनकम टैक्‍स बचाने के सात उपाय, जो सैलरी से नहीं कटने देंगे आपके रुपये

    मेहनत करके लोग पैसा कमाते हैं लेकिन जब यही पैसा इनकम टैक्स के रूप में साल के अंत में आपकी सैलरी से काट लिया जाता है। तो यकीनन यह सबसे कष्ट देने वाला लम्हा होता है। हर कोई चाहता है कि उसका टैक्स कम से कम कटे लेकिन इसके लिए आयकरदाता पूरी तैयारी नहीं कर पाता है। आज हम इनकम टैक्स एक्सपर्ट के शब्दों में आपको वो तरीका बताएंगे जिससे सैलरी से कटने वाला इनकम टैक्स बचाया जा सकेगा। इन तरीकों को अपनाकर आप हजारों रुपये तक हर साल बचा सकते हैं।
     
    जनवरी से मार्च वित्त वर्ष के वो महीने होते हैं जब टैक्स प्लानिंग चिंता का सबसे बड़ा मुद्दा होता है। ज्यादा टैक्स कटौती के दायरे में आने वाले वेतनभोगी आखिरी समय में निवेश के ऐसे विकल्प खोजते हैं जहां वे टैक्स बचा सकें। लेकिन समझदारी इसी में है कि विभिन्न इन्स्ट्रूमेंट्स की विशेषताओं और फायदों पर नजर डाल ली जाए। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर और और द फाइनेंशियल प्लानर्स गिल्ड इंडिया के सदस्य जितेंद्र पी.एस. सोलंकीबता रहे हैं कि टैक्स प्लानिंग के लिए कैसे समझदारी से निवेश करें:  
     
     
    1. जीवन बीमा : इसमें आप हर साल प्रीमियम जमा करते हुए टैक्स सेविंग कर सकते हैं। टैक्स बेनिफिट के एक अप्रैल 2012 से हुए बदलाव के अनुसार यदि बेस कवरेज प्रीमियम के 10 गुना से कम है तो टैक्स सेविंग का लाभ नहीं मिल पाएगा। यह शर्त पॉलिसी की पूरी अवधि तक लागू रहती है। टैक्स सेविंग के लिहाज से इसे लेने का फैसला जल्दबाजी में न करें। 
     
    2. ईएलएसएस : इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम भी अच्छे रिटर्न के साथ टैक्स सेविंग का पसंदीदा माध्यम रहा है। इसका मुख्य कारण तीन साल का लॉक-इन पीरियड और निवेश का सरल तरीका है। हालांकि बीते कुछ वर्षों के दौरान शेयर बाजार की अस्थिरता से इसका आकर्षण घटा है। लेकिन बाजार को समझने वालों के लिए अभी भी टैक्स सेविंग के लिए अच्छा इन्स्ट्रूमेंट है। 
     
    3. स्मॉल सेविंग्स : पब्लिक प्रोविडेंट फंड लंबी अवधि की प्लानिंग के लिहाज से अच्छा निवेश है। इसमें निवेश की रकम, ब्याज और मैच्योरिटी पर टैक्स नहीं लगता है। हालांकि एक दिसंबर 2011 से इसकी ब्याज दरें बाजार से जोड़ दी गई हैं। फिर भी टैक्स सेविंग के लिए यह अच्छा विकल्प है। एनएससी या डाकघर जमा जैसी अन्य स्मॉल सेविंग स्कीम में निवेश करना आसान है। लेकिन इन पर मिलने वाले ब्याज पर कर लगता है। इसलिए सभी निवेशकों के लिए यह फायदेमंद नहीं होती। 
     
    4. एनपीएस : न्यू पेंशन स्कीम अब सबके लिए उपलब्ध है। ऐसे निवेशक जो रिटायरमेंट प्लानिंग के लिहाज से निवेश का एलोकेशन नहीं कर पाते उनके लिए यह अच्छा विकल्प है। नियोक्ता के कॉन्ट्रिब्यूशन से एडिशनल टैक्स बेनिफिट इसे आकर्षक बनाता है। 
     
    5. फिक्स्ड डिपॉजिट: टैक्स बचाने के लिहाज से एफडी सबसे आसान विकल्प है। लेकिन इनका ब्याज टैक्स फ्री नहीं है। यह विकल्प उनके लिए ठीक है जो लोअर टैक्स ब्रैकेट में आते हैं। 
     
    6. हेल्थ इंश्योरेंस: यह 80सी से ज्यादा टैक्स बेनेफिट देता है। व्यक्ति को पहले अपनी जरूरत को समझकर इसे लेना चाहिए। इसमें टैक्स बेनिफिट एक एडेड एडवांटेज है। 
     
    7. आरजीईएसएस : राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम टैक्स लाभ का नया विकल्प है। यह उनके लिए है जिन्होंने शेयर बाजार में कभी निवेश नहीं किया है। इसके तहत 50 हजार रुपए तक की सीमा में जितना भी निवेश करते हैं उसके 50 फीसदी के बराबर अपनी आय में टैक्स बेनेफिट ले सकते हैं। लेकिन इक्विटी स्कीम होने से जोखिम भी जुड़ा होता है। 
     
    टैक्स प्लानिंग आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का एक हिस्सा है। इसके उपाय वित्त वर्ष के शुरू में ही कर लेने चाहिए। इससे आखिरी महीनों में आप पर वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा और भागदौड़ से भी बचेंगे। 
     

     

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