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    बड़ा सवाल - सोने और चांदी में गिरावट के पीछे हो सकते हैं सटोरिये

    बड़ा सवाल - सोने और चांदी में गिरावट के पीछे हो सकते हैं सटोरिये

    पिछलेतीन सप्ताह से लगातार सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट अब भले रुक रही हो, लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे सटोरियों का दिमाग काम कर रहा है। जिस तरह से शेयर बाजार में सटोरिये बाजार को अपनी उंगली पर नचाते हैं, उसी तरह से सटोरियों ने सोने की कीमतों में भी गेम खेला है।

    बाजार के तमाम जानकार मानते हैं कि सोने की कीमतों में गिरावट है तो सही, पर इसके पीछे दिमाग सटोरियों का है। एक अग्रणी कमोडिटी ब्रोकर का मानना है कि सोने में पिछले तीन हफ्ते से जो गिरावट हो रही है, उसके पीछे सटोरियों और कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर के इनवेस्टमेंट बैंकरों का है। इस ब्रोकर के अनुसार इनवेस्टमेंट बैंकर्स भी काफी मात्रा में सोना का भंडार रखे हुए हैं, इस कारण उनकी ओर से इस तरह की खबरें फैलाई जा रही हैं।

    हालांकि इस मामले में आईसीआईसीआई प्रू एएमसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष हिमांशु पंड्या कहते हैं कि सोने में जो गिरावट दिखी है, वह घबराहट की वजह से दिखी है। जितनी कमजोरी की संभावना जताई जा रही है, उतनी कमजोरी नहीं होगी, इसलिए निवेशकों को यहां पर सोने में खरीदी करना फायदेमंद हो सकता है।

    इसी बात को टॉरस म्यूचुअल फंड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वकार नकवी भी कहते हैं कि सोने की गिरावट कई देशों की संभावित सोने की बिक्री के बाद से देखी जा रही है और तीन हफ्तों में जो सोने की गिरावट दिखी है, अब ऐसा लगता है कि यहां से सोने की कीमतें थम जाएंगी।

    पर सोने में गिरावट तब हुई थी जब साइप्रस सहित कई देशों ने कर्ज चुकाने के लिए सोने की बिक्री की संभावना जताई थी। यह संभावना किसी सरकार ने नहीं जताई थी, बल्कि उनके किसी आधिकारिक बयान में कहीं जिक्र किया गया था,

    लेकिन इसके बाद पिछले तीन हफ्तों में सोनी की कीमतों में जो गिरावट देखी गई है, वह तो बिना किसी देश के सोने बेचने के ही देखी गई है। इसलिए कहा जा रहा है कि जब देशों ने सोना बेचा ही नहीं तो फिर गिरावट का क्या अर्थ है?

    आधिकारिक आंकड़ों की बात करें तो साइप्रस के पास सोने का जो भंडार है, वह 12 टन है, और इस 12 टन सोने की बिक्री से बहुत ज्यादा आपूर्ति नहीं हो सकती क्योंकि भारत में तो हफ्ते में 12 टन सोने की खपत होती है।
     

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