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    टैक्स सेविंग में महत्वपूर्ण है एचआरए की भूमिका

    टैक्स सेविंग में महत्वपूर्ण है एचआरए की भूमिका

    आपको एचआरए के अंतर्गत कितनी टैक्स छूट मिलेगी इसका अंदाजा आप तीन चीजों के मूल्य से लगा सकते हैं। पहला है वास्तविक एचआरए जो आपको वेतन में दिया जाता है। दूसरा, वास्तविक किराया जिसका भुगतान आप करते हैं , इसमें से आपकी बेसिक सेलरी का 10 फीसदी घटा दिया जाता है। इसके अलावा, अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं तो आपके वेतन का 50 फीसदी और अगर गैर मेट्रो शहर में रहते हैं तो आपके वेतन का 40 फीसदी इससे घटाया जाता है। इन तीनों में से जो भी सबसे कम होता है उस पर आपको एचआरए के अंतर्गत टैक्स छूट का फायदा मिलता है

    एचआरए से कैसे उठाएं लाभ
    कोईजरूरी नहीं है कि एचआरए का फायदा लेने के लिए आप केवल घर के मालिक को ही किराए का भुगतान करें। टैक्स छूट का फायदा लेने के लिए आप अपने माता पिता और जीवनसाथी को भी किराए का भुगतान कर सकते हैं

    इसकेलिए आपको रेंट रसीदों के माध्यम से किराए का प्रूफ जमा कराना होगा। इसमें आपको केवल दो रसीदों की जरूरत पड़ेगी। एक रसीद आपको वित्त वर्ष की शुरुआत के किराए के लिए दिखानी होगी ओर दूसरी साल के अंत में दिए गए किराए के भुगतान के लिए दिखानी पड़ेगी

    अगरआपने अपना घर किराए पर दिया और किसी और शहर से काम कर रहे हैं। अगर आपको हाउस प्रॉपर्टी से कोई आय होती है तो अन्य स्रोतों से आय के अंतर्गत इसे दर्शाना होगा

    नयावित्त वर्ष शुरू होने में 45 दिन से भी कम वक्त बचा है। वित्त वर्ष खत्म होने पर इनकम टैक्स नाम का शब्द हमारे दिमाग में घूमने लगता है पर अच्छा प्लानर वही कहलाता है जो वित्त वर्ष की शुरुआत में ही इसके लिए तैयारी कर ले।

    ऐसे कई टैक्स कंपोनेंट हैं जिनके बारे में स्पष्टता बेहद जरूरी है। आपको इन्हीं से अंदाजा लगाना होगा कि टैक्स प्लानिंग के साथ बेहतरीन रिटर्न कैसे कमाया जा सकता है। इसी तरह का एक टैक्स कंपोनेंट है डिडक्शन जो आप हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) से क्लेम कर सकते हैं।

    वेतनभोगी लोगों को आयकर अधिनियम 1961 की धारा 10(13ए) के नियम 2ए  के तहत एचआरए पर कर छूट का फायदा दिया जाता है। जहां तक स्वरोजगार वाले व्यक्तियों की बात है तो उन्हें इसके लिए धारा 80जीजी के तहत टैक्स छूट मिलती है।

    किन बातों पर करें गौर
    जब आप एचआरए के तहत टैक्स छूट की गणना करते हैं तो चार पहलुओं पर गौर करना बेहद जरूरी है। इसमें आपका वेतन,  मिला हुआ एचआरए, किराए का वास्तविक भुगतान, और आपके रहने का स्थान शामिल है, फिर चाहे आप मेट्रो शहर में रहते हों या नॉन मेट्रो में। अगर यह सारे कारक पूरे साल एक जैसे रहते हैं तो सालाना के आधार पर टैक्स छूट की गणना की जाएगी। अगर इसमें परिवर्तन होता है तो इसकी गणना मासिक आधार पर की जाएगी।

    उदाहरण के तौर पर अगर किराया बढ़ा है या इसमें अन्य कोई परिवर्तन हुआ है तो इसकी गणना महीने के हिसाब से होगी। एचआरए की गणना करते वक्त, रहने की जगह का काफी महत्व होता है। मेट्रो शहरों में एचआरए पर 50 फीसदी तक की टैक्स छूट मिलती है। जहां तक नॉन मेट्रो शहरों की बात है तो यह बेसिक सेलरी का 40 फीसदी है।

    किराए का भुगतान करने पर
    ऐसा कोई जरूरी नहीं है कि एचआरए का फायदा लेने के लिए आप केवल घर के मालिक को ही किराए का भुगतान करें। टैक्स छूट का फायदा लेने के लिए आप अपने माता पिता और जीवनसाथी को भी किराए का भुगतान कर सकते हैं। हालांकि उन्हें यह अन्य स्रोत से हुई आय के अंतर्गत दिखानी होगी।

    साथ ही इस पर टैक्स भी चुकाना होगा। इसके लिए आपको रेंट रसीदों के माध्यम से किराए का प्रूफ जमा कराना होगा। इसमें आपको केवल दो रसीदों की जरूरत पड़ेगी। एक रसीद आपको वित्त वर्ष की शुरुआत के किराए के लिए दिखानी होगी ओर दूसरी साल के अंत में दिए गए किराए के भुगतान के लिए दिखानी पड़ेगी।

    इस पर आपको एक रुपये का रेवेन्यू स्टांप लगाना पड़ेगा। साथ ही, इसमें उस व्यक्ति के हस्ताक्षर होने जरूरी हैं जिसे आपने किराए का भुगतान किया है। इसके अलावा रेसिडेंस का पता, किराए की राशि और जिस व्यक्ति ने इसे किराए पर दिया है उसके नाम का जिक्र भी होना चाहिए।

    कैसे होती है एचआरए की गणना
    आपको एचआरए के अंतर्गत कितनी टैक्स छूट मिलेगी इसका अंदाजा आप तीन चीजों के मूल्य से लगा सकते हैं। पहला है वास्तविक एचआरए जो आपको वेतन में दिया जाता है। दूसरा, वास्तविक किराया जिसका भुगतान आप करते हैं , इसमें से आपकी बेसिक सेलरी का 10 फीसदी घटा दिया जाता है।

    इसके अलावा, अगर आप मेट्रो शहर में रहते हैं तो आपके वेतन का 50 फीसदी और अगर नॉन मेट्रो शहर में रहते हैं तो आपके वेतन का 40 फीसदी इससे घटाया जाता है। इन तीनों में से जो भी सबसे कम होता है उस पर आपको एचआरए के अंतर्गत टैक्स छूट का फायदा मिलता है।

    आपको एचएआर के अंतर्गत अधिकतम फायदा मिल सके इसके लिए आप अपने नियोक्ता से बात कर सकते हैं। वह आपके वेतन की संरचना इसी हिसाब से बना सकता है।

    आपको समझाने के लिए यहां एक उदाहरण दिया गया है। सुनीता को 40,000 प्रतिमाह का वेतन मिलता है। वे दिल्ली में एक अपार्टमेंट में रहती हैं जिसका किराया प्रतिमाह 20,000 रुपये है। उन्हें 25,000 रुपये का वास्तविक एचआरए मिलता है। ऐसे में एचआरए की गणना के लिए इन मूल्यों का इस्तेमाल किया जाएगा।

    दिया गया वास्तविक एचआरए :     25,000
    बेसिक सेलरी का 50' :     20,000
    वेतन के 10' से कितना ज्यादा रेंट का
    भुगतान किया गया :    20,000-4,000 = 16,000

    ऐसे में एचआरए के अंतर्गत टैक्स छूट की गणना के लिए इनमें से सबसे कम वाली संख्या का इस्तेमाल किया जाएगा। तो सुनीता का नेट टैक्सेबल एचआरए होगा  
    25,000 -16,000 = 9,000

    अपने होम लोन और एचआरए पर टैक्स छूट का फायदा उठाएं
    जब तक आप कहीं रहने के लिए किराए का भुगतान कर रहे हैं तब तक आप अपने वेतन में दिए जा रहे एचआरए पर टैक्स छूट का फायदा क्लेम कर सकते हैं।

    साथ आपको होम लोन के ब्याज और मूलधन के भुगतान पर भी आयकर में फायदा मिलेगा। उदाहरण के तौर पर अगर आपने अपना घर किराए पर दिया और किसी और शहर  से काम कर  रहे हैं। अगर आपको हाउस प्रॉपर्टी से कोई आय होती है तो अन्य स्रोतों से आय के अंतर्गत इसे दर्शाना होगा।
    आदिल शेट्टी - लेखक bankbazaar.com के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं।

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