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    दोगुना हो गया दर्जन भर से ज्यादा बैंकों का एनपीए

    दोगुना हो गया दर्जन भर से ज्यादा बैंकों का एनपीए

    देशभर के बैंक भले ही इस समय गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को कम करने पर ध्यान दे रहे हों और बैंकों के शीर्ष अधिकारी इस पर नजर रख रहे हों, पर बावजूद इसके सितंबर तिमाही में दर्जन भर बैंकों का एनपीए 100 फीसदी से अधिक बढ़ा है।

    जिस तरह का यह रुझान है, उससे यह अनुमान बैंकिंग विश्लेषक लगा रहे हैं कि मार्च की चौथी तिमाही में यह आंकड़ा और आगे बढ़ सकता है। विदेशी बैंक का एनपीए भी सार्वजनिक बैंकों की तरह ही बढ़ रहा है।

    एनपीए सोर्स डॉटकॉम के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक देवेंद्र जैन कहते हैं कि सितंबर तिमाही का आंकड़ा देखे तो दर्जन भर बैंक ऐसे मिलेंगे, जिनके एनपीए में 100 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है और कई बैंक ऐसे हैं जिनके एनपीए में 80 फीसदी तक की वृद्धि देखी गई है।

    इनमें छोटे और बड़़े आकार के दोनों तरह के बैंकों का समावेश है।
    करूर वैश्य बैंक का मार्च, 2012 में एनपीए 468 फीसदी बढ़ा तो सितंबर में यह 38 फीसदी बढ़ा।

    मार्च में इसका एनपीए बढ़कर 65 करोड़ रुपये हो गया था, जबकि सितंबर में 22 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई थी। इसी तरह सेंट्रल बैंक का एनपीए मार्च में 438 फीसदी बढ़कर 3,710 करोड़ हो गया तो सितंबर में यह 224 फीसदी बढ़ा। इंडियन बैंक का शुद्ध एनपीए मार्च तिमाही में 201 फीसदी बढ़ा तो सितंबर तिमाही में भी यह 111 फीसदी बढ़ा।

    इसी तरह, आंध्रा बैंक का मार्च में एनपीए 176 फीसदी यानी 482 करोड़ रुपये बढ़ा तो सितंबर में यह 68 फीसदी बढ़ा और राशि के रूप में यह 744 करोड़ रुपये बढ़ा। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का एनपीए मार्च में 162 फीसदी बढ़ा तो सितंबर में 21 फीसदी, पंजाब एंड सिंध बैंक का मार्च में 130 फीसदी एनपीए बढ़ा तो सितंबर में इसका एनपीए 160 फीसदी बढ़ गया।

    कॉरपोरेशन बैंक भी पीछे नहीं है और इसका एनपीए मार्च में 119 फीसदी बढ़ा तो सितंबर में 81 फीसदी बढ़ा। देश के दूसरे क्रम के सबसे बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए मार्च में 95 फीसदी बढ़ा तो सितंबर तिमाही में यह 113 फीसदी बढ़ा और राशि के रूप में इसमें 5,795 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।

    देश के अग्रणी बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा का मार्च तिमाही में एनपीए 95 फीसदी बढ़ा तो सितंबर तिमाही में यह 113 फीसदी बढ़ा और राशि के रूप में इसमें 1,266 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

    देवेंद्र जैन कहते हैं कि बैंकों की यह स्थिति आने वाले समय में भी जारी रहेगी। विदेशी बैंक जैसे बैंक ऑफ बहरीन एवं कुवैत का एनपीए 399 फीसदी, चाइनाट्रस्ट कॉमर्शियल बैंक का 269 फीसदी, डीबीएस बैंक का 232 फीसदी एवं स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का एनपीए 193 फीसदी बढ़ा है।

    कुल 39 सूचीबद्ध बैंकों की तुलना 2011-12 से करें तो 2012-13 में इनकी शुद्ध एनपीए की राशि 31,100 करोड़ रुपये यानी 58 फीसदी है। इसमें से 75 फीसदी यानी 23,300 करोड़ रुपये 2012-13 की पहली छमाही में बढ़े हैं।

    सितंबर तिमाही में सभी बैंकों का एनपीए 45.7 फीसदी बढ़ा है तो इसी अवधि में इनकी ग्रॉस एडवांस वृद्धि दर महज 15.9 फीसदी रही है। मार्च में इन सूचीबद्ध बैंकों की कुल एनपीए राशि 61,830 करोड़ रुपये रही है तो सितंबर में यह 84,680 करोड़ रुपये हो गई।

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