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    अच्छे रिटर्न के लिए डेट फंडों में बनाए रखें दो साल तक निवेश

    अच्छे रिटर्न के लिए डेट फंडों में बनाए रखें दो साल तक निवेश

    कुछ महीने पहले मेरे सलाहकार ने मुझे डेट म्यूचुअल फंडों में निवेश का सुझाव दिया। उसकी सलाह मानते हुए मैंने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इनकम फंड और आईडीएफसी डायनामिक बांड फंड में निवेश किया। चिंता की बात यह है कि इस निवेश पर मुझे नुकसान हो रहा है। निवेश का मूल्य निवेशित पूंजी से भी कम रह गई है। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें कि मुझे क्या करना चाहिए? क्या मुझे इन फंडों से तत्काल पैसे निकाल लेने चाहिए या अपना निवेश बनाए रखना चाहिए?                              - करीम, सोनीपत

    देखिएकरीम जी, एक बात तो तय है कि अगर आपने अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को समझते हुए और एक अच्छी समय-सीमा के लिए निवेश किया है तो आप कभी घाटे में नहीं रहेंगे। डेट फंड अच्छा रिटर्न देते हैं लेकिन रुपये की कमजोरी पर लगाम लगाने के लिए हाल में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए कदमों के कारण डेट मार्केट में लिक्विडिटी की कमी हुई जिससे सभी डेट फंडों के एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) में गिरावट दर्ज की गई।

    जिन फंडों की मैच्योरिटी अवधि अधिक थी उनकी एनएवी में अल्पावधि के फंडों की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई। अब सवाल उठता है कि क्या आपको निवेश बनाए रखना चाहिए या पैसे निकाल लेने चाहिए? आने वाले समय में, जब तक रुपया स्थिर नहीं हो जाता तब तक, डेट मार्केट में उतार-चढ़ाव रहेगा और इसलिए आपके निवेश में भी अस्थिरता बनी रहेगी।

    भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्ती की चिंता बरकरार है इसलिए मौजूदा परिस्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी। एक बार रुपया के स्थिर हो जाने के बाद आप देखेंगे कि भारतीय रिजर्व बैंक दरों में कटौती की शुरुआत करेगा और आप देखेंगे कि डेट फंडों का प्रदर्शन कितना बढिय़ा रहता है।

    कुल मिला कर देखा जाए तो अगर आपके निवेश की अवधि दो साल से अधिक है और आप डेट मार्केट के इस उतार-चढ़ाव को झेल सकते हैं तो अपना निवेश बनाए रखें नहीं तो डेट फंडों से अपने पैसे निकाल कर बैंकों के एफडी या फिर म्यूचुअल फंडों के फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान में निवेश करें।

    क्या कोई नई पॉलिसी खरीदते वक्त पुरानी पॉलिसी के बारे में जानकारी देना जरूरी होता है?   - ऋषि, जयपुर
    हां यह बहुत जरूरी होता है।

    देखिए, इंश्योरेंस परस्पर भरोसे पर निर्भर करता है। जो कुछ भी आप प्रपोजल फॉर्म में लिखते हैं इंश्योरेंस कंपनी उस पर ही भरोसा करती है। हो सकता है कि अंडरराइटिंग की प्रक्रिया में वह आपसे मेडिकल टेस्ट करवाने को कहें पर ऐसी कई चीजें हैं जो टेस्ट में सामने नहीं आ सकती हैं।

    ऐसी स्थिति में अगर आप किसी पिछली बीमारी के बारे में नहीं बताते हैं या फिर कोई अन्य जानकारी छुपाते हैं तो इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम रद्द करने का पूरा अधिकार है। आपको क्लेम लेने में कोई दिक्कत न आए इसके लिए आपको अपनी सेहत, जीवनशैली और मेडिकल से जुड़ी जानकारियां जरूर देनी चाहिए।

    समाधान
    मणिकरन सिंघल
    सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर, चंडीगढ़
    goodmoneing.com
    info@goodmoneying.com



     

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