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    इंडेक्सेशन के जरिए कैसे चुकाय अपना कर्ज

    इंडेक्सेशन के जरिए कैसे चुकाय अपना कर्ज

    म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट, और गोल्ड कुछ ऐसे परिसंपत्ति वर्ग हैं जिनमें निवेश पर इंडेक्सेशन का लाभ उठाया जा सकता है

    इंडेक्सेशनआपके आयकर पर महंगाई दर से पडऩे वाले प्रभाव को बेअसर करने में मददगार साबित होता है। आपने जो निवेश 5-6 साल पहले किया था उसमें 3-4 गुना इजाफा होना संभव है। वहीं, महंगाई दर को देखते हुए लोगों की खरीदारी क्षमता लगातार घटती जा रही है।

    निवेश पर पडऩे वाले महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए इंडेक्सेशन मददगार साबित होता है जो कि आपके विभिन्न परिसंपत्तियों पर कैपिटल गेन्स को संतुलित करता है। इससे कुछ हद तक आपकी कर-देनदारी भी घटती है। आइए देखते हैं कि इंडेक्सेशन आपको महंगाई दर को ट्रैक करने में कैसे मददगार होता है।  

    कहां ले सकते हैं इंडेक्सेशन लाभ  
    ऐसा नहीं है कि इंडेक्सेशन आपको मिले प्रत्येक लाभ के लिए फायदेमंद होगा। आप सिर्फ उन चुनिंदा परिसंपत्तियों पर इंडेक्सेशन के लाभ का दावा कर सकते हैं जिसे आपने 12 माह तक अपने पास संभाल कर रखा होगा।

    इनकम टैक्स प्रावधान के तहत 12 माह और उससे ज्यादा समय तक परिसंपत्ति में निवेश बनाए रखने या उससे कमाये लाभ को लांग टर्म कैपिटल गेन के रूप में देखा जाता है। इसका मतलब है कि इंडेक्सेशन का फायदा केवल लांग टर्म कैपिटल गेन्स पर ही उपलब्ध है।

    कोई भी लाभ जो कि लघु अवधि में हो जैसे 12 माह से कम अवधि में बेची गई परिसंपत्ति से हुआ लाभ, वहां इंडेक्सेशन का कोई लाभ नहीं मिलेगा। म्यूचुअल फंड, रियल एस्टेट, और गोल्ड कुछ ऐसे परिसंपत्ति वर्ग हैं जिनमें निवेश पर इंडेक्सेशन का लाभ उठाया जा सकता है।

    आयकर प्रावधान के मुताबिक, लांग टर्म गेन पर इंडेक्सेशन के लाभ के लिए रियल एस्टेट और फिजिकल गोल्ड में आपको कम से कम तीन साल तक निवेश बनाए रखना होगा, जबकि अन्य मामलों में न्यूनतम एक साल तक निवेश बनाए रखना होगा, तभी आपको लांग टर्म कैपिटल गेन पर आयकर का लाभ इंडेक्सेशन के जरिए मिल सकता है। हालांकि, इक्विटी में लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स शून्य है, इसलिए यहां भी इंडेक्सेशन का कोई लाभ नहीं।  

    इंडेक्सेशन और टैक्स की गणना?  
    प्रत्येक वर्ष भारत सरकार मुद्रास्फीति सूचकांक की घोषणा करती है। इस सूचकांक की मदद से आप अपनी परिसंपत्ति की इंडेक्स्ड खरीद कीमत की गणना कर सकते हैं। इसका फॉर्मूला कुछ इस प्रकार है-
    परिसंपत्ति की खरीद कीमत*बिक्री वाले वर्ष का कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स/खरीदे गए वर्ष का कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स
    अब आइये हम एक उदाहरण से इस सिद्धांत को समझते हैं।

    मान लीजिए कि साल 2008 में आपने म्यूचुअल फंड की डेट स्कीम में एक लाख रुपये का निवेश किया। आपने उसे तीन साल तक अपने पास रखा और 2011 में उसे 1.40 लाख रुपये में बेच दिया। इस हिसाब से आपकी जेब में 40,000 रुपये का मुनाफा जमा हो गया। जैसे कि आपने एक साल से ज्यादा अवधि तक निवेश को अपने पास रखा, तो इस मुनाफे को लांग टर्म कैपिटल गेन्स में गिना जाएगा। इस प्रकार आपको 40,000 रुपये पर टैक्स अदा करना होगा।  

    लांग टर्म कैपिटल गेन में आयकर अदा करने के दो विकल्प हैं। यदि आप इंडेक्सेशन लाभ प्राप्त करना है चाहते हैं तो लाभ पर कर 20.60 फीसदी की दर से लगेगा, जबकि बिना इसके कर 10.30 फीसदी रहेगा। कोई भी व्यक्ति अपनी कर देनदारी घटाने के लिए इनमें से उपयुक्त विकल्प का चयन कर सकता है।

    उपरोक्त उदाहरण की बात करें तो अगर कोई निवेशक इंडेक्सेशन का लाभ नहीं उठाता है तो उसे 40,000 रुपये पर 10.30 फीसदी की दर से 4,120 रुपये के टैक्स का भुगतान करना होगा।  
    अब यह देखते हैं कि यदि इंडेक्सेशन लाभ प्राप्त करते हैं तो टैक्स उत्तरदायित्व क्या रहेगा।  
    2008 में निवेश की लागत :     1,00,000
    2011 में बिक्री की लागत :      1,40,000

    इंफ्लेशन इंडेक्स - 2008 : 582  
                        2011 : 785  

    इस प्रकार निवेश की इंडेक्स्ड कॉस्ट होगी : 1,00,000 गुणा 785/582 = 1,34,880  
    अब जब आप उससे बाहर निकलते हैं तो निवेश का मूल्य 1,40,000 रुपये रहा।
    इस प्रकार आपका लांग टर्म कैपिटल गेन अब 1,40,000-1,00,000 रुपये = 5,120 रहा।

    तो अब लांग टर्म कैपिटल गेन पर 20.60' की दर से कर लेगा और आपका कर उत्तरदायित्व 20.60' गुणा 5,120 = 1,052.72 रहा।  तो आप देख सकते हैं कि निवेश की लागत की इंडेक्सिंग नहीं करते हैं तो आपकी कर देनदारी 4,120 रुपये बनती है।

    लेकिन इंडेक्सेशन का लाभ लेने के बाद कर देनदारी घट कर 1,054 रुपये रह जाती है। इस प्रकार आप अपने लाभ पर टैक्स के मामले में करीब 3,000 रुपये की बचत करते हैं। जब आपका निवेश ज्यादा होगा तो आपकी बचत भी ज्यादा होगी।  

    डेट म्यूचुअल फंडों में या अन्य किसी व्यक्तिगत निवेशों के लिए भी इन विकल्पों का चयन किया जा सकता है। लेकिन रियल एस्टेट या गोल्ड में कोई भी विकल्प कारगर साबित नहीं होगा क्योंकि इसमें लांग टर्म कैपिटल गेन्स पर 20.60 फीसदी का फ्लैट टैक्स लगाया जाता है।
    जितेंद्र सोलंकी- लेखक दिल्ली स्थित जे. एस. फाइनेंशियल एडवाइजर्स के सर्टिफायड फाइनेंशिल प्लानर हैं।

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