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    SHAME: हर साल दो लाख करोड़ की फल-सब्जियां हो जाती हैं बर्बाद

    SHAME: हर साल दो लाख करोड़ की फल-सब्जियां हो जाती हैं बर्बाद

    नुकसान
    2011-12 में 2.13 लाख करोड़ रुपये
    2013-14 में 2.50 लाख करोड़ रुपये

    प्रोसेसिंग सुविधा
    फल और सब्जियों की 2-3 फीसदी
    पॉल्ट्री की 6-8 फीसदी
    फिशरीज की 10-12 फीसदी

    देश में 2012 के अंत तक केवल 301.1 लाख टन की कोल्ड स्टोरेज क्षमता थी जो फलों और सब्जियों के उत्पादन की तुलना में केवल 12.9% के बराबर थी।

    इस समय कुल उत्पादन के केवल 22.3 फीसदी फल और सब्जियां ही थोक बाजार तक पहुंचते हैं।

    फलोंऔर सब्जी उत्पादन में चीन के बाद भारत का दूसरा स्थान है। लेकिन एसोचैम का कहना है कि उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान के कारण 2011-12 में भारत को 2.13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ जिसके 2013-14 तक 2.50 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच जाने की संभावना है।

    इस अध्ययन में कहा गया है कि देश में उत्पादित 30 फीसदी फल और सब्जियां खराब हो जाती हैं और उनका उपभोग नहीं हो पाता है। इतने बड़े पैमाने पर फलों और सब्जियों के खराब होने का एक बड़ा कारण फूड प्रोसेसिंग की सुविधा की कमी और देश में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज का ना होना है।

    इस नुकसान का आकलन विभिन्न राज्यों के उत्पादन और थोक मूल्य के आधार पर किया गया है। अध्ययन में सामने आया है कि सबसे ज्यादा नुकसान सबसे बड़े उत्पादक राज्य बंगाल में होता है जो 13,657 करोड़ रुपये के आसपास है।

    इसके बाद गुजरात में 11,398 करोड़, बिहार में 10,744 करोड़, यूपी में 10,312 करोड़, महाराष्ट्र में 10,100 करोड़, आंध्र प्रदेश में 5,633 करोड़, तमिलनाडु में 8,170 करोड़, कर्नाटक में 7,415 करोड़ और मध्य प्रदेश में 5,332 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

    एसोचैम के अध्यक्ष राणा कपूर का कहना है कि भारत में बहुत ही छोटे स्तर पर प्रोसेसिंग का काम होता है। उन्होंने बताया कि फल और सब्जियों की केवल 2-3 फीसदी प्रोसेसिंग होती है, वहीं पोल्ट्री की 6-8 फीसदी और फिशरीज की 10-12 फीसदी प्रोसेसिंग होती है।

    उन्होंने कहा कि देशमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को मिलकर काम करने की जरूरत है और वेयर हाउसिंग और लॉजिस्टिक दोनों ही मोर्चों पर काम करने की जरूरत है और यहां निवेश होना चाहिए। इस अध्ययन में सामने आया है कि देशमें 2012 के अंत तक केवल 301.1 लाख टन की कोल्ड स्टोरेज क्षमता थी जो फलों और सब्जियों के उत्पादन की तुलना में केवल 12.9 फीसदी के बराबर थी।

    एक दिक्कत यह भी है कि देशमें ज्यादातर कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं थोक बाजार के लिए है और थोक बाजार के आस पास ही हैं। ऐसे में रिटेलरों और किसानों को इनका लाभ नहीं मिल पाता है। भारत में फलों की और सब्जियों की सबसे ज्यादा बिक्री स्थानीय बाजारों में होती है जबकि वहां कोई कोल्ड स्टोरेज सुविधा नहीं है।

    देशमें जिस हिसाब से फलों और सब्जियों का उत्पादन बढ़ रहा है उसके हिसाब से जल्दी से मार्केटिंग और प्रोसेसिंग की सुविधाएं विकसित करनी होंगी। क्योंकि इस समय कुल उत्पादन के केवल 22.3 फीसदी फल और सब्जियां ही थोक बाजार तक
    पहुंचती हैं।

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