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    पांच लाख से कम आय वालों को भी भरना होगा रिटर्न

    पांच लाख से कम आय वालों को भी भरना होगा रिटर्न

    टैक्स की उलझनें

    बलवंत जैन
    सीएफपी, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर, अपनापैसा डॉट कॉम
    balwant.jain@apnapaisa.com

    मैं एक वेतनभोगी कर्मचारी हूं और मेरी टैक्सेबल सैलरी 31 मार्च 2013 को समाप्त हुए वर्ष में पांच लाख रुपये से कम थी। मेरे बचत खाते पर मुझे 5,000 रुपये का ब्याज मिला है और जहां तक मैं समझता हूं, इस पर टैक्स नहीं लगेगा। मेरा नियोक्ता पहले से ही मेरे वेतन से टैक्स काट लेता है। मेरी आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। क्या मुझे एसेसमेंट ईयर २०१३-१४  यानी पिछले वित्त वर्ष के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना होगा?
    -राजेंद्र नाथ, दिल्ली
    - सीबीडीटी
    (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) द्वारा हाल ही में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक वैसे वेतनभोगी कर्मचारी जिनकी आय पांच लाख रुपये से कम है और जिन्हें इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में छूट मिली थी, उन्हें एसेसमेंट ईयर २०१३-१४ में यह छूट नहीं मिलेगी। इनकम टैक्स रिटर्न न फाइल करने की यह छूट एसेसमेंट ईयर २०११-१२ और २०१२-१३ के लिए ही केवल लागू थी। इसलिए, भले ही आपके नियोक्ता ने आपकी आय से पहले ही टैक्स काट लिया है और अब आपकी कोई कर देनदारी नहीं बनती है, इसके बावजूद आपको आपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना होगा।

    मेरी पत्नी एक दुकान की मालकिन थी जिसकी खरीदारी के लिए भुगतान मैंने अपने व्यक्तिगत बचत-खाते से किया था। उसने पांच साल बाद वह दुकान बेच दी और उसे पांच लाख रुपये का लाभ हुआ। दुकान की बिक्री से जो पैसे मिले उसे मैंने ज्वाइंट सेविंग एकाउंट में जमा करवा दिए। मेरी पत्नी गृहिणी है और वह इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करती है। मेरा सवाल यह है कि क्या उसे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हुए इनकम टैक्स का भुगान करना चाहिए या मुझे अपने इनकम टैक्स रिटर्न में कैपिटल गेन दिखाना होगा और फिर इसके हिसाब से टैक्स देना होगा?
    - अमित त्रिवेदी, रायुपर

    - आयकर अधिनियम की धारा 64 के तहत वैसी परिसंपत्ति से होने वाली आय जो पति-या पत्नी को ट्रांसफर करने से प्राप्त होती है उसे परिसंपत्ति के लिए पैसे देने वाले पति या पत्नी की आय में शामिल किया जाएगा। आपके मामले में, जो पैसे आपने दुकान खरीदने के लिए दिए थे उसे उपहार माना जाएगा। इसलिए, उसकी बिक्री से होने वाला लांग टर्म कैपिटल गेन आपकी आय में जोड़ा जाएगा।

    महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी प्रॉपर्टी की लागत पर आप इंडेक्सेशन का लाभ ले सकते हैं। आप धारा 54एफ के तहत भी छूट का लाभ ले सकते हैं यदि बिक्री से प्राप्त पैसों का निवेश किसी रेजीडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी में करते हैं या फिर धारा 54ईसी के तहत लाभ लेने के लिए इंडेक्स्ड कैपिटल गेन का निवेश रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन बांड या नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कैपिटल गेन बांड में निवेश कर सकते हैं।

    इसके अलावा अगर दुकान किराए पर था तो उससे प्राप्त होने वाला किया भी उन वर्षों की आय में जोड़े जाने की जरूरत है। वैकल्पिक तौर पर आप दुकान खरीदने के लिए दिए गए पैसों को कर्ज के तौर पर भी दिखा जा सकते हैं और इस प्रकार कैपिटल गेन आपकी पत्नी की आय में शामिल हो जाएगा। ऐसे में कर्ज वसूल करना न भूलें।

    मैंने एक रेजीडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी बेची है जिससे मुझे पांच लाख रुपये का लांग टर्म कैपिटल गेन हुआ है। मैंने एक फ्लैट भी बुक किया है जिसकी डिलिवरी मुझे अगले तीन से में हो जाएगी। मैं चाहता हूं कि जो लांग टर्म कैपिटल गेन मुझे हुआ है उस पर नए घर के लिए किए गए निवेश के एवज में मुझे छूट मिले। मैंने अपने कर सलाहकार के साथ इस बात की चर्चा की तो उन्होंने कहा कि ऐसा संभव नहीं है क्योंकि नई रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी तीन साल में नहीं दो सालों में मिलनी चाहिए। क्या आप इस संदर्भ में मेरा मार्गदर्शन करेंगे?  - रोहित जैन, जोधपुर
    - रोहितजी, आयकर अधिनियम की धारा ५४ के तहत एक व्यक्ति या हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) किसी रेजीडेंशियल हाउस प्रॉपर्टी की बिक्री से होने वाले लांग टर्म कैपिटल गेन पर छूट का दावा कर सकता है यदि वह बिक्री के तीन साल के भीतर नया मकान बनवा लेता है।

    इसलिए, मकान के निर्माण की अवधि स्पष्ट रूप से तीन साल है, दो साल नहीं जैसा कि आपके कर सलाहकार ने कहा है। कृपया यह सुनिश्चित करें कि नये फ्लैट का पजेशन आपको बिक्री के तीन साल के भीतर मिल जाए ताकि आप यह साबित कर पाएं कि फ्लैट का निर्माण वास्तव में तीन साल के भीतर हुआ है।

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