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    चीन की टेलीकॉम कंपनियों ने उड़ाई सरकार की नींद

    चीन की टेलीकॉम कंपनियों ने उड़ाई सरकार की नींद

    चुनौती -केंद्र सरकार 2012 में चीनी टेलीकॉम कंपनियों से भविष्य में सुरक्षा में सेंधमारी की बात कुबूल चुकी है
    इसे देखते हुए सरकार ने देश में लैब बनाने के लिए मंजूरी दी थी जिसमें इन कंपनियों के उपकरणों की जांच हो सके

    खत का मजमून - विदेशी टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनियों और खासकर चीनी कंपनियों से सुरक्षा के संभावित खतरे को लेकर जो रणनीति बनाई गई थी, उस पर सचिवालय को अभी तक किसी भी प्रकार की प्रगति के बारे में सूचित नहीं किया गया है

    टेलीकॉमउद्योग में तेजी के साथ पैर-पसार रही विदेशी टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनियों, खासकर चीनी कंपनियों, ने सरकार की नींद उड़ा दी है। देश की आंतरिक सुरक्षा से चिंतित कैबिनेट सचिवालय ने हाल ही में इस मसले पर डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम (डॉट) को पत्र लिखकर अपनी चिंता से वाकिफ कराया है। इस पत्र की एक प्रति 'बिजनेस भास्कर' के पास भी मौजूद है।

    कैबिनेट सचिवालय से लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि विदेशी टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनियों और खासकर चीनी कंपनियों से सुरक्षा के संभावित खतरे को लेकर जो रणनीति बनाई गई थी, उस पर सचिवालय को अभी तक किसी भी प्रकार की प्रगति के बारे में सूचित नहीं किया गया है।

    देश में उपकरणों की टेस्टिंग के लिए लैब का निर्माण प्रस्तावित था। कैबिनेट सचिवालय ने इस लैब की स्थापना की प्रगति के बारे में डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम से जानकारी मांगी है।

    सचिवालय ने कहा है कि 2010 में टेलीकॉम उपकरणों के निर्माण और सप्लाई को लेकर सुरक्षा आशंकाओं पर रिव्यू किया गया था। उस समय आईआईएससी, बंगलुरू को लैब बनाने के लिए कहा गया था।

    कैबिनेट सचिवालय ने पत्र में कहा है कि इस लैब को 2 साल के दौरान स्थापित किया जाना था। सचिवालय ने अब डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम से इस लैब की स्थापना पर प्रगति रिपोर्ट मांगी है।

    गौरतलब है कि केंद्र सरकार 2012 में चीनी टेलीकॉम कंपनियां जैसे हुआवे और जेडटीई से भविष्य में सुरक्षा में सेंधमारी की बात को कुबूल कर चुकी है।

    लिहाजा, सरकार ने देश में लैब बनाने के लिए मंजूरी दी थी जिसमें इन कंपनियों के उपकरणों की जांच हो सके। इसके लिए सरकार ने आईआईएससी को चुना था। लेकिन, कंपनियों ने इस संस्थान के साथ अपने कोड आदि साझा करने से इंकार कर दिया था।

    कंपनियों का कहना था कि किसी संस्थान के साथ वह अपने कोड शेयर नहीं कर सकते हैं। इसके बाद डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने अपने अधीन ही लैब की स्थापना को मंजूरी दी थी।लेकिन, अभी तक देश में टेस्टिंग लैब की स्थापना को लेकर कोई खासी प्रगति देखने को नहीं मिली है।

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