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    जौ में बिकवाली से कमा सकते हैं मुनाफा

    जौ में बिकवाली से कमा सकते हैं मुनाफा

    घटेंगे जौ के भाव
    उत्पादकमंडियों में 10 से 11 लाख बोरी जौ का स्टॉक बचा हुआ है जबकि मार्च महीने में नई फसल की आवक शुरू हो जायेगी
    निर्यातकोंकी मांग कम होते ही माल्ट कंपनियों ने भी खरीद कम कर दी है जिससे घरेलू बाजार में दाम घटे हैं और निकट भविष्य में कीमतों में और कमी आने के हैं आसार
    बुवाईक्षेत्रफल में बढ़ोतरी और अनुकूल मौसम से चालू रबी सीजन में जौ की पैदावार बढऩे का अनुमान है। ऐसे में आगामी दिनों में आठ से 10% की गिरावट आ सकती है

    चालूरबी में जौ के बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी और अनुकूल मौसम पैदावार बढऩे का अनुमान है। ऊंचे भाव में निर्यातकों के साथ माल्ट कंपनियों की मांग कम होने से जौ की कीमतों में गिरावट आई है। सप्ताह भर में इसकी कीमतों में 50 रुपये की गिरावट आई और भाव 1,330 रुपये प्रति क्विंटल रह गए।

    हालांकि, एनसीडीईएक्स पर अप्रैल महीने के वायदा अनुबंध में जौ के भाव चालू महीने में 1,428 रुपये से बढ़कर 1,497 रुपये प्रति क्विंटल हो गए। उत्पादक मंडियों में 10 से 11 लाख बोरी जौ का स्टॉक बचा हुआ है जबकि मार्च महीने में नई फसल की आवक शुरू हो जायेगी। ऐसे में आगामी दिनों में आठ से दस फीसदी की गिरावट आ सकती है।

    निवेशकों की खरीद से एनसीडीईएक्स पर अप्रैल महीने के वायदा अनुबंध में चालू महीने में जौ की कीमतों में तेजी आई है। तीन जनवरी को अप्रैल महीने के वायदा अनुबंध में जौ का भाव 1,428 रुपये प्रति क्विंटल था जबकि शुक्रवार को भाव बढ़कर 1,497 रुपये प्रति क्विंटल हो गया।

    इंडियाबुल्स कमोडिटी लिमिटेड के अस्सिटेंट वाइस प्रेसिडेंट रिसर्च (कमोडिटी) बद्दरूदीन ने बताया कि ऊंची कीमतों पर निर्यात सौदों में कमी आई है जबकि नई फसल की आवक बनने में केवल एक-डेढ़ महीने का ही समय शेष है। इसीलिए माल्ट कंपनियों ने खरीद भी कम कर दी है। ऐसे में वायदा बाजार में आगामी दिनों में मौजूदा कीमतों में गिरावट आने की संभावना है।

    इम्पीरियल माल्ट लिमिटेड के डायरेक्टर संजय यादव ने बताया कि जौ में खाड़ी देशों की आयात मांग कम हो गई है। निर्यातक दिसंबर महीने में मुंदड़ा बंदरगाह पर पहुंच 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से जौ की खरीद कर रहे थे लेकिन इस समय 1,400 रुपये प्रति क्विंटल में भी सीमित मात्रा में ही सौदे हो रहे हैं।

    खाड़ी देशों में जौ का उपयोग कैटलफीड में हो रहा है। निर्यातकों की मांग कम होते ही माल्ट कंपनियों ने भी खरीद कम कर दी है जिससे घरेलू बाजार में दाम घटे हैं।

    कुंदन लाल परसराम के प्रबंधक राजीव बंसल ने बताया कि उत्पादक मंडियों में जौ का स्टॉक 10 से 11 लाख बोरी का बचा हुआ है। मार्च महीने में नई फसल की आवक शुरू हो जायेगी इसलिए स्टॉकिस्टों ने बिकवाली बढ़ा दी है। गुडग़ांव पहुंच जौ के सौदे 1,370-1,380 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे है जबकि दिसंबर महीने में इसके भाव 1,450-1,460 रुपये प्रति क्विंटल थे।

    उत्पादक मंडियों में वेयर हाउस के जौ के सौदे 1,200 से 1,225 रुपये प्रति क्विंटल की दर से हो रहे हैं। माल्ट कंपनियों के पास भी जौ का स्टॉक बचा हुआ है तथा नई फसल की आवक मार्च महीने के आखिर में शुरू हो जायेगी। अभी तक मौसम भी फसल के अनुकूल बना हुआ है।

    कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू रबी में जौ की बुवाई 7.92 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 7.80 लाख हैक्टेयर में हुई थी। राजस्थान जो जौ उत्पादन के मामले में देश का अग्रणी राज्य है में जौ की बुवाई पिछले साल के 3.36 लाख हैक्टेयर से बढ़कर 3.75 लाख हैक्टेयर में हुई है।

    इसके अलावा उत्तर प्रदेश में जौ की बुवाई 1.71 लाख हैक्टेयर में हुई है। वर्ष 2011-12 में देश में 16.1 लाख टन जौ का उत्पादन हुआ था। बुवाई क्षेत्रफल में बढ़ोतरी और अनुकूल मौसम से चालू रबी में पैदावार बढऩे का अनुमान है।

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