कितना अभिनव है भारती एक्सा लाइफ का ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान

मनीश कुमार मिश्र नई दिल्ली

Apr 30,2013 12:41:00 AM IST

भारती एक्सा लाइफ का ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान कुछ अलग है क्योंकि यह पॉलिसीधारक को तीन ग्रुप में बंटी बीमारियों के हिसाब से तीन बार क्लेम करने का अवसर देता है। पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस लेने के बाद इस पर विचार किया जा सकता है लेकिन खरीदने से पहले किसी डॉक्टर से मिल कर बीमारियों की शर्तों को समझना भी जरूरी है ताकि आप सही निर्णय ले सकें

लगभग सभी साधारण और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां गंभीर बीमारियों के लिए कवर (क्रिटिकल इलनेस कवर) उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा अब जीवन बीमा कंपनियों के क्रिटिकल इलनेस कवर भी बाजार में उपलब्ध हैं। भारती एक्सा लाइफ का ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान ऐसा ही एक क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी है जो १३ गंभीर बीमारियों को कवर करती है और जिसके अंतर्गत पॉलिसीधारक एक नहीं बल्कि तीन गंभीर बीमारियों के लिए क्लेम कर सकता है। इसलिए कंपनी ने गंभीर बीमारियों को तीन समूहों में बांटा हुआ है।

प्लान की खासियत
अगर किसी व्यक्ति को उपरोक्त 13 में से कोई गंभीर बीमारी होती है तो वह क्लेम कर सकता है। पहला क्लेम करने के बाद भी पॉलिसी धारक अन्य दो ग्रुप में शामिल किसी गंभीर बीमारी की डायग्रोसिस होने पर क्लेम कर सकता है। इस प्रकार पॉलिसीधारक तीन ग्रुप में बंटे हुए तीन अलग-अलग गंभीर बीमारियों के लिए क्लेम कर सकता है। प्रत्येक क्लेम के लिए कंपनी पूरे सम एश्योर्ड का भुगतान करती है चाहे वह पहला क्लेम हो या तीसरा।

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर अनुज भागिया कहते हैं कि यह पॉलिसी थोड़ी अलग है जिसमें क्रिटिकल इलनेस को तीन ग्रुप में बांटा गया है जिसके तहत तीन बार क्लेम किया जा सकता है। इस प्रकार देखें तो सम एश्योर्ड ३०० फीसदी है।

१८ से 50 साल के व्यक्ति यह पॉलिसी ले सकते हैं। पॉलिसी अवधि 15 वर्षों की है जिसका न्यूनतम सम एश्योर्ड दो लाख रुपये और अधिकतम 30 लाख रुपये है। इस पॉलिसी के दो संस्करण हैं- ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान और ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान विथ रिटर्न ऑफ प्रीमियम।

रिटर्न ऑफ प्रीमियम वाली पॉलिसी के तहत अगर कोई क्लेम नहीं किया गया है तो मैच्योरिटी पर (15 साल की अवधि के बाद) पहले साल की प्रीमियम राशि का 15 गुना पॉलिसीधारक को वापस किया जाएगा। इसके अलावा अगर पॉलिसीधारक ने कोई क्लेम नहीं किया है और उसकी मृत्यु हो जाती है तो पॉलिसीधारक ने जितने पॉलिसी वर्ष पूरे किए हैं, नॉमिनी को पहले वर्ष के प्रीमियम की उतनी ही गुनी राशि मिलेगी।

भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के चीफ एंड अप्वाइंटेड एक्चुअरी राजीव कुमार ने बताया कि अगर कोई पॉलिसीधारक इस पॉलिसी का रिटर्न ऑफ प्रीमियम संस्करण लेता है और तीनों ग्रुप में से किसी भी एक गंभीर बीमारी के लिए क्लेम कर चुका है तो उसे न तो मृत्यु लाभ मिलेगा और न ही मैच्योरिटी बेनीफिट।

वेवर ऑफ प्रीमियम
पहला क्लेम करने के बाद पॉलिसी के भविष्य के प्रीमियम का भुगतान पॉलिसीधारक को नहीं करना होता हालांकि वह भविष्य में दो अन्य ग्रुप में शामिल गंभर बीमारियों के लिए दो और क्लेम कर सकता है। पॉलिसी की अवधि 15 साल की है और पहले के बाद शेष पॉलिसी अवधि में क्लेम का भुगतान कंपनी करती है।

भारती एक्सा लाइफ ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान की खामियां
>> अगर पॉलिसीधारक को एक साल के भीतर दो गंभीर बीमारियां होती हैं, वह भले दो अलग ग्रुप की क्यों न हो, कंपनी दूसरी गंभीर बीमारी के लिए क्लेम नहीं देगी। राजीव कुमार ने बताया कि दो अलग-अलग ग्रुप की गंभीर बीमारियों के लिए क्लेम करने के बीच 365 दिनों का अंतराल होना जरूरी है, अन्यथा दूसरे ग्रुप की गंभीर बीमारी के लिए क्लेम नहीं मिलेगा।
>> एक ही ग्रुप की दो बीमारियों के लिए ३६५ दिन के अंतराल के बावजूद क्लेम नहीं दिया जाएगा। एक ग्रुप की केवल एक ही बीमारी के लिए किया जा सकता है क्लेम।
>> राजीव कुमार ने बताया कि वैसे तो ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान का प्रीमियम १५ साल के लिए एक जैसा तय किया गया है लेकिन कंपनी अपने क्लेम के अनुभव को देखते हुए इसमें तीन साल बाद संशोधन कर सकती है। मतलब, तीन साल बाद प्रीमियम में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर पॉलिसीधारक बढ़े हुए प्रीमियम को स्वीकार नहीं करता तो उसे सरेंडर वैल्यू (अगर कुछ बना) दे दिया जाएगा और पॉलिसी समाप्त हो जाएगी।
>> चंडीगढ़ स्थित मार्वेल इंवेस्टमेंट के सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर मणिकरन सिंघल कहते हैं कि भारती एक्सा लाइफ ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस का रिटर्न ऑफ प्रीमियम संस्करण न केवल महंगा है बल्कि पॉलिसीधारक द्वारा किसी एक गंभीर बीमारी के लिए क्लेम किए जाने के बाद डेथ बेनीफिट और मैच्योरिटी बेनीफिट समाप्त हो जाता है।
>> राजीव कुमार के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति मानदंडों पर खरा उतरता है तो उसे पॉलिसी दी जाती है अन्यथा नहीं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है तो उसे यह पॉलिसी नहीं मिल सकती।

पॉलिसी को समझें
लगभग सभी कंपनियों की क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी के तहत वेटिंग पीरियड ९० दिनों का होता है। साथ ही पॉलिसी के अंतर्गत आने वाली किसी गंभीर बीमारी के निदान के बाद अगर पॉलिसीधारक 30 दिनों तक जीवित रहता है तभी बीमा कंपनियां सम एश्योर्ड का भुगतान करती हैं।

इस राइडर पर भी करें विचार
सिंघल कहते हैं कि अपोलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस का क्रिटिकल इलनेस राइडर भारती एक्सा लाइफ ट्रिपल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान जैसा ही है। इस राइडर में आठ बीमारियां शामिल हैं और इन आठ में से तीन बीमारियों के लिए क्लेम किया जा सकता है और इसमें कोई ग्रुपिंग नहीं है। हालांकि, इस राइडर में वेवर ऑफ प्रीमियम का लाभ नहीं है।

क्या होती हैं पेचीदगियां
बीमा कंपनियां जिन बीमारियों को कवर करती हैं उसकी भी कुछ शर्तें होती हैं। सिंघल कहते हैं कि क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी लेने से पहले अगर कोई व्यक्ति डॉक्टर से मिल कर पॉलिसी की बारीकियों को समझ लेता है तो वह निर्णय ले सकता है कि पॉलिसी उसकी जरूरतों को पूरा करती है या नहीं या उसके मनोनुकूल है या नहीं।

सिंघल कहते हैं कि दरअसल, क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी में वर्णित किसी गंभीर बीमारी के नाम मात्र को देखते हुए पॉलिसी लेना बुद्धिमानी नहीं होगी। इसमें भी शर्त होती है, जैसे अगर हार्ट ७०-८० प्रतिशत क्षतिग्रस्त होता है तभी क्लेम मिलेगा या लिवर 80-90 प्रतिशत खराब हो चुका है तभी क्लेम किया जा सकता है आदि। भिन्न-भिन्न बीमा कंपनियों की ये शर्तें अलग-अलग होती हैं। इसलिए बेहतर रहेगा कि एक बाद किसी डॉक्टर के साथ बैठ कर इसे समझ लिया जाए।

जरूरतों को दें तरजीह
सिंघल कहते हैं कि क्रिटिकल इलनेस पॉलिसियां गंभीर बीमारियों के निदान के 30 दिनों के बाद पॉलिसीधारक के जीवित रहने पर सम एश्योर्ड का भुगतान करती हैं।

एक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान (पहले से मौजूद बीमारियों को छोड़ कर) इलाज के लिए आर्थिक मदद पहुंचाता है और यह महत्वपूर्ण है। पर्याप्त राशि का हेल्थ कवर लेने के बाद ही क्रिटिकल इलनेस कवर पर विचार करना चाहिए।

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