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    विदेश भ्रमण से पहले कराएं ट्रैवल इंश्योरेंस

    विदेश भ्रमण से पहले कराएं ट्रैवल इंश्योरेंस

    आयबढऩे के साथ ही अब भारतीय सैर-सपाटे के लिए विदेश का रुख करने लगे हैं। गर्मी की छुट्टियां आने वाली है और घूमने जाने की योजना घरों में तैयार होने लगी है। भारतीय सैर-सपाटे के लिए आम तौर पर अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों को ज्यादा और मध्य पूर्व के देश हैं।

    ऑनलाइन टिकट सुविधा, सस्ते हवाई किराए और विभिन्न साधारण बीमा कंपनियों द्वारा ऑनलाइन बीमा सेवाओं की संख्या में बढ़ोतरी होने से तफरीही सैर-सपाटे के दौरान सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।

    ऐसे यात्रियों की संख्या भी कम नहीं है जो ऑनलाइन ट्रैवल इंश्योरेंस लेते हैं और एक अनुमान के मुताबिक जिसका वर्तमान अनुपात लगभग 8 प्रतिशत है। भारतीय यात्री ट्रैवल इंश्योरेंस के फायदों को महसूस करने लगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि वे मानने लगे हैं कि अतिरिक्त बीमा सुरक्षा से विदेश में वे अपनी छुट्टियों का पूरा आनंद उठा सकते हैं।

    ट्रैवल इंश्योरेंस में किन पर करें गौर
    ट्रैवल इंश्योरेंस लेते समय हर आदमी के लिए यह जानना जरूरी है कि पॉलिसी में क्या है और क्या नहीं। ग्राहकों को विविध ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियों की जानकारी हासिल करके अपनी आवश्यकता के अनुसार चुनाव करना चाहिए। साधारण बीमा कंपनियां विभिन्न प्रकार के अलग-अलग बीमा प्रोडक्ट उपलब्ध कराती हैं।

    बीमा कंपनियों के बीच अंतर समझने के लिए उपलब्ध विकल्प, प्रीमियम की राशि, चिकित्सीय सुरक्षा, ऊपरी आयु-सीमा और दावा निपटान करने वाली सहायक कंपनियों से जुड़े तथ्यों पर विचार करना चाहिए।

    ट्रैवल इंश्योरेंस के प्रीमियम राशि यात्रा के देश, यात्रा की अवधि, यात्री की आयु और चुनी गई सुरक्षा के स्तर के आधार पर तय होती है । अन्य देशों की अपेक्षा उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका की यात्रा के लिए प्रीमियम अधिक होता है।

    अधिकतर बीमा कंपनियां 6 से 70 वर्ष आयु के यात्रियों का बीमा करती हैं। अनेक कंपनियों द्वारा 71 से 80 वर्ष आयु वाले यात्रियों के लिए भी वरिष्ठ योजनाएं जारी की गई हैं। ट्रैवल इंश्योरेंस की अधिकतम अवधि 180 दिन प्रति यात्रा होती है।

    ट्रैवल इंश्योरेंस के लाभ
    अधिकांश बीमा सुरक्षा योजनाओं में चिकित्सीय उपचार, व्यक्तिगत दुर्घटना, आपात स्थिति में स्थान खाली करना, अवशेषों की स्वदेश वापसी, अपहरण, यात्रा रद्द होना, यात्रा में कटौती या देरी, ़सामानों का गुम होना, सामान मिलने में विलंब, निजी देनदारी आदि शामिल होती हैं।

    इसके अलावा पॉलिसीधारक को विशिष्ट सुरक्षा प्रदान करने वाली खास बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध हैं। उदाहरण के तौर पर ऐसा बीमा जिसके तहत विदेश में बीमार पडऩे या दुर्घटना होने पर अस्पताल में भर्ती होने का खर्च शामिल है।
    आजकल सभी एयरलाइन कंपनियों में यात्रियों को सामान खोने या सामान मिलने में विलंब की समस्या झेलनी पड़ती है और ट्रैवल इंश्योरेंस इस जोखिम से भी सुरक्षित करता है।

    लेकिन यह सुरक्षा केवल उन ़सामानों के लिए होती है जो सामान्य कैरियर की अभिरक्षा में होती है जो अधिकतर मामलों में एयरलाइन की जिम्मेदारी है।

    यहां यह याद रखना चाहिए कि यह सुरक्षा केवल चेक्ड-इन ़सामानों और भारतीय सीमा के बाहर सामान मिलने में देरी पर लागू होती है। इसलिए, देश के भीतर यात्रा के दौरान भारत के किसी शहर में ़सामानों की देरी पर यह सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।

    अन्य ट्रैवल इंश्योरेंस सुरक्षा में यात्रा में विलंब, यात्रा रद्द होना, अगली उड़ान का छूट जाना और पासपोर्ट का गुम हो जाने से उत्पन्न असुविधा बीमा पॉलिसी में शामिल रहती हैं।

    संभावित अपहरण का गंभीर खतरा भी कवर किया जाता है। यात्री पर कुछ निजी देनदारी की आशंका भी हो सकती है जिसके कारण विदेश में कानूनी झंझटों का सामना करना पड़ सकता है। कुछ बीमा पॉलिसियों में इस जोखिम को भी कवर किया जाता है। कुछ ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसियों में विदेश-भ्रमण के दौरान अपने देश में घर में चोरी/सेंधमारी की सुरक्षा भी उपलब्ध है।

    पहले से मौजूद बीमारियां बताएं
    अधिकांश पॉलिसियों में पहले से मौजूद बीमारियों को कवर नहीं किया जाता है। यात्रा आरंभ करने के पहले बीमित व्यक्ति के लिए अपनी पूर्व बीमारियों की घोषणा करना आवश्यक है। अधिकांश पॉलिसियों में आतंकवादी घटनाएं, युद्ध या युद्ध जैसी स्थिति, मानसिक गड़बड़ी, गर्भावस्था की समस्या, आत्महत्या, जान-बूझकर खुद को चोटिल करना, चिंता, शराबखोरी, नशाखोरी, एचआइवी/एड्स संक्रमण आदि को शामिल नहीं किया जाता है।

    कुछ पॉलिसियों में नशा, अत्यधिक रेडिएशन, आणविक या विस्फोटक उपकरण, जन्मजात गड़बड़ी, पेशेवर खेलों में भागीदारी, स्काई डाइविंग, बंगी जंपिंग, गोताखोरी आदि से होने वाली दुर्घटना या अस्पताल में भर्ती होने की घटना को शामिल नहीं किया जाता है।  

    बेहतर है कि प्रतिष्ठित और मजबूत साख और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क वाली किसी बीमा कंपनी से ही ट्रैवल इंश्योरेंस लें। बीमा कंपनी के दावा निपटान के अनुपात, विदेशों में इसकी सेवा साझेदारी और वादानुसार पॉलिसी में दर्ज सुरक्षा प्रावधानों को बारीकी से देख लेनी चाहिए। यात्रियों को किसी आकस्मिक घटना में सुरक्षा के लिए अपना पर्याप्त बीमा अवश्य ही करा लेना चाहिए, ताकि विदेशों में छुट्टियों का मजा खराब न होने पाए।

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