Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

    Home »News Room »Corporate» Production Of Fuel Oil From Waste Plastic

    प्लास्टिक के कचरे से होगा ईंधन तेल का उत्पादन

    प्लास्टिक के कचरे से होगा ईंधन तेल का उत्पादन

    अनोखी तकनीक
    प्लास्टिक हाइड्रोकार्बन का पॉलीमर उत्पाद है। नई तकनीक में एक कैटलिस्ट के जरिए प्लास्टिक का डी-पॉलीमराइजेशन करते हुए उससे तेल उत्पादन की प्रक्रिया ईजाद की गई है। इस तकनीक के जरिए 1 मीट्रिक टन प्लास्टिक के कचरे से 1000 लीटर ईंधन तेल का उत्पादन किया जा सकता है। उत्पादित ईंधन डीजल के समतुल्य होता है।

    अगरआपसे कहा जाए कि प्लास्टिक का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है तो आप शायद ही यकीन करेंगे। आपका पहला सवाल यही होगा कि न गलने और सडऩे के कारण परेशानी का सबब बना प्लास्टिक भला कैसे किसी काम का हो सकता है।लेकिन अब ऐसा है।जल्द ही प्लास्टिक के कचरे से ईंधन उत्पादन की तकनीक व्यावसायिक दृष्टि से इस्तेमाल होने लगेगी।

    इंदौर की कंपनी ग्रीन अर्थ इनोवेशंस (जीईआई) ने कहा है कि उसकी प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने की भारत में पेटेंट की हुई तकनीक व्यवसायीकरण के लिए तैयार है।

    कंपनी के प्रवर्तक मनोज शर्मा ने कहा,'हमने प्लास्टिक से ईंधन बनाने के लिए रसायनिक प्रक्रिया को पलट दिया है। प्लास्टिक हाइड्रोकार्बन का उत्पाद है। हमने अपनी तकनीक में एक कैटलिस्ट के जरिए प्लास्टिक का  डी-पॉलीमराइजेशन करते हुए उससे तेल उत्पादन की प्रक्रिया ईजाद की है।'

    शर्मा ने कहा,'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, देहरादून ने हमारी तकनीक को प्रमाणित किया है।हमने इसके लिए भारतीय पेटेंट की मांग की है।इस सस्ती तकनीक के प्रयोग से घरेलू बोतल और पीवीसी के अतिरिक्त सभी ग्रेड के प्लास्टिक से ईंधन निकाला जा सकता है।' उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का खर्च प्रति किलोग्राम प्लास्टिक के डी-पॉलीमराइजेशन पर महज 7 रुपये आता है।

    तकनीक के प्रदर्शन के दौरान उन्होंने दावा किया,'हमारी तकनीक के जरिए प्लास्टिक से निकाले गए ईंधन का प्रयोग भारत स्टेज-2 वाहनों को चलाने में किया जा सकता है। इसके अलावा डीजी सेट्स संचालन, भारी पंप, हॉट मिक्स प्लांट आदि चलाने जैसे औद्योगिक कार्यों में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। प्लास्टिक कचरे से निकाला गया ईंधन डीजल के समतुल्य होता है।

    शर्मा के अनुसार एक्सट्रेक्शन प्लांट 1 मीट्रिक टन से लेकर 30 मीट्रिक टन प्रति दिन की क्षमता के आधार पर बनाया जा सकता है जिनमें प्रतिदिन 1 मीट्रिक टन से लेकर 30 मीट्रिक टन तक प्लास्टिक कचरे का डी-पॉलीमराइजेशन किया जा सकता है। एक मीट्रिक टन प्लास्टिक के डी-पॉलीमराइजेशन से 1000 लीटर ईंधन तेल का एक्सट्रेक्शन हो सकता है। उन्होंने कहा कि 1 मीट्रिक टन क्षमता वाले प्लांट से 3 घंटे में 1000 लीटर ईंधन का उत्पादन किया जा सकता है।

    मनोज शर्मा और जादवपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर नीलाचल भट्टाचार्य ने संयुक्त रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर के बाहरी क्षेत्र में 10 मीट्रिक टन क्षमता का प्लांट स्थापित किया है। तकनीक को प्लास्टिक के डिस्पोजल की दृष्टि से पर्यावरण के अनुकूल होने का दावा किया है।इस समय कंपनी तकनीक को फ्रेंचाइजी के आधार पर आगे बढ़ा रही है।

    Recommendation

      Don't Miss

      NEXT STORY