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    महंगाई दर पांच माह में सबसे ज्यादा

    महंगाई दर पांच माह में सबसे ज्यादा

    नईदिल्ली - प्याज एवं अन्य सब्जियों की बढ़ती कीमतों के चलते महंगाई दर लगातार दूसरे महीने बढ़कर जुलाई में 5.79 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई। यह दर पिछले पांच महीनों में सबसे ज्यादा है। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर जून, 2013 में 4.86 फीसदी और जुलाई, 2012 में 7.52 फीसदी थी।

    जुलाई के आंकड़े रिजर्व बैंक के कंफर्ट लेवल 4-5 फीसदी के स्तर से भी ज्यादा है। फरवरी, 2013 के बाद यह महंगाई का सर्वोच्च स्तर है।

    आंकड़ों के मुताबिक खाद्य उत्पाद वर्ग में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर इस साल जुलाई में बढ़कर 11.91 फीसदी पर पहुंच गई। ऐसा मुख्य तौर पर प्याज, अनाज और चावल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हुआ। खाद्य उत्पाद वर्ग की महंगाई में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी हुई है।

    प्याज की कीमत जुलाई में पिछले साल की तुलना में 145 फीसदी ऊंची रही। जून में प्याज का भाव सालाना आधार पर 114 फीसदी ऊंचा था। जुलाई में सब्जियों के वर्ग में महंगाई दर बढ़कर 46.59 फीसदी हो गई, जबकि जून में यह 16.47 फीसदी थी। 

    योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि महंगाई में इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट रही। उन्होंने उम्मीद जताई कि आपूर्ति की स्थिति सुधरते ही खाद्य महंगाई दर नीचे आ जाएगी। अहलूवालिया ने कहा, 'मुझे ऐसा लगता है कि बढिय़ा मानसून के बाद हम खाद्य कीमतों में नरमी का रुख देखेंगे। मुझे उम्मीद है कि साल के अंत तक महंगाई दर पांच से छह फीसदी के बीच रहेगी।'

    रुपये की गिरती कीमत के कारण क्रूड ऑयल का आयात महंगा हो गया जिसके चलते जुलाई में ईंधन और ऊर्जा के क्षेत्र में महंगाई दर बढ़कर 11.31 फीसदी हो गई। अप्रैल से अब तक 15 फीसदी से अधिक की गिरावट झेल चुके रुपये और साथ ही बढ़ते चालू खाते के घाटे को देखते हुए सरकार और रिजर्व बैंक अपने-अपने स्तर पर कदम उठा रहे हैं।

    विनिर्मित उत्पाद खंड की महंगाई दर जुलाई में आंशिक रूप से बढ़कर 2.81 फीसदी हो गई जो जून में 2.75 फीसदी थी। गैर खाद्य उत्पाद खंड, जिसमें फाइबर, तिलहन और खनिज शामिल हैं, की महंगाई दर घटकर 5.51 फीसदी हो गई जो जून में 7.57 फीसदी थी। (प्रेट्र)

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