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    एक बार में 2 से 3 रुपये तक महंगा हो सकता है डीजल

    एक बार में 2 से 3 रुपये तक महंगा हो सकता है डीजल

    डीजल की कीमतों में 2-3 रुपये की एकमुश्त बढ़ोतरी करने पर विचार

    एक्स्ट्रा मूल्यवृद्धि
    कैबिनेट ने डीजल की कीमतों में एकमुश्त बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी तो यह इसके मूल्य में हर माह होने वाली 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि के अतिरिक्त होगी

    क्या पड़ेगा असर
    महंगे डीजल के चलते ट्रक भाड़े बढ़ जाएंगे, फिर ट्रकों से ढुलाई किए जाने वाले तमाम सामान हो जाएंगे महंगे
    असर फल-सब्जियों की कीमतों पर दिखेगा जो पहले ही छू रही हैं आसमान

    महंगाईके इस दौर में डीजल वाहन चलाने वालों की जेब अब और हल्की होने वाली है। दरअसल, सरकार प्रति लीटर डीजल की कीमतों में 2-3 रुपये की एकमुश्त बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है। गिरते रुपये के चलते पड़ रहे असर को कम करने के मकसद से ही सरकार डीजल को महंगा करने की तैयारी में है।

    इतना ही नहीं, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का चौतरफा असर होगा। महंगे डीजल के चलते पहले तो ट्रक भाड़े बढ़ जाएंगे। फिर इसके बाद ट्रकों से ढुलाई किए जाने वाले तमाम सामान महंगे हो जाएंगे। इसका असर खासकर फल-सब्जियों की कीमतों पर दिखेगा जो पहले से ही आसमान छू रही हैं।

    हालांकि, थोड़ी राहत की बात यह है कि रसोई गैस और केरोसीन की कीमतों में बढ़ोतरी करने का कोई इरादा नहीं है। कैबिनेट ने अगर डीजल की कीमतों में एकमुश्त बढ़ोतरी को हरी झंडी दिखा दी तो यह इस ईंधन के मूल्य में हर माह होने वाली 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि के अतिरिक्त होगी।

    मालूम हो कि डीजल की उत्पादन लागत और इसके खुदरा बिक्री मूल्य के बीच जो अंतर है, उसको खत्म करने के लिए ही इस ईंधन के दाम में हर महीने 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी पहले से ही हो रही है। तेल मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, 'डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की स्थितियां निश्चित तौर पर बन गई हैं। हालांकि, इस बारे में कोई भी निर्णय राजनीतिक स्तर पर ही लिया जाएगा।'

    गौरतलब है कि सरकार ने गत जनवरी महीने में तेल कंपनियों को डीजल की कीमतों में हर महीने 50 पैसे तक की बढ़ोतरी तब तक करने की इजाजत दी थी, जब तक कि इस ईंधन की बिक्री पर होने वाला नुकसान समाप्त न हो जाए।

    वैसे तो डीजल की कीमतों मे हर महीने की जा रही बढ़ोतरी की बदौलत इस ईंधन की बिक्री पर कंपनियों को होने वाला नुकसान गत मई में घटकर 3 रुपये से भी नीचे आ गया था, लेकिन रुपये का अवमूल्यन इस पर बहुत भारी पड़ा है। गत अप्रैल से लेकर अब तक रुपये का 12 फीसदी अवमूल्यन हो चुका है, जिसके चलते प्रति लीटर डीजल की बिक्री पर होने वाला नुकसान अब बढ़कर 9.29 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

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