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जानिए, बजट बनाने वालों को कैसे मिलती है गोपनीयता की 'कैद'

बजट बनाने की प्रक्रिया प्रति वर्ष अगस्त-सितंबर माह में शुरू हो जाती है। बजट के प्रारूप को और इस प्रक्रिया को बहुत ही गोपनीय रखा जाता है।

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नई दिल्ली. जरा सोचिए, जब एक घर के बजट को बनाने के लिए इतनी माथा-पच्ची की जाती है, तो पूरे देश का बजट बनाने में कितनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता होगा।  

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एक संस्था है- इकोनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट और इसके अंदर एक विभाग है - बजट डिविजन। यह बजट डिविजन ही है जो हर साल भारत सरकार के लिए बजट बनाता है। बजट बनाने की प्रक्रिया प्रति वर्ष अगस्त-सितंबर माह में शुरू हो जाती है।
 
बजट के प्रारूप को और इस प्रक्रिया को बहुत ही गोपनीय रखा जाता है। यहां तक कि इसे बनाने वालों को भी गोपनीयता की 'कैद' झेलनी पड़ती है। वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में बजट डॉक्युमेंट की प्रिंटिंग की जाती है। लगभग 100 लोगों को बजट से एक सप्ताह पहले पूरी जांच-पड़ताल करके भेजा जाता है और बजट प्रिंट होने तक इन लोगों को वहीं रुकना होता है। 

बजट की सुरक्षा और गोपनीयता का हर कदम पर ध्यान दिया जाता है, चाहे वह बजट का ड्राफ्ट बनाने की प्रक्रिया हो, या फिर उसके बाद की। बजट प्रिंटिंग का कागज वित्त मंत्रालय के प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंचने तक का सफर हो। उसके बाद प्रिंटिंग, पैकेजिंग और इसके संसद पहुंचने तक सुरक्षा व्यवस्था उसी मुस्तैदी के साथ कायम रखी जाती है।

आगे की स्लाइड में जानें क्या-क्या किया जाता है बजट की गोपनीयता के लिए-
 
 
(फोटो - बजट डॉक्युमेंट्स की जांच करते सुरक्षा गार्ड)

(सांकेतिक तस्वीर)

क्या-क्या किया जाता है बजट की गोपनीयता के लिए

=> जनवरी की शुरुआत से मीडिया को वित्त मंत्रालय से दूर कर दिया जाता है, ताकि कोई भी बजट संबंधी खबर मीडिया के हाथ न लगे।

=> इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोग वित्त मंत्रालय की पूरी तरह से सिक्युरिटी सुनिश्चित करते हैं। बजट से संबंधित प्रमुख लोगों का फोन भी टेप किया जाता है, ताकि घर का ही कोई व्यक्ति भेदिया न बन सके। इंटरनेट कनेक्शन भी हटा दिया जाता है।

=> वित्त मंत्रालय में आने-जाने वाले लोगों पर सीसीटीवी के जरिए कड़ी नजर रखी जाती है। सीसीटीवी के रेंज के बाहर किसी को भी बैठने की मनाही होती है। 

=> वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में बजट डॉक्युमेंट की प्रिंटिंग की जाती है। इस प्रिंटिंग प्रेस में लगभग 100 लोगों को बजट से एक सप्ताह पहले पूरी जांच-पड़ताल करके भेजा जाता है और बजट प्रिंट होने तक इन लोगों को वहीं रुकना होता है। प्रिंटिंग रूम में सिर्फ एक फोन होता है, जिस पर सिर्फ इनकमिंग कॉल आ सकती है। हालांकि, बात करते वक्त इंटेलिजेंस का एक आदमी हमेशा वहां मौजूद रहता है।  
 
(सांकेतिक तस्वीर)

=> डॉक्टरों की एक टीम हमेशा मौजूद रहती है, ताकि प्रेस में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी की तबीयत खराब होने पर उसका तुरंत उपचार किया जा सके। यहां के प्रिंटिंग प्रेस में मुख्य तौर पर प्रूफ रीडिंग, ट्रांसलेशन और प्रिंटिंग का काम होता है।

=> अगर किसी इमरजेंसी में कोई प्रिंटिंग कर्मचारी प्रेस से बाहर निकलता है तो उसके साथ इंटेलिजेंस का एक आदमी और दिल्ली पुलिस का एक आदमी हमेशा साथ रहता है।

=> वित्त मंत्रालय के प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वालों को जो खाना दिया जाता है, उसे भी टेस्टिंग से गुजरना पड़ता है, ताकि पता लगाया जा सके कि खाने में जहर तो नहीं मिलाया गया है।
 
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