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जानिए, क्या होती है एक्साइज ड्यूटी और कितने प्रकार की होती है ये

भारतीय टैक्स व्यवस्था में लोगों के ऊपर बहुत सारी चीजों के लिए बहुत सारे टैक्स का बोझ पड़ता है। इन्हीं में से एक है एक्साइज ड्यूटी।

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भारतीय टैक्स व्यवस्था में लोगों के ऊपर बहुत सारी चीजों के लिए बहुत सारे टैक्स का बोझ पड़ता है। यह सारे टैक्स किसी न किसी तरह से इकोनोमी की ग्रोथ में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक है एक्साइज ड्यूटी।

क्या है एक्साइज ड्यूटी

एक्साइज टैक्स या एक्साइज ड्यूटी एक ऐसा टैक्स है जो देश के अंदर गुड्स के प्रोडक्शन और उसकी बिक्री पर लगता है। अब इस टैक्स को सेन्ट्रल वैल्यू ऐडेड टैक्स (CENVAT) के नाम से जाना जाता है। इसकी सहायता से सरकार के लिए अधिक से अधिक रेवेन्यू जनरेट किया जाता है, ताकि सार्वजनिक सर्विसेस में उसका इस्तेमाल किया जा सके।

मुख्य बातें

-एक्साइज ड्यूटी 26 जनवरी 1944 को अस्तित्व में आया था।
-1957 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री टी टी कृष्णामाचारी ने एक्साइज ड्यूटी को 400 फीसदी तक बढ़ा दिया था।

पिछले बजट में कितनी थी एक्साइज ड्यूटी

-एक्साइज ड्यूटी के रेट 12 प्रतिशत को बरकरार रखा गया।
 
आगे की स्लाइड में जानें कितने तरह की होती है एक्साइज ड्यूटी- 
 

भारत में तीन प्रकार की सेन्ट्रल एक्साइज ड्यूटी होती है-

बेसिक- एक्साइज ड्यूटी 1944 के सेन्ट्रल एक्साइज एंड साल्ट एक्ट के सेक्शन 3 के तहत नमक को छोड़कर भारत में बनाए गए अन्य सभी एक्साइजेबल गुड्स पर लगाया जाती है। यह टैक्स सेट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट, 1985 के तहत लगाया जाता है, जो बेसिक एक्साइज ड्यूटी की कैटेगरी में आते हैं।

एडीशनल- एडीशनल ड्यूटीज ऑफ एक्साइस एक्ट 1957 के सेक्शन 3 के तहत इसमें लिस्टेड गुड्स पर एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है। यह टैक्स केंद्र और राज्य सरकार के बीच में बंट जाता है, जिसे सेल्स टैक्स से अलग लगाया जाता है।

स्पेशल- इसके तहत कुछ स्पेशल तरह के वस्तुएं आती हैं, जिन पर एक्साइज ड्यूटी लगाई जाती है। जिन भी स्पेशल वस्तुओं पर एक्साइज ड्यूटी लगाई जानी है, उनका उल्लेख पहले से ही फाइनेंस एक्ट में किया जाता है।

एक्साइजेबल गुड्स क्या हैं

एक्साइजेबल गुड्स वह सारी वस्तुएं हैं जो सेंट्रल एक्साइज टैरिफ एक्ट 1985 के पहले और तीसरे शेड्यूल के अंतर्गत आती हैं। इन सभी पर एक्साइज ड्यूटी लगती है, जिसमें नमक भी निहित है।
 

किसे एक्साइज ड्यूटी देना जरूरी है?

किसी भी वस्तु को बनाने या पैदा करने वाले व्यक्ति पर एक्साइज ड्यूटी लगती है। इसमें 3 तरह की पार्टी को मैन्युफैक्चरर कहा जा सकता है-

-जो खुद वस्तुओं को मैन्युफैक्चर करें।
-जो कर्मचारी रखकर उनसे मैन्युफैक्चरिंग करवाएं।
-जो किसी तीसरी पार्टी से गुड्स मैन्युफैक्चर करवाए।

क्या मैन्युफैक्चर की गई सभी वस्तुओं पर एक्साइज ड्यूटी देना जरूरी है?

यदि कोई वस्तु एक्साइज ड्यूटी के छूट की कैटेगरी में नहीं है तो उस पर एक्साइज ड्यूटी देना बहुत ही जरूरी है। उदाहरण के लिए निर्यात की गई वस्तुओं पर ड्यूटी नहीं लगाई जाती है। इसी तरह कुछ स्थितियों में एक्साइज ड्यूटी से छूट मिलती है जैसे किस तरह का कच्चा माल इस्तेमाल किया गया है, एक वित्त वर्ष में टर्नओवर क्या है, किस तरह की प्रक्रिया से वस्तु को बनाया गया है।

एक्साइज ड्यूटी न देने पर क्या होगा?

सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी के कई सारे सेक्शन के अनुसार टैक्स चोरी करने पर फाइन लगाया जा सकता है, जो कुल एक्साइज ड्यूटी की राशि का 25-50 प्रतिशत तक हो सकता है।  
 
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