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Case Study: कार के डेशबोर्ड पर ऐसे पैर रखने से जा सकती है जान!

ऑटो डेस्क।  इंडियन मार्केट में अब ज्यादातर कंपनियां ऐसी कार लेकर आ रही हैं जिनमें सेफ्टी फीचर का ध्यान रखा जाता है। यानी कार कंट्रोल के लिए इनमें ABS होता है, तो पूरी कार को एयरबैग से पैक कर दिया जाता है। यानी ड्राइवर के साथ वाली सीट के साथ कार के सभी डोर पर एयरबैग लगा दिया जाता है, ताकि एक्सीडेंट के वक्त सभी पैसेंजर्स की जान बच सके। हालांकि, जिस एयरबैग को पैसेंजर्स की सेफ्टी के लिए लगाया जाता है, वो एक गलती की वजह से आपकी बॉडी को नुकसान पहुंचा सकता है, यहां तक की जान भी ले सकता है।

 

# सेंसर पर काम करता है एयरबैग

 

एयरबैग के साथ सेंसर को फिट किए जाते हैं। यानी जब कार में टक्कर लगती है तब सेंसर एक्टिव होकर एयरबैग को ओपन करने का इशारा करता है। ये काम माइक्रो सेकंड में होता है। जैसे ही सेंसर से एयरबैग को कमांड मिलती है स्टेयरिंग के नीचे मौजूद इन्फ्लेटर एक्टिव हो जाता है। ये सोडियम एजाइड के साथ मिलकर नाइट्रोजन गैस बना देता है, जो एयरबैग में भर जाती है और वो फूल जाता है। इस फूले हुए बैग से पैसेंजर टकराता है और बच जाता है।

 

# कार में ना करें ये गलती

 

यदि आपकी कार में ड्राइवर सीट के बगल वाली सीट पर भी सेफ्टी के लिए एयरबैग दिया है, तब आपको सावधान रहना चाहिए। कुछ लोग बगल वाली सीट पर बैठकर रिलेक्स होने के लिए अपने पैर को डेशबोर्ड पर रख लेते हैं। वहीं, जब भी कार गड्ढे में जाती है तब पैर जम्प करते हुए बोर्ड पर टकराता है। ऐसे में सेंसर के एक्टिव होने का चांस बढ़ जाते हैं। एयरबैग जब ओपन होता है तब उसकी स्पीड 300 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती है। यानी इतनी स्पीड से अगर ये आपके पैरों में टकराया तो सकता है कि पैर की हड्डी डेमेज हो जाए। या फिर आपकी जान पर ही बन आए।

 

आगे की स्लाइड्स पर जानिए एयरबैग की एक्सपायरी और उससे जुड़े हादसों के बारे में...

 

 

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