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सरकार सैनिटरी नैपकिन पर खत्म करे GST

सरकार सैनेटरी नैपकिन पर टैक्स जीरो फीसदी करे क्योंकि जैसे खाने में नमक एक बेसिक जरूरत है

सरकार सैनिटरी नैपकिन पर खत्म करे जीएसटी - GST on Sanitary napkin should be 0 percent

फिल्म 'पैडमैन' आ गई है। 'पैडमैन' अरूणाचलम मुरूगनाथन की जिंदगी पर आधारित है जिन्होंने अपनी वाइफ और गांव की महिलाओं की पीरियड के समय की परेशानी को देखते हुए सैनेटरी नैपकिन बनाने की सस्ती मशीन डेवलप की। इस फिल्म के साथ कई ऐसे तथ्य भी हैं जिनके बारे में कोई नहीं लिखता। देश में 80 फीसदी महिलाएं सैनिटरी नैपिकन का इस्तेमाल नहीं करती। इंडिया में खासकर गांवों में पीरियड के दौरान सफाई को लेकर महिलाएं ही जागरूक नहीं है। उनके पास पैड्स खरीदने के लिए पैसे नहीं होते या उनके घर के आसपास गांव में मेडिकल स्टोर नहीं होता। सरकार को सैनिटरी नैपकीन पर टैक्स जीरो फीसदी करना चाहिए, ताकि इसकी कीमतें कम हो सकें। अभी इस पर 12 फीसदी जीएसटी है।

 

रुरल इंडिया में अज्ञानता खत्म करने की जरूरत

 

कई बार गांवों में और बाढ़ वाले इलाकों में फंसी महिलाओं और लड़कियों को सैनिटरी नैपिकन छोड़िए कपड़ा भी नहीं मिलता। घर में अगर 5 महिलाएं हैं, तो वह सभी एक ही चिथड़े कपड़े का इस्तेमाल करती है। इसके कारण उन्हें सबसे ज्यादा इन्फेंक्शन होता है। कुछ ऐसे भी मामले सामने आए जब ब्लाउज के हुक के कारण महिलाओं को टेटनैस हुआ है। रूरल इंडिया में इतनी ज्यादा अज्ञानता है कि गांव की महिलाएं मानती हैं कि पैड्स इस्तेमाल करने से उन्हें कैंसर हो सकता है। या ब्लड से भरा पैड अगर देख लिया तो वह मां नहीं बन पाएगी.. वैगरह.. वगैरह.. ऐसा एक ग्रासरूट पर काम कर रहे एनजीओ ने बताया। शहरों में भी पीरियड के दौरान महिलाओं को आचार छूने, पूजा करने, किचन में जाने से मना कर दिया जाता है.. जबकि पीरियड एक नॉरमल प्रोसेस है।

 

सरकार जीरो फीसदी करे टैक्स

 

सरकार को 'पैडमैन' फिल्म को फिल्म टैक्स फ्री करनी चाहिए। ताकि यह फिल्म गांव में सभी महिलाएं, पुरुष और लड़कियां देखें ताकि वह पीरियड के दौरान सफाई और सेनेटरी नैपकिन की जरूरत को समझे। सरकार सैनेटरी नैपकिन पर टैक्स जीरो फीसदी करे क्योंकि जैसे खाने में नमक एक बेसिक जरूरत है, वैसे ही महिलाओं के लिए पीरियड के दौरान नैपकिन इस्तेमाल करना बेसिक जरूरत है। ये देश की आधी जनता (महिलाओं) का अधिकार है।

 

 

 

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