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इनकम टैक्स विभाग को बड़ा झटका, बाढ़ में बह गए सैकड़ों भारतीयों के काले धन के रिकॅार्ड

भारतीय नागरिकों द्वारा ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में बड़े पैमाने पर निवेश की आशंका

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नई दिल्ली। भारत को विदेश से कालाधन लाने की मुहिम को जोरदार झटका लगा है। दरअसल भारतीय इनकम टैक्स विभाग को सूचना मिली थी कि कैरिबियन द्वीप समूह में स्थित ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड के बैंकों में सैकड़ों भारतीयों के कालाधन जमा है। इस संबंध में इनकम टैक्स विभाग ने जब उन भारतीयों की सूची लेने की कोशिश की तो वर्जिन आइलैंड के अधिकारियों ने यह कहते हुए उन भारतीयों की सूची देने से इनकार कर दिया कि पिछले साल बाढ़ में सारे रिकॉर्ड बह गए। इनकम टैक्स विभाग उनकी तरफ से बताया गया कि पिछले साल अगस्त में वहां बाढ़ आई थी जिसमें निवेशकों के सारे दस्तावेज बह गए।

 

अधिकारियों ने सूची देने में नहीं दिखाई दिलचस्पी

इनकम टैक्स विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक एक टीम ने इस संबंध में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के अधिकारियों से मुलाकात की थी। टीम ने वर्ष 2013 में वर्जिन आइलैंड में भारतीयों की तरफ से किए गए निवेश की चर्चा की, लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक वर्जिन आइलैंड के अधिकारियों ने भारतीयों की सूची देने में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई और बताया कि सारे पुराने दस्तावेज नष्ट हो चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक उन अधिकारियों के इस रवैये से कालेधन संबंधी जांच को भी झटका लगा है और इससे आगे की पड़ताल प्रभावित हो सकती है। वर्जिन आइलैंड को निवेश के लिए काफी मुफीद जगह माना जाता है, जहां स्विस बैंक से अधिक सुरक्षा है।

 

 

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612 नागरिकों ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में निवेश कर रखा है

 

खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय समूह आईसीआईजे ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत के 612 नागरिकों ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है। इसके बाद पनामा खुलासे और पैराडाइज खुलासे में भी इस द्वीपीय देश में पैसे जमा रखने वाले भारतीयों के नाम सामने आए थे। इन तीनों खोजी रिपोर्ट में सामने आने वाले लोगों पर अपनी अघोषित संपत्ति इस कैरेबियाई देश में जमा करने के आरोप आयकर विभाग की जांच में भी सामने आए हैं। ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के अलावा सिंगापुरलंदनकेमैन आइलैंड और गंजी आइलैंड में भी कर बचाने के लिए निवेश की बात सामने आई थी।

 

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पांच देशों से मांगी थी जानकारियां

 

भारत ने ब्रिटिश वर्जिन समेत पांचों देशों से इस साल की शुरुआत में अपने नागरिकों के निवेश से संबंधित जानकारी मांगी थी। इसके जरिए अधिकारी भारत में कर चोरीधनशोधन और फंड की हेराफेरी के आरोपों को पुख्ता करना चाह रहे थे। इनकम टैक्स के सूत्रों के मुताबिक शुरुआती पड़ताल के बाद सभी पांचों देशों से कुछ जानकारियां मांगी गई थी। लेकिन ब्रिटिश वर्जिन से सूचनाएं नहीं मिलने से भारत में काला धन के खिलाफ जारी मुहिम को तगड़ा झटका लगने की संभावना है।

 

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