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महिला ने थामा स्टेयरिंग, बचाई 24 की जान:चलती बस में ड्राइवर को आई मिर्गी; सफर कर रही योगिता सातव ने खाई में गिरने से बचाया

पुणे4 महीने पहले
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एक महिला ने अपनी फुर्ती के चलते दो दर्जन लोगों की जान बचा ली। पुणे में सड़क पर तेज रफ्तार से दौड़ रही बस के ड्राइवर को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ गया। वह गिर पड़ा। बेकाबू होकर खाई में बस गिरती बस में यात्रा कर रही एक महिला ने फुर्ती दिखाते हुए स्टेरिंग संभाल ली और बस में सवार तकरीबन 24 लोगों की जान को बचाया। महिला का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वे बस चलाती हुई नजर आ रहीं हैं।

ड्राइवर को अस्पताल भी पहुंचाया

बहादुरी का यह कारनामा पुणे की रहने वाली योगिता धर्मेंद्र सातव ने किया है। योगिता ने न सिर्फ बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाया, बल्कि उसके ड्राइवर को इलाज के लिए एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भी पहुंचाया। योगिता ने बताया कि मैं कार चलाना जानती थी, लेकिन मैंने कभी बस नहीं चलाया था। ड्राइवर और अन्य यात्रियों के प्राण संकट में देख मैंने उन्हें साइड में किया और फिर बस की कमान अपने हाथ में लेकर ड्राइवर को पहले पास के गांव और अन्य यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया।

ड्राइवर को सही समय पर हॉस्पिटल पहुंचाया
जानकारी के अनुसार, पुणे के वाघोली की 23 महिलाओं का ग्रुप 7 जनवरी को शिरूर तालुका के मोराची चिंचोली में घूमने के लिए गया था। तभी अचानक यह घटना हुई। इस परिस्थिति में जिस तरह से योगिता ने बस की कमान संभालकर ड्राइवर और दूसरी महिलाओं की जान बचाई उसकी चारों ओर तारीफ हो रही है। योगिता खुद बस चलाकर अगले गांव तक लेकर आईं। यहीं एक प्राइवेट हॉस्पिटल में ड्राइवर का इलाज किया गया। फिलहाल उसकी हालत ठीक है और डॉक्टर्स का कहना है कि उसे जल्द ही डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।

योगिता के गांव की पूर्व सरपंच ने उनके घर जाकर उन्हें सम्मानित किया है।
योगिता के गांव की पूर्व सरपंच ने उनके घर जाकर उन्हें सम्मानित किया है।

योगिता को किया गया सम्मानित
योगिता ने बताया कि उसने 10 किलोमीटर तक बस चला कर इसमें सवार सभी लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। वाघोली गांव की पूर्व सरपंच जयश्री सातव पाटिल ने अपनी सहयोगी और पिकनिक की आयोजक आशा वाघमारे के साथ योगिता सातव के घर जाकर उसका सम्मान किया। जयश्री सातव ने कहा कि फोर व्हीलर बहुत सी महिलाएं चलाती हैं, लेकिन गंभीर परिस्थिति में बस चलाने का जो काम वाघोली की योगिता सातव ने किया है, वह वाकई हिम्मत का काम है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि समाज में महिलाएं किसी भी लेवल पर कमजोर नहीं है।