पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Market Watch
  • SENSEX52344.450.04 %
  • NIFTY15683.35-0.05 %
  • GOLD(MCX 10 GM)47122-0.57 %
  • SILVER(MCX 1 KG)68675-1.23 %
  • Business News
  • National
  • Narendra Modi Address Returns; What Does That Mean? BJP Party Image Correction Amid Latest Coronavirus Crisis

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

मोदी के भाषण का एनालिसिस:सरकार और संगठन की साख बचाने मोदी के दो बड़े ऐलान, छवि सुधारने में गेमचेंजर साबित हो सकती है मुफ्त वैक्सीन और अनाज योजनाएं

नई दिल्ली12 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

7 जून की शाम 5 बजे देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर जता दिया कि आखिर वो राजनीति के इतने माहिर खिलाड़ी क्यों माने जाते हैं। विपक्ष और मीडिया के हमलों से घिरी सरकार को इस मुसीबत से निकालने का जिम्मा अपने कंधों पर लेते हुए मोदी ने दो बड़ी घोषणाएं कीं। 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को मुफ्त वैक्सीन और दीवाली तक देश के 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने का ऐलान गेमचेंजर साबित हो सकता है।

21 जून से सभी के लिए मुफ्त वैक्सीन की घोषणा करते हुए नरेंद्र मोदी ने बताया कि पुरानी व्यवस्था राज्यों के कहने पर ही लागू की गई थी। वैक्सीनेशन अभियान केंद्र वापस अपने हाथ में लेगा। राज्यों के लिए वैक्सीन प्रोड्यूसर्स से मिलने वाला कुल वैक्सीन का 25% कोटा भी अब केंद्र सरकार ही लेगी। इस तरह केंद्र अब देश में कुल वैक्सीन उत्पादन का 75% हिस्सा खरीदेगी और फिर राज्यों को मुफ्त बांटेगी।

लॉकडाउन की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब जनता का दिल जीतने के लिए पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को दीवाली तक बढ़ाने का ऐलान किया। इस योजना के तहत देश के 80 करोड़ गरीबों को मुफ्त अनाज दिया जाता है। इसे पिछले साल कोरोना महामारी के बीच लागू किया गया था।

इमेज को सुधारना क्यों जरूरी?
PM मोदी की सरकार कोरोना की दूसरी लहर के पहले तक एक मजबूत सरकार मानी जाती थी। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मोदी और पार्टी की छवि खराब हुई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद मोदी और सरकार की साख पर बट्टा लग गया। इसके बाद संघ, संगठन और सरकार के स्तर पर गहन मंथन हुआ। PM मोदी ने सबके साथ वन-टू-वन चर्चा की। अब इस मंथन से निकले निष्कर्ष पर पूरी ताकत से काम करने की तैयारी है। खासकर उन राज्यों में जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें से उत्तरप्रदेश सबसे बड़ा भी है और महत्वपूर्ण भी। पीएम मोदी खुद भी यहीं से चुन कर संसद में आते हैं। इसलिए सरकार और संगठन को वापस स्फूर्ति प्रदान करने की जिम्मेदारी भी खुद मोदी ने ही अपने कंधो पर ली है। और बड़े ऐलानों के साथ जनता से सीधे संवाद करने आए।

आज की स्पीच में क्या बड़ा हुआ?
18 प्लस को केंद्र की तरफ से मुफ्त वैक्सीन और 80 करोड़ गरीबों को दीपावली तक मुफ्त राशन का ऐलान किया। वैक्सीनेशन ड्राइव और वैक्सीन को लेकर विपक्ष को घेरा। मोदी ने बताया कि किस तरह उनके आने के बाद देश में वैक्सीन बनाने और उसे लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था में सुधार हुआ। कोरोना के दौर में वैक्सीनेशन WHO की गाइडलाइन्स के मुताबिक ही शुरू किया गया। सबसे पहले हेल्थकेयर वर्कर्स को, फिर फ्रंटलाइन वर्कर्स को उसके बाद आम नागरिकों को उम्र के हिसाब से वैक्सीन देने की रणनीति बनाई गई। मोदी ने कहा कि उस समय कुछ राज्य सरकारों और मीडिया के एक वर्ग ने वैक्सीन नीति पर सवाल उठाए थे।

इस पूरी कवायद में मोदी का रोल?
डैमेज कंट्रोल के लिए बनी रणनीति में नरेंद्र मोदी अपनी सरकार और पार्टी की तरफ से ओपनिंग बैट्समैन की भूमिका में रहेंगे। यह संबोधन उसी का हिस्सा माना जा रहा है। जिस तरह UPA सरकार अपने दूसरी कार्यकाल के दो साल बाद वैश्विक रेटिंग्स में नीचे चली गई थी, वही अब मोदी सरकार के साथ भी हो रहा है।

मौजूदा आंकड़ा यूनाइटेड नेशंस के 193 देशों की ओर से अपनाए गए 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) की ताजा रैंकिंग है, जिसमें भारत 2 स्थान खिसककर 117वें नंबर पर आ गया है। नेपाल-बांग्लादेश से भी खराब पोजिशन में! अब मोदी का रोल ही अहम है, जो लगातार जनता से सीधा संवाद करते रहे हैं। इसी संवाद के जरिए मोदी ने फिर जनता को फेवर में लाने की कोशिश की। साथ ही सरकार और मोदी के लिए बनी छवि को बदलने की कोशिश भी की।

अब सरकार और भाजपा के फोकस एरिया क्या हैं?

पहला: कोरोना की दूसरी लहर अभी संभली स्थिति में है, लेकिन तीसरी लहर चुनौती है। ऐसे में मोदी देश में हेल्थ सर्विसेज, एक लाख से ज्यादा इमरजेंसी हेल्थ केयर वर्कर्स की फोर्स तैयार करने पर फोकस कर रहे हैं। यह स्काउट गाइड, रेड क्रॉस या NDRF की तर्ज पर हो सकती है। इस फोर्स को इन्हीं सेवाओं के साथ भी मर्ज किया जा सकता है।

दूसरा: संघ और पार्टी के साथ मोदी और शाह का जो मंथन हुआ है, उसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल को भी लेकर चर्चा हुई है। मंत्रिमंडल में बदलाव भी जल्द हो सकता है। इस बदलाव में चौंकाने वाले नाम आ सकते हैं। इन्हें पॉलिटिकल चेहरों से ज्यादा टेक्नोक्रेट्स को मौका दिया जा सकता है।

तीसरा: भाजपा दावा करती है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके 11 करोड़ से ज्यादा कार्यकर्ता हैं। लेकिन, कोरोना के दौर में भाजपा के कार्यकर्ता कहीं नजर नहीं आए। पिछले दिनों हुए मंथन में मोदी-शाह और नड्डा के साथ संघ ने भी इस पर चिंता जाहिर की। नतीजा ये निकला कि PM के तौर पर 26 मई को मोदी ने 7 साल पूरे कर लिए, पर इसके बावजूद कोई जश्न नहीं मनाया गया। नड्डा ने सीधा संदेश कार्यकर्ताओं को दिया था कि वे कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद, ऑक्सीजन, बेड और वैक्सीन जैसी चीजों पर फोकस करें। इसी स्ट्रैटजी को आगे भी लागू किया जा सकता है, क्योंकि जब विपक्ष ने भाजपा को इस मोर्चे पर घेरा था तो वो कमजोर पड़ गई थी।

खबरें और भी हैं...