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एपल बनी 3 लाख करोड़ डॉलर की कंपनी:'अलग सोचो' के कंसेप्ट से बनी दुनिया की सबसे अमीर कंपनी, मार्केट वैल्यू 198 देशों की GDP से ज्यादा

नई दिल्ली5 महीने पहले
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करीब 45 साल पहले कैलिफोर्निया में गैराज से शुरू हुई एपल दुनिया की पहली कंपनी बन गई है जिसकी मार्केट वैल्यू 3 लाख करोड़ डॉलर (करीब 225 लाख करोड़ रुपए) के पार हो गई है। यह भारत समेत 198 देशों की GDP से भी ज्यादा है। एपल के शेयरों ने 3% उछाल के साथ 182.88 डॉलर के उच्चतम स्तर को छूकर यह मुकाम हासिल किया।

कंपनी की कमाई में भले 50% से ज्यादा हिस्सेदारी आईफोन की हो, पर मीडिया के उभरते क्षेत्रों में भी प्रतिद्वंद्वियों से 4 गुना तक कम निवेश के बावजूद यह टॉप-5 में है। वजह- कंपनी की अलग सोच। एपल की मार्केट वैल्यू अब सिर्फ 5 देशों (अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन) की GDP से ही कम है।

एपल के DNA में है ‘थिंक डिफरेंट’... फिर चाहे डिजाइन हो या मैनेजमेंट

  • एपल कभी बाजार के मौजूदा प्रोडक्ट से कोई प्रतिस्पर्धा नहीं करती, बल्कि खुद का अलग प्रोडक्ट लाने में यकीन रखती है। फिर चाहे एमपी3 प्लेयर हो, टैबलेट हो, स्मार्टफोन हो, ईयरपॉड हो, वॉच हो या कंप्यूटर।
  • दूसरी कंपनियों की तरह यहां फैसला लेने के लिए अलग-अलग कमेटियां नहीं हैं। एपल में एक केंद्रीय कार्यकारी समिति काम करती है, जो प्रोडक्ट के डिजाइन और उसे तैयार करने में लगातार साथ-साथ काम करती है। यही कमेटी अंतिम निर्णय लेती है।
  • हार्डवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम और एप्लिकेशंस एपल का खुद का होता है।
  • एपल में सबसे खास है- डिजाइन। एपल के पूर्व कार्यकारी टोनी फेडेल बताते हैं कि अक्सर पूछा जाता है कि एपल के डिजाइन को कैसे टक्कर दें। तो वे कहते थे कि एपल को कॉपी करना बंद करें और खुद की डिजाइन पर फोकस करें। जॉब्स ने एपल के DNA में डिजाइन को ऐसे पिरोया है कि हर प्रोडक्ट में यह साफ दिखता है।

एपल म्यूजिक दुनिया में दूसरे नंबर पर
एपल ने 21 साल पहले जब आईट्यून लॉन्च किया था, तो म्यूजिक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी थी। कंपनी ने फिर मीडिया इंडस्ट्री में वापसी की है। 2015 में लॉन्च हुआ एपल म्यूजिक स्पॉटीफाई के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है। इसके 5.5 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। यही नहीं, महज 2 साल पहले आया एपल टीवी+ दुनिया का चौथा सबसे बड़ा वीडियो सर्विस प्रदाता बन गया है।

इस सूची में नेटफ्लिक्स पहले, डिज्नी-हॉटस्टार दूसरे व अमेजन प्राइम तीसरे नंबर पर है। 191 अरब डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रु.) से भी ज्यादा कैश रखने वाली एपल चाहे तो प्रतिद्वंद्वियों को बहुत पीछे छोड़ सकती है। डेटा कंपनी पैरेट एनालिटिक्स की जूलिया एलेक्जेंडर कहती हैं कि मीडिया इंडस्ट्री में एपल बाकी प्रतिद्वंद्वियों की तरह नहीं खेल रही, क्योंकि उसका फोकस दूसरी इंडस्ट्रीज पर है और यहां सिर्फ सपोर्टिंग एक्टर की भूमिका चाहती है।

दूसरों के मुकाबले कम खर्च में ज्यादा कमाई
रिसर्च कंपनी एम्पियर एनालिसिस के मुताबिक, 2021 में एपल ने फिल्म और टीवी पर सिर्फ 2 अरब डॉलर खर्च किए। वहीं, अमेजन ने 9 अरब डॉलर व नेटफ्लिक्स ने 14 अरब डॉलर खर्च किए। एपल की धमक का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि 2021 में पूरी दुनिया में रिकॉर्डेड म्यूजिक इंडस्ट्री ने 22 अरब डॉलर कमाए, जबकि एपल ने आईपैड से ही इससे ज्यादा कमा लिए।

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