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बदलाव /मीडियम इंटरप्राइज की परिभाषा फिर बदलेगी, निवेश सीमा 50 करोड़ और टर्नओवर सीमा 200 करोड़ रुपए होगी- नितिन गडकरी

गडकरी ने कहा कि सरकार इसे जल्द ही ठीक करेगी गडकरी ने कहा कि सरकार इसे जल्द ही ठीक करेगी

  • अब तक 11 करोड़ रोजगार का निर्माण किया गया है
  • निर्यातकों को वर्तमान समय का लाभ उठाना चाहिए

Moneybhaskar.com

May 19,2020 08:01:00 PM IST

मुंबई. जल्द ही एक बार फिर से मध्यम उद्योगों की परिभाषा में बदलाव होगा। इसके तहत मध्यम कंपनियों में निवेश सीमा को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए किया जाएगा। जबकि कारोबार की सीमा को बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए किया जाएगा। यह जानकारी एसएमई मामलों के मंत्री नितिन गडकरी ने दी है।

आर्थिक पैकेज में एमएसएमई की परिभाषा बदली गई थी

बता दें कि आर्थिक पैकेज में सरकार ने एसएमई की परिभाषा को बदल दिया था। लेकिन इसके बाद एक बार फिर से मीडियम कंपनियों की परिभाषा बदली जाएगी। इनकी समीक्षा भी होगी। गडकरी ने कहा कि मध्यम दर्जे की इकाइयों की निवेश सीमा को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए और कारोबार सीमा को 200 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव है। इस संबंध में आदेश जारी किए जाएंगे।

पहले 20 करोड़ के निवेश वाली कंपनी को मध्यम कंपनी माना जाता था

आर्थिक पैकेज में एसएमई की परिभाषा के मुताबिक कोई भी इकाई जिसमें एक करोड़ रुपए का निवेश और पांच करोड़ रुपए तक का कारोबार है उसे सूक्ष्म श्रेणी की कंपनी मानी जायेगी। इसी प्रकार 10 करोड़ रुपए का निवेश और 50 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली इकाई को लघु श्रेणी की इकाई माना गया है। 20 करोड़ रुपए तक का निवेश और 100 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली इकाई को मध्यम दर्जे की इकाई में रखा गया।

नई परिभाषा में मध्यम कंपनी की निवेश सीमा 50 करोड़ होगी

गडकरी ने कहा कि हमने यह फैसला किया है कि मध्यम दर्जे की इकाई के लिए निवेश सीमा के नियम को 20 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपए तक ले जाया जाए। कारोबार की सीमा को 100 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपए तक बढ़ा दिया जाये। इसके लिये हम आदेश जारी करेंगे। उनके मुताबिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम दर्जे की इकाइयों के लिये तय किये गये मानदंड निवेश अथवा कारोबार के आधार पर तय होने चाहिये। यह निवेश और कारोबार दोनों के आधार पर नहीं होने चाहिये जैसा कि घोषणा की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार इसे जल्द ही ठीक करेगी।

मध्यम इकाइयों के लिए कारोबार सीमा 250 करोड़ होगी

गडकरी ने कहा कि वह मध्यम इकाइयों के लिये कारोबार सीमा को 250 करोड़ रुपये तक बढ़ाने के सुझाव पर विचार को तैयार हैं। इस मुद्दे को वह एमएसएमई सचिव के साथ भी साझा करेंगे। सरकार की योजना देश के निर्यात कारोबार में एमएसएमई के योगदान को मौजूदा 48 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक करना है। इसके साथ ही इस क्षेत्र के देश की जीडीपी में योगदान को 29 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है।

5 करोड़ नए रोजगार पैदा करने की योजना

उन्होंने कहा कि हम देश में पांच करोड़ नये रोजगार पैदा करने की योजना बना रहे हैं। अब तक हमने 11 करोड़ रोजगार सृजित किये हैं। भारतीय एमएसएमई को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना चाहते हैं। निर्यातकों को वर्तमान समय का लाभ उठाना चाहिये जब पूरी दुनिया में चीन के खिलाफ माहौल बन रहा है। उन्हें लागत कम करके और आयात सामान का विकल्प तैयार करना चाहिये।

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