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  • Why the delisting program of Vedanta shares that is giving losses to investors will not succeed, understand it in 8 points

वेदांता का डीलिस्ट /निवेशकों को घाटा दे रहे वेदांता शेयर की डीलिस्टिंग प्रोग्राम क्यों सफल नहीं होगा, समझिए इसे 8 पॉइंट में

  • मंगलवार की देर रात बोर्ड ने दी डीलिस्ट की मंजूरी
  • एक साल में 50 प्रतिशत का घाटा दिया है इस शेयर ने

Moneybhaskar.com

May 20,2020 03:20:00 PM IST

मुंबई. अल्युमिनियम सहित अन्य सेक्टर्स में कारोबार करनेवाली वेदांता लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार से अपने शेयरों को डिलिस्ट करने जा रही है। कंपनी के बोर्ड ने मंगलवार की देर रात इसे मंजूरी दे दी। डीलिस्ट करने की कीमत 87.25 रुपए तय की गई है। फिलहाल शेयर का भाव 90 रुपए पर चल रहा है। लेकिन क्या यह डीलिस्टिंग का प्रोग्राम सफल होगा? और क्या निवेशकों को इसमें भाग लेना चाहिए? इस पर 8 पॉइंट में समझते हैं। हालांकि इसकी डीलिस्टिंग से संस्थागत, रिटेल सहित सभी निवेशकों को नुकसान है।

डिलिस्टिंग कंपनी के बारे में

वेदांता लिमिटेड कंपनी मूलरूप से अनिल अग्रवाल के ओनरशिप की है। 2018 में यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट हो चुकी है। अनिल अग्रवाल डीलिस्ट करके इसे प्राइवेट कंपनी बनाना चाहते हैं।

कंपनी का कारोबार

कंपनी के ऊपर फिलहाल 7 अरब डॉलर का कर्ज है। इसमें से अगले 12-15 महीने में 1.9 अरब डॉलर का कर्ज मैच्योर होगा। दिसंबर 2019 में इसका शुद्ध लाभ 891 करोड़ रुपए था। जबकि कारोबार 9,085 रुपए था। वित्तीय वर्ष 2018-19 में कारोबार 38,664 करोड़ जबकि लाभ 5,075 करोड़ रुपए था।

शेयरों का हाल-चाल

एक साल पहले यह शेयर 180 रुपए पर था। फिलहाल 90 रुपए के करीब है। यानी निवेशकों को 50 प्रतिशत का घाटा हो चुका है। अब अगर कंपनी डीलिस्ट होती है तो निवेशकों को इसी घाटे पर बेचना होगा। कंपनी का बेहतरीन लाभ देखकर निवेशकों ने इस अनुमान पर निवेश किया कि अगले कुछ सालों में इसका शेयर अच्छा प्रदर्शन करेगा।

डीलिस्ट का भाव और कीमत

कंपनी 87.25 रुपए पर डीलिस्ट करेगी। बाजार में उपलब्ध शेयरों को खरीदने के लिए कंपनी को करीबन 2.2 अरब डॉलर डीलिस्ट प्राइस के रूप में खर्च करना होगा।

डीलिस्ट के नियम क्या हैं

सेबी के नियमों के मुताबिक 90 प्रतिशत शेयर धारकों का कंसेट चाहिए। कंपनी को माइनॉटिरी शेयर होल्डर्स की अनुमति चाहिए। इसके लिए उसे स्पेशल रिजोल्यूशन पोस्टल बैलेट के तहत लाना होगा। इसके लिए दो टाइम वोट चाहिए। हालांकि कंपनी के बोर्ड ने उसे डीलिस्ट की मंजूरी दे दी है। वेदांता को डीलिस्ट के लिए भारत और अमेरिका के रेगुलेटर्स से मंजूरी चाहिए। अमेरिका से इसलिए क्योंकि वहां उसका एडीआर लिस्टेड है।

ब्रोकर्स क्या कहते हैं

एंजल ब्रोकिंग के अमर देव सिंह कहते हैं कि कोविड-19 ने मेटल उद्योग पर बहुत ज्यादा प्रभाव डाला है। अनिल अग्रवाल इस अवसर को प्राइवेट कंपनी के रूप में बदलना चाहते हैं। मोतीलाल ओसवाल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वेदांता की पैरेंट कंपनी पर बहुत ज्यादा कर्ज है। यह एक चिंता का विषय है।

कंपनी में होल्डिंग्स

प्रमोटर ग्रुप की वर्तमान में 51.06 प्रतिशत होल्डिंग्स है। यानी 1,76,43,26,080 इक्विटी शेयर्स हैं। पब्लिक के पास 48.94 प्रतिशत शेयर होल्डिंग्स है। यानी 169,10,90,351 इक्विटी शेयर्स हैं। इसमें म्यूचुअल फंड की 31 स्कीम्स के पास 10.91 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 506 एफआईआई के पास 15.18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एलआईसी के पास 6.36 प्रतिशत होल्डिंग्स है। व्यक्तिगत निवेशकों के पास 7.54 प्रतिशत हिस्सेदारी है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इक्विटी आर्बिटेज फंड की 5.02 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सिटी बैंक की 4.38 प्रतिशत तथा एचडीएफसी इंफ्रा फंड की 2.47 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एसबीआई ऑर्बिटेज फंड की 1.12 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

अन्य लोगों का कहना क्या है

एक बड़े संस्थागत निवेशक का कहना है कि निवेशकों के पैसे पर कंपनी के मालिक पूरी कंपनी अपने नियंत्रण में करना चाहते हैं। वर्तमान बाजार की स्थिति और शेयर के भाव पर क्या यह सही आइडिया है? यह निवेशकों के साथ धोखा

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