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  • Even after the situation is correct, there is no need to wait for a period of 90 days to improve the rating of the company SEBI

राहत /स्थिति सही होने के बाद भी कंपनी की रेटिंग में सुधार के लिये 90 दिन की अवधि के इंतजार की जरूरत नहीं- सेबी

विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त रायऔर इसके विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए सेबी ने नीति में संशोधन किया है विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त रायऔर इसके विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए सेबी ने नीति में संशोधन किया है

  • कम अवधि में कुछ कंपनियां डिफॉल्ट को सही करने में सक्षम थीं, पर अपग्रेड नहीं हो पाईं
  • सेबी के फैसले से कोविड-19 में डिफॉल्ट होनेवाली कंपनियों को राहत मिल सकेगी

Moneybhaskar.com

May 21,2020 08:57:00 PM IST

मुंबई. पूंजी बाजार नियामक सेबी ने डिफॉल्टर कंपनियों की रेटिंग के मामले में रेटिंग एजेंसियों को कुछ राहत दी है। उसने कहा कि रेटिंग एजेंसियों के लिये जरूरी नहीं है कि वे स्थिति सही होने के बाद भी कंपनी की रेटिंग में सुधार के लिये 90 दिन की अवधि का इंतजार करती रहें। रेटिंग में बदलाव के लिए डिफॉल्ट से चीजें ठीक होने को लेकर 90 दिन की मोहलत का प्रावधान है।किसी कंपनी के डिफॉल्टर स्तर से उबरने के बाद उसे नॉन इनवेस्टमेंट ग्रेड (जोखिम) से 365 दिन में निवेश स्तर की रेटिंग में लाया जाता है।

सेबी ने गुरुवार को जारी किया सर्कुलर

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक सर्कुलर में कहा, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केस-टू-केस आधार पर फैसला ले सकती हैं। सेबी ने डिफॉल्ट के कुछ हालिया मामलों में नोट किया है कि भले ही रेटेड इकाई अपेक्षाकृत कम अवधि के भीतर डिफ़ॉल्ट को सही करने में सक्षम थीं, लेकिन रेटिंग को अपग्रेड नहीं किया जा सका। डिफ़ॉल्ट सही करने के बाद के समय पर मौजूदा प्रावधानों के कारण सब-इन्वेस्टमेंट ग्रेड के तहत जारी रखा गया। रेटिंग के लिए 90 दिनों के बाद डिफ़ॉल्ट क्योरिंग पीरियड होता है, ताकि डिफॉल्ट से स्पेक्यूलेटिव ग्रेड की ओर आ जाए।

कोविड-19 से डिफॉल्ट के मामले में इजाफा हो सकता है

आम तौर पर डिफ़ॉल्ट के लिए 365 दिन इनवेस्टमेंट ग्रेड में स्थानांतरित करने के लिए होता है। कोविड-19 के मद्देनजर ऐसे मामलों की संख्या में इजाफा हो सकता है। नियामक ने ऐसे मामलों में उचित विचार करने में क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को कुछ फ्लैक्सिबिलिटी देने के उद्देश्य से पोस्ट-डिफॉल्ट क्योरिंग पीरियड पर मौजूदा नीति की समीक्षा करने की आवश्यकता महसूस की है। इसके अनुसार, नियामक ने विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त विचारों और इसके विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए नीति में संशोधन किया है।

कंपनी के सही प्रदर्शन के आधार पर ही अपग्रेड होगा

डिफ़ॉल्ट ठीक होने और भुगतान नियमित होने के बाद, एक सीआरए आम तौर पर इस अवधि के दौरान 90 दिनों की अवधि के बाद रेटिंग को डिफ़ॉल्ट से सब-इन्वेस्टमेंट ग्रेड में अपग्रेड करेगा। हालांकि यह कंपनी द्वारा संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर होगा। सेबी ने कहा, सीआरए इस संबंध में विस्तृत नीति तैयार करने वाले सीआरएएस के अधीन केस-टू-केस आधार पर 90 दिनों की उक्त अवधि से अलग हो सकता है। इस नीति को सीआरए की वेबसाइट पर रखने की जरूरत है।

अपग्रेड करने के संबंध में बनानी होगी नीति

इसमें आगे कहा गया है कि निर्धारित 90 दिनों से डेविएशन के मामलों को छमाही आधार पर सीआरए के बोर्ड की रेटिंग सब कमेटी के समक्ष रखे जाने की आवश्यकता है। सीआरए को डिफॉल्ट रेटिंग को निवेश ग्रेड रेटिंग में अपग्रेड करने के संबंध में नीति बनानी होगी और इसे अपनी वेबसाइट पर रखना होगा। तैयार की गई नीतियों में तकनीकी गलती, प्रबंधन में परिवर्तन, किसी अन्य फर्म द्वारा अधिग्रहण, या नियामक कार्रवाई से उत्पन्न होने वाले लाभ, अन्य शामिल हैं। इससे डिफॉल्टर फर्म की क्रेडिट जोखिम प्रोफ़ाइल पूर्ण रूप से बदल जाती है।

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विभिन्न स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त रायऔर इसके विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए सेबी ने नीति में संशोधन किया हैविभिन्न स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त रायऔर इसके विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए सेबी ने नीति में संशोधन किया है

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