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सख्ती /अलीबाबा और बैदू जैसी चाइनीज कंपनियों पर अमेरिकी शेयर बाजारों से डिलिस्ट होने का खतरा

अमेरिकी बाजार से चाइनीज कंपनियों को डिलिस्ट करने वाला विधेयक कांग्रेस के एक सदन सीनेट में हुआ पारित। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी विदेशी सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं अमेरिकी बाजार से चाइनीज कंपनियों को डिलिस्ट करने वाला विधेयक कांग्रेस के एक सदन सीनेट में हुआ पारित। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी विदेशी सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं

  • विदेशी सरकार द्वारा नियंत्रित कंपनियों को अमेरिकी शेयर बाजार से निकाला जा सकता है
  • रिपब्लिकन सीनेटर जॉन केनेडी ने कहा कि वे चाहते हैं कि चीन नियमों के हिसाब से चले

Moneybhaskar.com

May 21,2020 04:40:53 PM IST

नई दिल्ली. अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के एक सदन सीनेट में बुधवार को एक विधेयक पारित हुआ है, जिसके मुताबिक अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड और बैदू इंक जैसी चाइनीज कंपनियों को अमेरिकी शेयर बाजारों में प्रतिबंधित किया जा सकता है। यह एक बाइपार्टिसन विधेयक है, जिसका मतलब यह है कि इसे अमेरिका की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों (रिपब्लिकन और डेमोक्रैट) का समर्थन हासिल है। विधेयक को लुसियाना के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन केनेडी और मैरीलैंड के डेमोक्रैट सीनेटर क्रिस वान हौलेन ने सीनेट में पेश किया था। विधेयक सर्वसम्मति से सीनेट में पारित हो गया। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी विदेशी सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं।

अमेरिका में लिस्टेड कुछ सबसे बड़ी चाइनीज कंपनियों के शेयरों में गिरावट

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक विधेयक के पारित होने से अमेरिका में लिस्टेड की कुछ सबसे बड़ी चाइनीज कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को गिरावट दर्ज की गई। जबकि इस दौरान बाजार में तेजी रही। अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है कि अमेरिका की अरबों डॉलर की संपत्ति चीन की कंपनियों में लगती हैं। इनमें से अधिकांश निवेश पेंशन फंड्स और कॉलेज एंडोमेंट फंड की ओर से होता है। विधेयक में प्रावधान है कि यदि कंपनी यह नहीं दिखा पाती है कि वह किसी विदेशी सरकार के नियंत्रण में नहीं है या अमेरिका का पब्लिक अकाउंटिंग ओवरसाइट बोर्ड (पीसीएओबी) लगातार तीन साल तक कंपनी का ऑडिट नहीं कर पाता है और यह नहीं निश्चित नहीं कर पाता है कि अमुक कंपनी किसी विदेशी सरकार के नियंत्रण में नहीं है, तो उस कंपनी के शेयरों को अमेरिकी शेयर बाजारों में प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। केनेडी ने कहा कि वह चाहते हैं कि चीन नियमों का पालन करे।

अमेरिकी नियामक चीन की कंपनियों के अकाउंट नहीं देख पाता है

ऐसे करीब 95 फीसदी कंपनियां, जिनके बैलेंसशीट की समीक्षा नहीं की जा सकी, वे चीन के ऑडीटर्स का उपयोग करती हैं। वान होलेन ने कहा कि लिस्टेड कंपनियों को एक समान नियमों का पालन करना चाहिए। विधेयक में सभी कंपनियों के लिए समान नियम निर्धारित करने और निवेशकों को सूचना के आधार पर फैसला करने की सुविधा देने के लिए पारदर्शिता की व्यवस्था की गई है। नियम सख्त होने से जैक मा की कंपपनी एंट फाइनेंशियल से लेकर सॉफ्ट बैंक समर्थित बाइटडांस तक कई बड़ी निजी कंपनियों के अमेरिकी बाजार में लिस्ट होने का सफर कठिन हो सकता है। बीजिंग के एक विश्लेषक और हुलएक्स के पोर्टफोलियो मैनेजर जेम्स हुल ने हालांकि कहा कि पिछले साल ज्यादा पारदर्शिता संबंधी चर्चा शुरू होने के बाद से कई चाइनीज कंपनियां या तो हांगकांग में लिस्ट हो गई हैं या वहां लिस्ट होने की योजना बना चुकी हैं। इसलिए चीन की कंपनियों कोई बड़ा धक्का नहीं लगने वाला है।

विधेयक को प्रतिनिधि सभा में भी समर्थन

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (प्रतिनिधि सभा) में कैलीफोर्निया के डेमोक्रैट प्रतिनिधि ब्रैड शरमन ने कहा कि नैसडाक ने इस सप्ताह चीन की कंपनी लुकिन कॉफी को डिलिस्ट करने के कदम उठाए हैं। कंपनी के अधिकारियों ने अप्रैल-दिसंबर 2019 के दौरान बिक्री के आंकड़ों में 31 करोड़ डॉलर की हेरफेर करने की बात स्वीकारी थी। इसके बाद नैसडाक ने यह कदम उठाया। यदि यह विधेयक पहले ही कानून बन गया होता, तो लुकिन कॉफी के निवेशकों को अरबों डॉलर का नुकसान नहीं होता। यह विधेयक अमेरिका की दोनों राजनीतिक पार्टियों में चीन के खिलाफ बढ़ रहे आक्रोश का उदाहरण है। व्यापार व अन्य मुद्दों पर अमेरिका में चीन के खिलाफ यह आक्रोश उभरा है। खासकर रिपब्लिकन सांसदों के बीच यह आक्रोश ज्यादा देखा जा रहा है। अमेरिका के राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बीच कोरोनावायरस की महामारी के लिए भी चीन को जिम्मेदार ठहराया है।

अमेरिका के सभी एक्सचेंज पर लागू होगा यह विधेयक

केनेडी ने मंगलवार को एक साक्षात्कार में कहा था कि यह विधेयक नैसडाक और न्यूयार्क स्टॉक एक्सचेंज जैसे अमेरिकी शेयर बाजारों पर लागू होगा। चीन लंबे समय से पीसीएओबी को अमेरिका में लिस्टेड चाइनीज कंपनियों के अकाउंट की जांच नहीं करने दे रहा है। पीसीएओबी की स्थापना कांग्रेस ने 2002 में की थी। एनरॉन कॉर्प अकाउंटिंग घोटाला के बाद इसकी स्थापना हुई थी। यह संगठन कंपनियों में धोखाधड़ी को रोकने के लिए बनाया गया है, ताकि शेयरधारकों की संपत्ति की रक्षा हो सके। इसके बाद से चीन और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर तनाव बना हुआ है। इस बीच अलीबाबा जैसी कई कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में अरबों डॉलर की पूंजी जुटाई है।

अमेरिका में लिस्टेड 224 विदेशी कंपनियां विधेयक के निशाने पर

पीसीएओबी तकनीकी तौर पर अमेरिका की सरकारी संस्था नहीं है, लेकिन सिक्युरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) इसकी निगरानी करता है। एसईसी 9 जुलाई को चीन व अन्य उभरते बाजारों में निवेश करने के जोखिमों पर एक बैठक करने जा रहा है। इसमें चीन की कंपनियों के ऑडिट की जांच का मुद्दा उठ सकता है। एसईसी के मुताबिक अमेरिका में 224 ऐसी कंपनियां लिस्टेड हैं, जिनके स्रोत देश पीसीएओबी को लेकर आपत्ति जता रहे हैं। इन कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.8 लाख करोड़ डॉलर है।

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अमेरिकी बाजार से चाइनीज कंपनियों को डिलिस्ट करने वाला विधेयक कांग्रेस के एक सदन सीनेट में हुआ पारित। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी विदेशी सरकार के नियंत्रण में नहीं हैंअमेरिकी बाजार से चाइनीज कंपनियों को डिलिस्ट करने वाला विधेयक कांग्रेस के एक सदन सीनेट में हुआ पारित। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक कंपनियों को यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी विदेशी सरकार के नियंत्रण में नहीं हैं

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