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'प्रवासी कार्यकर्ता' करेंगे पूर्वांचल में डैमेज कंट्रोल:BJP ने बिहार के 5 सांसद, 10 विधायक, 6 पूर्व विधायकों को दी जिम्मेदारी, ये नाराज लोगों को मनाएंगे

वाराणसी8 महीने पहलेलेखक: पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी
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भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफे के बाद चुनावी रणनीतिकार हैरान हैं।

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद भाजपा के मंत्रियों और विधायकों ने जिस तरह से उसका साथ छोड़ा है, उसे लेकर चुनावी तैयारियों को अमली जामा पहनाने में जुटे पार्टी के रणनीतिकार हैरान हैं। शह-मात के इस सियासी खेल में बड़े उलट-फेर के बीच अब पूर्वांचल में भाजपा के बिहार के नेता यानी 'प्रवासी कार्यकर्ता' डैमेज कंट्रोल करेंगे।

BJP ने बिहार के 5 सांसद, 10 विधायक, 6 पूर्व विधायकों को यह जिम्मेदारी दी है। ये सभी नाराज हुए लोगों को मनाने के साथ ही बूथ मैनेजमेंट का काम संभालेंगे। इसके साथ ही राजभर, मौर्य, चौहान, सैनी, शाक्य, वर्मा, प्रजापति जैसी पिछड़ा वर्ग की जातियों के जिन प्रमुख चेहरों ने भाजपा का दामन छोड़ा है, उनकी कमी पार्टी को चुनाव में महसूस नहीं होने देंगे।

RSS के स्वयंसेवक रहे राधा मोहन सिंह यूपी में भाजपा सरकार की दोबारा वापसी के लिए जी-जान से लगे हैं।
RSS के स्वयंसेवक रहे राधा मोहन सिंह यूपी में भाजपा सरकार की दोबारा वापसी के लिए जी-जान से लगे हैं।

इन नेताओं को मिली है अहम जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश के चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी भाजपा ने पहले ही 6 बार से सांसद पूर्व केंद्रीय मंत्री राधा मोहन सिंह को सौंप दी गई थी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के नरहा पानापुर गांव निवासी राधा मोहन सिंह जनसंघ के जमाने के हैं। RSS के स्वयंसेवक रहे राधा मोहन सिंह भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी के तौर पर लगभग 2 साल से जमीनी स्तर पर काम कर सरकार की दोबारा वापसी के लिए जी-जान से लगे हैं।

इन लोगों को दी गई जिम्मेदारी

उनके अलावा बिहार के जिन नेताओं को विशेष रूप से पूर्वांचल में लगाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से सांसद अशोक कुमार यादव, सांसद गोपालजी ठाकुर, सांसद प्रदीप सिंह, राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर, विधायक अरुण शंकर, एमएलसी घनश्याम ठाकुर, विधायक मुरारी मोहन झा, विधायक कृष्ण नंदन पासवान, विधायक पवन यादव, विधायक उमाकांत सिंह, विधायक राणा रणधीर सिंह, विधायक संजय सिंह, विधायक अवधेश सिंह, बृजेश सिंह रमन, राधा मोहन शर्मा, सिद्धार्थ शंभू, प्रेम रंजन पटेल, पूर्व विधायक सतीश यादव, जनक सिंह, मिथिलेश गुप्ता, राजेश वर्मा, शैलेंद्र मिश्रा, सुबोध पासवान, राजीव यादव, मुन्ना सिंह यादव, सोनू शर्मा, अमरेंद्र कुमार और रंजन गुप्ता सहित कुछ अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।

प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं, सिर्फ काम करना है

भाजपा ने बिहार के अपने जिन नेताओं को पूर्वांचल में माहौल बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है, उन्हें कहा गया है कि प्रोटोकॉल का ध्यान नहीं रखना है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करके जनादेश अपने पक्ष में लाना है। संगठन के निर्देश पर बिहार के नेता मंडल, जिला और विधानसभा स्तर पर गांव, कस्बों और शहरों में पूरी निष्ठा से कार्यकर्ताओं के साथ काम शुरू कर दिए हैं।

यह नेता लगातार कार्यकर्ताओं से मुलाकात के साथ ही उनमें उत्साह भरकर सियासी लड़ाई में विपक्षियों को पस्त करने के लिए दम भर रहे हैं। भाजपा के पक्ष में माहौल बने, इसके लिए रिश्तेदारी और आपसी पुराने संबंध से लेकर मोदी-योगी सरकार की जन कल्याणकारी नीतियों तक का सहारा लिया जा रहा है।

लखनऊ का रास्ता पूर्वांचल से गुजरता है

राजनीति में कहा जाता है कि जिस तरह से दिल्ली की सियासत का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है, ठीक उसी तरह लखनऊ की कुर्सी का रास्ता पूर्वांचल के रास्ते ही मिलता है। इसके उदाहरण भी बीते विधानसभा चुनावों में लगातार देखने को मिले हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के 28 जिलों की 164 सीटों में से बीजेपी 115 काबिज पर होकर सरकार बनाई थी। 2012 के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल से सपा 102 सीट जीतकर सरकार बनाई थी। वहीं, 2007 में बसपा पूर्वांचल से 85 सीटें जीतकर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने में सफल हुई थी।

गौरतलब है कि साल भर चले किसान आंदोलन के कारण बीजेपी खुद को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बहुत सहज नहीं महसूस कर रही है। ऐसे में उसे पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड से एक बड़ी उम्मीद है। इसी वजह से पूर्वांचल से बिहार के रोटी-बेटी के संबंध को देखते हुए वहां के नेताओं को यहां एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

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