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दिवाली पर नहीं माने लोग, पटाखों से धुआं-धुआं आबोहवा:नोएडा की हवा सबसे प्रदूषित और वाराणसी सबसे साफ; BHU के वैज्ञानिक बोले- हवा में घुले घातक रसायन

वाराणसी9 महीने पहले
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प्रतिबंध के बावजूद दिवाली पर लोग पटाखों को जलाने से नहीं माने। नतीजा हवा में प्रदूषण घुल गया है। खासकर दिल्ली-NCR और पश्चिमी यूपी में तो पटाखों से निकले धुएं ने सांस लेने लायक भी हवा को नहीं छोड़ा है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अपने सबसे खतरनाक लेवल 400 अंक को पार कर चुका है।

यूपी में नोएडा सबसे प्रदूषित शहरों में नंबर वन पर है तो वहीं वाराणसी की हवा सबसे साफ है। कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों में भी स्थिति ठीक नहीं है। यहां पर AQI 200 के ऊपर है जिसे पुअर की कैटेगरी में डाला गया है।

PM2.5 प्रदूषकों ने बढ़ाया AQI

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पर्यावरणविद डॉ. कृपाराम ने बताया कि दिवाली के बाद पर्यावरण में PM2.5 यानी कि सूक्ष्म प्रदूषक तत्वों सल्फेट, नाइट्रेट, अमोनियम, कार्बन, कार्बनिक कार्बन, सिलिकॉन और सोडियम आयन की मात्रा काफी बढ़ गई है। पटाखों से निकलने वाले धुएं ने इस तरह के खतरनाक और जानलेवा रसायनों को हवा में बुरी तरह से घोल दिया है। अब यह कब तक साफ होगा, इसका कोई अंदाजा नहीं है। बारिश होती तो यह खत्म हो जाता है। मगर, दिवाली की रात से ठंड ने काफी जोर पकड़ लिया है और हवा भारी हो चुकी है। इस लिहाज से प्रदूषण अब वातावरण में ही बना रहेगा।

वाराणसी में धूल कणों की मात्रा रही सबसे ज्यादा

वाराणसी के बढ़े प्रदूषण में धूल कणों की मात्रा सबसे अधिक है। यहां पर भारी प्रदूषकों PM10 कणाें की मात्रा अधिकतम 500 अंक तक गई। इसके पीछे वाराणसी में सड़क निर्माण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सड़कों पर पानी का छिड़काव न किया जाना प्रमुख कारण है। वाराणसी में आज सबसे अधिक प्रदूषण मलदहिया में 268, BHU में 221, भेलूपुर 221 और अर्दली बाजार 209 अंक तक गया।

पॉल्यूशन से होने वाली आम बीमारियां

  • सांस लेने में तकलीफ
  • आंख और नाक में जलन होना
  • बालों का झड़ना
  • चक्कर आना, सिरदर्द और घबराहट
  • त्वचा पर दाने और खुजली
  • लंग्स, हार्ट और नर्वस सिस्टम पर भी बुरा प्रभाव