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सेंट्रल हिंदू स्कूल में एडमिशन भाग्य भरोसे:वाराणसी के CHS में ई-लॉटरी के माध्यम से छात्रों का दाखिला आज, अभिभावकों ने अधिकारियों को बनाया दो घंटे तक बंधक

3 महीने पहले
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बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी प्रेक्षागृह के बाहर बच्चों के परिजन लॉटरी सिस्टम से एडमिशन प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। - Money Bhaskar
बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के शताब्दी प्रेक्षागृह के बाहर बच्चों के परिजन लॉटरी सिस्टम से एडमिशन प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं।

वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मातृ शैक्षणिक संस्थान सेंट्रल हिंदू स्कूल (CHS ) के बच्चों का भविष्य अब भाग्य भरोसे लॉटरी पर निर्धारित होगा। साल 1898 में स्थापित CHS में इस साल भी कोरोना महामारी का हवाला देकर ई-लॉटरी के माध्यम से ही एडमिशन लिया जा रहा है। बुधवार को बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान में स्थित कृषि शताब्दी प्रेक्षागृह में कक्षा 6 से 9 तक के दाखिले के लिए लॉटरी खोले जाने के साथ ही अभिभावकों ने विरोध शुरू कर दिया। अभिभावकों ने कहा कि अंदर किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है, इसलिए गड़बड़ी की पूरी आशंका है। इसके साथ ही यह प्रक्रिया दोषपूर्ण है और इसे तत्काल रोका जाए। इस दौरान देखते ही देखते छात्र और अभिभावक गेट से प्रवेश कर अंदर मौजूद करीब 20 अधिकारियों को अघोषित तौर पर बंधक बना लिया गया। दो घंटे तक हंगामा चलने के बाद छात्रों ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया के लिए गठित कमेटी के वाइस चेयरमैन प्रो. संजय श्रीवास्तव लिखित में आश्वासन दें कि लॉटरी से एडमिशन नहीं होगा उसके बाद ही उन्हें हॉल हम विरोध से हटेंगे। इस दौरान समर्थन में छात्रों ने हॉल के सभी दरवाजे चारों ओर से बंद कर नारेबाजी की और लॉटरी सिस्टम को खत्म करने की मांग पर अड़े रहे। इतने में ज्वाइंट रजिस्ट्रार समेत कई अधिकारी गोपनीय दरवाजे से बाहर निकल गए। इसके बाद वहां मौजूद दो शिक्षिकाओं ने छात्रों और अभिभावकों से बातचीत कर मामले को शांत किया। इसके बाद छात्रों ने एक पत्रक लिखा जिसे वाइस चेयरमैन प्रो. संजय श्रीवास्तव ने रजिस्ट्रार को अग्रसारित कर दिया। वहीं छात्र कुलपति कार्यालय में कार्यवाहक कुलपति प्रो. वी के शुक्ल को भी ई-लॉटरी के खिलाफ ज्ञापन दिया।

लॉटरी में रसूखदारों का हो सकता है प्रभाव

पिछले साल बीएचयू के कई छात्रों और परिजनों द्वारा इस लॉटरी सिस्टम का खुल कर विरोध किया गया था। मगर इस वर्ष भी कोरोना के नाम पर उसी तर्ज पर एडमिशन दिया जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर की मदद से मेधावी छात्रों का चयन तो नहीं किया जा सकता। यह सिस्टम दोषपूर्ण है और इसमें यह भी संभावना है कि रसूखदारों के बच्चों का एडमिशन ले लिया जाए।

बीएचयू के शोध छात्र अंशुमान द्विवेदी।
बीएचयू के शोध छात्र अंशुमान द्विवेदी।

गुणवत्तापूरक शिक्षा के लिए जाना जाता है सीएचएस

सीएचएस सीबीएसई बोर्ड में बनारस के सभी निजी स्कूलों से बेहतर स्थान रखता है। वहीं इसकी स्थापना भी एनी बेसेंट द्वारा सामाजिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए की गई थी। यहां उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड और कई प्रदेशों के बच्चे एडमिशन लेते हैं। मगर लॉटरी सिस्टम पर एडमिशन उन मेधावी बच्चों की मानसिक स्थिति पर बेहद घातक असर कर रहा है। बीएचयू में कला संकाय के अभिषेक सिंह और मृत्युंजय तिवारी समेत कई छात्रों द्वारा इसका हर स्तर पर विरोध किया गया। मगर, कोरोना का हवाला देकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोबारा से यही आसान राह चुन ली।

शोध छात्रों ने कहा आरक्षण संबंधी नियमों की हो सकती है अनदेखी

बीएचयू में कला संकाय के एक शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि ई-लॉटरी में एडमिशन के सभी मानकों का पालन तो हो ही नहीं सकता। आरक्षण के नियमों की भी अनदेखी होने की संभावना बनी रहती है। वहीं एक मेधावी छात्र यदि इस व्यवस्था का शिकार होता है तो उसका एक साल खराब हो जाता है।

बीएचयू के शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी।
बीएचयू के शोध छात्र मृत्युंजय तिवारी।

बीएचयू में इकोनॉमिक्स के शोधार्थी अंशुमान द्विवेदी ने कहा कि साल-साल भर मेहनत के बाद ही सीएचएस में एडमिशन होता था। मगर अब यह किस्मत का खेल हो चुका है। इसमें विद्यालय और विद्यार्थियों में शिक्षा के स्तर में गिरावट स्पष्ट तौर पर देखी जा सकती है।

डॉ. अवनींद्र राय।
डॉ. अवनींद्र राय।

बीएचयू के ही छात्र रहे डॉ. अवनींद्र राय ने कहा कि जब सभी विद्यालय सरकार ने खोल दिए हैं, तब यहां पर लॉटरी सिस्टम से प्रवेश दिया जाना तर्कसंगत नहीं है। विश्वविद्यालय चाहता तो कोविड गाइडलाइन का पालन कराते हुए प्रवेश परीक्षा के माध्यम से एडमिशन ले सकता था। मगर, लॉटरी तो छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

बच्चों की जिंदगी से कोई समझौता नहीं कर सकते

बीएचयू के एक अधिकारी से इस मसले पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि ई-लॉटरी सिस्टम कंप्यूटर सेंटर द्वारा हाई क्वालिटी का सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल हुआ है। जो एडमिशन की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाता है। कोविड के दौरान विश्वविद्यालय बच्चों की जिेंदगी के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहता। इसलिए स्थिति में जब सुधार होगी तो प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही एडमिशन लिया जाएगा।

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