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जेपी और चंद्रशेखर के बलिया में सड़क चलने लायक नहीं:यह हाल तब जब 4 सांसद और 5 MLA बीजेपी के, NH-31 पर चलना मतलब आफत मोल लेना

बलिया7 महीने पहलेलेखक: दिग्विजय कुमार
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लोकनायक जयप्रकाश और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बलिया में सड़क चलने लायक नहीं है। जिले में प्रदेश और केंद्र के सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी के 4 सांसद और 5 विधायक हैं। 5 विधायकों में 2 योगी सरकार में मंत्री भी हैं। वर्तमान में जनप्रतिनिधियों की इतनी विशालकाय फौज के बावजूद जिले में NH-31 पर वाहन लेकर चलना मतलब खुद के लिए आफत मोल लेना जैसा है।

विधानसभा चुनाव देख कर सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं ने एक बार फिर विकास की दुहाई देकर मतदाताओं से वोट मांगना शुरू कर दिया है, लेकिन अहम सवाल यही है कि 5 साल तक सत्ताधारी दल के कर्ताधर्ताओं को 100 किलोमीटर लंबे NH-31 की सुध क्यों नहीं आई? यूपी से बिहार होते हुए पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले अहम मार्ग की घोर अनदेखी क्यों की गई? जनता के सुख-दुख की परवाह क्यों नहीं की और NH-31 की मरम्मत का प्रयास क्यों नहीं किया गया?

सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से आए दिन हादसे होते रहते हैं।
सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से आए दिन हादसे होते रहते हैं।

अहसास नहीं होता कि NH से गुजर रहे

कभी NH-19 के नाम से जाने वाले गाजीपुर-हाजीपुर मार्ग का नाम बदल कर कुछ साल पहले NH-31 कर दिया गया। दो राज्यों को जोड़ने वाली इस सड़क को बलिया जिले की लाइफ लाइन कहा जाता है। इस मार्ग से पूर्वांचल से बिहार ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर का आसाम भी जुड़ा हुआ है। इन सभी राज्यों से कारोबार इसी रास्ते से होता है। इसके बावजूद गाजीपुर जिले से सटे बलिया के कोटवां नरायनपुर से बिहार के मांझी तक करीब 100 किलोमीटर लंबी यह सड़क पूरी तरह से जर्जर है और चलने योग्य नहीं रह गई है।

राजस्थान के जयपुर की कंपनी को 100 किलोमीटर लंबे NH-31 के निर्माण का काम दिया गया, लेकिन कुछ ही दिन में कंपनी काम छोड़कर भाग गई।
राजस्थान के जयपुर की कंपनी को 100 किलोमीटर लंबे NH-31 के निर्माण का काम दिया गया, लेकिन कुछ ही दिन में कंपनी काम छोड़कर भाग गई।

वीरेंद्र सिंह मस्त इस समय बलिया से लोकसभा सांसद हैं

यह हालत तब है जब बलिया लोकसभा सीट से भाजपा के वीरेंद्र सिंह मस्त, सलेमपुर से रविंदर कुशवाहा और भाजपा से राज्यसभा के सांसद नीरज शेखर और सकलदीप राजभर हैं। वहीं, भाजपा के 5 विधायकों में बैरिया से सुरेंद्र सिंह, नगर सीट से आंनद स्वरूप शुक्ल, सिकंदरपुर से संजय यादव, फेफना से उपेंद्र तिवारी और बिल्थरारोड से धनन्जय कनौजिया शामिल हैं। इसके बावजूद भरौली से मांझी तक लोग यह एहसास नहीं कर पाते कि वह NH-31 पर चल रहे हैं। हिचकोले खाते गुजरते वाहनों में सवार बलिया और गैर जनपदों के लोग जनप्रतिनिधियों को कोसते हैं।

NH-31 पर हल्के वाहनों के साथ-साथ भारी वाहनों का भी आवागमन रहता है।
NH-31 पर हल्के वाहनों के साथ-साथ भारी वाहनों का भी आवागमन रहता है।

भूमि पूजन हुआ, लेकिन काम नहीं शुरू हुआ

बलिया के पूर्वी छोर पर स्थित मांझी से सटे चांददीयर से हल्दी तक NH-31 की हालत बेहद खराब है। आलम यह है कि सड़क में ट्रकों और अन्य वाहनों के खराब होकर फंसने से अक्सर जाम लग जाता है और दुर्घटनाएं भी हमेशा होती रहती हैं। पिछले साल सड़क निर्माण के लिए बैरिया-मांझी के बीच ग्रामीणों ने चक्का जाम और पदयात्रा भी की थी। नेताओं और अफसरों ने सड़क निर्माण का भरोसा दिया था और तब जाकर आंदोलन खत्म हुआ था। लोगों का गुस्सा देख कर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जून 2020 में 120 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण के लिए टेंडर भी निकाला।

3 निर्माण एजेंसियों को टुकड़े-टुकड़े में काम दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी भी एजेंसी ने काम शुरू नहीं किया है।
3 निर्माण एजेंसियों को टुकड़े-टुकड़े में काम दिया गया है, लेकिन अभी तक किसी भी एजेंसी ने काम शुरू नहीं किया है।

काम लेने वाली राजस्थान के जयपुर की कंपनी ने बैरिया से मांझी के बीच काम शुरू किया और कुछ दूर तक गिट्टी भी गिराई गई। फिर पता नहीं क्या हुआ कि कार्यकारी संस्था काम छोड़कर भाग गई। इसके बाद दोबारा टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई। 3 एजेंसियों को टुकड़े-टुकड़े में काम दिया गया। आचार संहिता लगने से एक-दो दिन पहले मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने NH-31 निर्माण के लिए भूमि पूजन किया, लेकिन मरम्मत का काम अब तक शुरू नहीं हो सका।

8 दिन पहले चली गई थी कांग्रेस नेता की जान

NH-31 की खराब हालत के कारण अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है। सड़क हादसों में कई लोग घायल भी हो चुके हैं। बीती 7 जनवरी को NH-31 से जा रहे ई-रिक्शा सड़क में बने गड्ढे के चलते पलट गया और फेफना थाना के चौबेपुर निवासी कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष पवन चौबे की मौत हो गई। बलिया से बैरिया होते हुए मांझी तक नहीं बल्कि बलिया से फेफना होते हुए भरौली तक NH-31 पूरी तरह से गड्ढों में तब्दील हो चुका है।

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