पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Market Watch
  • SENSEX60831.15-0.15 %
  • NIFTY18092.4-0.47 %
  • GOLD(MCX 10 GM)475300.32 %
  • SILVER(MCX 1 KG)648840.32 %
  • Business News
  • Local
  • Uttar pradesh
  • Varanasi
  • The Sant Samaj Of Varanasi And Prayagraj Grieved Over The Death Of Narendra Giri, The Saints Demanded An Investigation, Said There Is A Possibility Of A Deep Conspiracy

महंत के निधन से स्तब्ध हैं UP के संत:बोले- नरेंद्र गिरि की मौत के पीछे गहरी साजिश की बू, CM योगी कराएं उच्चस्तरीय जांच

वाराणसीएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में हुई मौत से काशी और प्रयागराज के संत समाज में शोक की लहर। - फाइल फोटो - Money Bhaskar
महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हाल में हुई मौत से काशी और प्रयागराज के संत समाज में शोक की लहर। - फाइल फोटो

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का शव सोमवार को प्रयागराज स्थित बाघंबरी गद्दी मठ के कमरे में फंदे से लटकता मिला। संदिग्ध हाल में हुई महंत की मौत से काशी और प्रयागराज का संत समाज शोक में डूब गया है। संत समाज ने महंत की मौत के पीछे गहरी साजिश की आशंका जताई है।

संतों ने प्रयागराज और प्रदेश के पुलिस-प्रशासन के आला अफसरों के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से महंत की मौत की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। संत समाज का कहना है कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत का प्रकरण स्पष्ट न होने तक वह शांत नहीं बैठेंगे।

महंत नरेंद्र गिरि हस्ताक्षर कर लें, यही बड़ी बात थी

अखिल भारतीय संत समिति और गंगा महासभा के महासचिव स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि सर्वदा विवादों से घिरे रहने वाले नरेंद्र गिरि जी हस्ताक्षर कर लें, यही बड़ी बात थी। सुसाइड नोट लिखना तो उनके बस की बात ही नहीं थी। ऐसे में उनकी हत्या कर किसी को फंसाने के लिए सुसाइड नोट तो नहीं लिखा गया है। उन्हें, इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से और यूपी-उत्तराखंड पुलिस से पर्याप्त सुरक्षा भी मिली थी। वह आत्महत्या कर लें, ऐसे कमजोर इंसान नहीं थे।

स्वामी जीतेंद्रानंद का कहना है कि नरेंद्र गिरि जी अवसाद में भी नहीं थे। हाल ही में उन्होंने एक बड़ा दान स्वीकार किया था। यह एक बड़ी गहरी साजिश है। पूरा विश्वास है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच करा कर सब कुछ स्पष्ट करेंगे। अखिल भारतीय संत समिति महंत नरेंद्र गिरि के निधन पर शोक व्यक्त करती है।

सनातन धर्म के लिए अपूरणीय क्षति, जांच कर सच सामने लाएं

महानिर्वाणी अखाड़े से संबद्ध काशी के श्री अन्नपूर्णा मठ मंदिर के महंत शंकर पुरी ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि का असामयिक निधन बेहद ही दुःखद है। यह संत समाज के लिए एक गहरे आघात के जैसा है। हम शासन और प्रशासन से मांग करते हैं कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत का सच सामने लाया जाए।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष और वेद पारायण केंद्रम् न्यास के अध्यक्ष आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी ने कहा कि 2000 और 2018 में यज्ञ में महंत नरेंद्र गिरि जी का सहयोग और सानिध्य प्राप्त हुआ था। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखाड़े के महंत का निधन सनातन धर्म की अपूरणीय क्षति है। विगत 5 सालों में उन्होंने अखाड़ा परिषद की ख्याति को चार चांद लगा दिया था। ऐसे महान संन्यासी की संदिग्ध हाल में हुई मौत की उच्च स्तरीय जांच कर सच सामने लाया जाना चाहिए।

महंत मजबूत हृदय के थे, आत्महत्या नहीं कर सकते

वाराणसी के नरहरपुरा स्थित सिद्धपीठ पातालपुरी मठ के महंत बालकदास ने कहा कि यह संत समाज के लिए ही नहीं सनातन धर्म की क्षति है। महंत नरेंद्र गिरि बेहद ही मजबूत हृदय के परोपकारी महात्मा थे। समाज को दिशा दिखाने वाला संत आत्महत्या नहीं कर सकता है। उनकी मौत एक सोची-समझी गहरी साजिश प्रतीत हो रहा है। काशी के संत समाज की मांग है कि महंत नरेंद्र गिरि की मौत की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सच्चाई को सामने लाया जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज के निधन का समाचार बड़ा ही दुखद है। जिन संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हुआ है, उसे देख कर कोई गहरा षड्यंत्र लगता है। वह बड़े प्रखर और दृढ़ निश्चय सन्यासी थे। वह आत्महत्या नहीं कर सकते। किसी गहरे षड्यंत्र के तहत उनकी हत्या हुई है। हम उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से मांग करते हैं की उच्चस्तरीय जांच तत्काल बैठाई जाए। नरेंद्र गिरि जी महाराज सनातन परंपराओं का पालन करने वाले थे। संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मृत्यु ने संत समाज को गहरे विवाद में डाल दिया है।

काशी विद्वत परिषद ने न्यायिक जांच की मांग की

काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने किन परिस्थितियों में प्राणात्याग का हृदयविदारक निर्णय लिया, यह जानने के लिए संपूर्ण संत समाज व्यग्र है। उन्होंने आत्महत्या की या उन्हें विवश किया गया या हत्या को आत्महत्या का चोला पहनाने का षड़यंत्र किया गया है। इसका पता लगाने के लिए घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए। यह मांग सरकार से काशी विद्वत परिषद की है।

परिषद को अपने सूत्रों से अब तक जो जानकारी मिली है उसके अनुसार महंत नरेंद्र गिरि का शव संदिग्ध परिस्थितियों में श्रीमठ बाघंबरी गद्दी में फंदे से लटका मिला है। सुसाइड नोट मिलने की बात भी सामने आई है। सुसाइड नोट और उसमें उल्लिखित तथ्यों की जांच करने की मांग परिषद ने की है। प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि इस घटना का जुड़ाव पिछली वारदातों से हो सकता है। जुलाई महीने में मुख्यमंत्री से मिलकर लखनऊ से लौटते वक्त हाईवे पर उनकी इनोवा का दुर्घटनाग्रस्त होना और पूर्व सचिव महंत आशीष गिरि की संदिग्ध मौत का प्रकरण भी इसके पीछे के कारण हो सकते हैं।

हिंदू महासभा ने सरकार से जांच की मांग की

अंतरराष्ट्रीय हिंदू महासभा के वाराणसी के जिलाध्यक्ष आशीष मोहन ने कहा कि फंदे से लटका शव आशंकाओं से घिरा है। हिंदू महासभा सरकार से पूरी घटना की जांच की मांग करती है। आशीष मोहन ने कहा कि गुरुजी आत्महत्या नहीं कर सकते। उनकी मौत एक साजिश है और इसकी निष्पक्ष जांच हो। महासभा की महिला शाखा की अध्यक्ष प्रियंका मिश्र ने कहा कि महंत जी को फांसी लगाने के लिए मजबूर किया गया है। किसी भी शिष्य से उनका कोई विवाद नहीं था। सरकार घटना की उच्च स्तरीय जांच करा कर जांच कराए।

धर्मसंघ पीठाधीश्वर ने महंत के देह त्याग पर जताया शोक

धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि धर्मसंघ से उनका अत्यंत निकट का संबंध था, जब भी उनकी आवश्यकता धर्मसंघ को हुई, वे हर वक्त उपलब्ध रहे। धर्मसंघ के महामंत्री पंडित जगजीतन पांडेय ने कहा कि सनातन धर्म के मजबूत स्तंभ रहे महंत नरेंद्र गिरि धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के सिद्धांतों का न सिर्फ अनुसरण करते थे अपितु औरों को प्रेरित भी करते थे। धर्मसंघ परिवार उनके आकस्मिक देह त्याग से मर्माहत है।

खबरें और भी हैं...