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27 मुकदमों के आरोपी हैं अतुल राय:रेप के आरोपी BSP सांसद ने लोकसभा चुनाव में अपराध की दी थी गलत जानकारी, वाराणसी में 2009 में दर्ज हुआ था रंगदारी का पहला केस

3 महीने पहले
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अतुल राय, सांसद, घोसी लोकसभा। - Money Bhaskar
अतुल राय, सांसद, घोसी लोकसभा।

पूर्वांचल में कहा जाता है कि सियासत में किस्मत आजमानी है तो जरायम जगत में तगड़ी दखल जरूर होनी चाहिए। इसके एक बड़े उदाहरण मऊ जिले की घोसी लोकसभा से बसपा सांसद और रेप के आरोप में प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल में बंद अतुल राय भी हैं। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के सामने बीती 16 अगस्त को रेप पीड़िता और उसके गवाह के आत्मदाह के बाद अतुल राय इन दिनों पूर्वांचल से लेकर देश भर में सुर्खियों में हैं।

अतुल पर हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी और रेप जैसे गंभीर किस्म के 27 आपराधिक मुकदमे वाराणसी, मऊ, गाजीपुर और अन्य जिलों में दर्ज हैं। हालांकि अतुल राय ने 2019 के लोकसभा चुनाव में गलत शपथ पत्र दाखिल किया था। उस दौरान अतुल पर 24 मुकदमे दर्ज थे और उन्होंने अपने शपथ पत्र में मात्र 13 मुकदमे का ही जिक्र किया था। इसे लेकर अतुल के खिलाफ मऊ की शहर कोतवाली में केस भी दर्ज किया गया था।

वाराणसी में पढ़ाई और फिर मुख्तार का साथ

गाजीपुर जिले के भांवरकोल थाना के बीरपुर गांव के मूल निवासी अतुल राय के पिता भरत सिंह वाराणसी में बीएलडब्ल्यू में कार्यरत थे। इस वजह से अतुल की प्रारंभिक शिक्षा यहीं से हुई। इसके बाद अतुल ने मैदागिन स्थित हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज से 2004 में बीएससी किया।

बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही अतुल को जरायम जगत का ग्लैमर रास आने लगा। धीरे-धीरे अतुल राय का झुकाव मऊ सदर विधायक माफिया मुख्तार अंसारी की ओर बढ़ता ही चला गया। वाराणसी में अतुल के खिलाफ पहला मुकदमा रंगदारी मांगने और धमकाने सहित अन्य आरोपों में साल 2009 में मंडुवाडीह थाने में दर्ज हुआ। तब से लेकर साल 2020 तक सिर्फ वाराणसी के ही अलग-अलग थानों में हत्या, हत्या का प्रयास, रेप और गैंगेस्टर एक्ट के तहत 14 से ज्यादा मुकदमे अतुल के खिलाफ दर्ज हुए हैं।

2017 में पहला चुनाव लड़ा था विधानसभा का

संपन्न किसान परिवार से ताल्लुकात रखने वाले अतुल राय ने गंवई सियासत का ककहरा अपने घर से ही पढ़ा था। गांव के प्रधान पद पर उनके परिवार या फिर करीबियों का ही कब्जा रहा है। अपने कुशल मैनेजमेंट और युवाओं में अच्छी पैठ होने के कारण अतुल ने मुख्तार अंसारी की नजर में जल्द ही अहम जगह बना ली थी। इसके बाद मोबाइल टॉवर में डीजल सप्लाई के काम से लेकर पूर्वांचल में मुख्तार गिरोह के ठेके भी अतुल की देखरेख में ही संचालित होते थे।

इस बीच अतुल राय अपने स्वामित्व वाली फर्में स्थापित कर खुद की पहचान रेलवे के बड़े ठेकेदार के तौर पर भी बना लिए। इसके अलावा जरायम जगत के साथ ही सियासत में भी अतुल धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहे थे। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले अतुल राय ने बसपा का दामन थामा और गाजीपुर की जमानिया विधानसभा से उम्मीदवार बन गए। हालांकि चुनाव में अतुल दूसरे स्थान पर थे, लेकिन बसपा में वह एक मजबूत जगह बना चुके थे।

लोकसभा चुनाव में मुख्तार से हुई दूरी

2019 के लोकसभा चुनाव में घोसी लोकसभा से मुख्तार अंसारी अपने बेटे अब्बास को बसपा का प्रत्याशी बनाना चाहते थे। लेकिन, अतुल राय ने शह और मात के सियासी खेल में अपने आका मुख्तार को चित करते हुए 14 अप्रैल 2019 को घोसी लोकसभा से बसपा का टिकट हासिल कर लिया। इसे लेकर मुख्तार अंसारी व उनके समर्थकों और अतुल के बीच कभी न भर पाने वाली खाई खुद गई। इसके साथ ही मुख्तार अंसारी व उनके करीबी अतुल राय से बदला लेने का माकूल अवसर तलाशने लगे।

अतुल का लोकसभा चुनाव का प्रचार गति भी नहीं पकड़ा था कि प्रत्याशी घोषित होने के 17 दिन बाद उनके खिलाफ वाराणसी के लंका थाने में रेप सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि अतुल राय पुलिस को चकमा देते हुए भूमिगत रहकर अपने समर्थकों की बदौलत चुनाव प्रचार अभियान जारी रखकर सांसद निर्वाचित होने में सफल रहे। 22 जून 2019 को अतुल राय ने पुलिस को चकमा देकर रेप के आरोप में वाराणसी की अदालत में सरेंडर किया और तब से अब तक वह जेल में हैं।

अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा राजनीतिक भविष्य

अतुल राय के खिलाफ केस दर्ज कराने वाली रेप पीड़िता और उसका गवाह दिल्ली में खुद को आग लगाने से पहले फेसबुक पर लाइव हुए थे। उपचार के दौरान गवाह की मौत 21 अगस्त को और रेप पीड़िता की मौत 24 अगस्त को हुई थी। फेसबुक लाइव में दोनों ने कहा था कि पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर, वाराणसी के पूर्व एसएसपी अमित पाठक, डिप्टी एसपी अमरेश सिंह बघेल, दरोगा संजय राय व उसके बेटे विकास और जजों की मिलीभगत से उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। सब तरफ से निराशा ही हाथ लगने के बाद दोनों आत्मदाह के लिए विवश हुए हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि अतुल राय के रेप के प्रकरण की सुनवाई प्रयागराज के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही है। ऐसे में अतुल का राजनीतिक भविष्य अब अदालत के आदेश पर ही निर्भर करेगा। रेप पीड़िता और उसके गवाह के आत्मदाह के बाद अतुल की राह अदालत में आसान नहीं होगी।

अब तक क्या कार्रवाई हुई जानें 5 प्वाइंट्स में

  • 22 जून 2019 से अतुल राय जेल में हैं।
  • वाराणसी की भेलूपुर सर्किल के पूर्व क्षेत्राधिकारी अमरेश सिंह बघेल को 30 दिसंबर 2020 को निलंबित किया गया।
  • 16 अगस्त 2021 को वाराणसी के पूर्व एसएसपी डीआईजी अमित पाठक को डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
  • उत्तर प्रदेश सरकार ने रेप पीड़िता द्वारा पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच के लिए पुलिस महानिदेशक और एडीजी स्तर के दो अधिकारियों की समिति गठित की है।
  • 17 अगस्त 2021 को वाराणसी के कैंट थाने के इंस्पेक्टर राकेश कुमार सिंह और दरोगा गिरजाशंकर यादव को निलंबित किया गया।
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