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एनामेल पेंट के दुष्प्रभाव से मिलेगी मुक्ति:काशी विश्वनाथ मंदिर की दीवारों का किया जा रहा संरक्षण, धाम के लोकार्पण से पहले स्वर्ण शिखर होगा साफ

वाराणसी6 महीने पहले
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काशी विश्वनाथ मंदिर की दीवारों से एनामेल पेंट हटाने के साथ ही उनके संरक्षण का काम इन दिनों चल रहा है। इसके बाद मंदिर के स्वर्ण शिखर की सफाई का काम किया जाएगा। - Money Bhaskar
काशी विश्वनाथ मंदिर की दीवारों से एनामेल पेंट हटाने के साथ ही उनके संरक्षण का काम इन दिनों चल रहा है। इसके बाद मंदिर के स्वर्ण शिखर की सफाई का काम किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट श्रीकाशी विश्वनाथ धाम लगभग मूर्त रूप ले चुका है। डेढ़ दशक से ज्यादा समय से काशी विश्वनाथ मंदिर की कलात्मक दीवारों को संरक्षित करने के लिए कवायद चल रही है। श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद के अध्यक्ष और मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत जीर्णोद्धार और संरक्षण कार्य की शुरुआत के साथ मंदिर की दीवारों का एनामेल पेंट साफ कराया जा रहा है।

धाम में सिविल इंजीनियरिंग के मुख्य काम पूरे होने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर सहित 17 मंदिरों की कलात्मक दीवारों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू की गई थी। धाम के शेष 8 मंदिरों के संरक्षण का काम बाद में किया जाएगा।

मंदिर के स्वर्ण शिखर की सफाई जल्द शुरू होगी
काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्ण शिखर की सफाई का काम भी जल्द शुरू होगा। इस काम के लिए तनिष्क कंपनी को लगाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण से पहले स्वर्ण शिखर की सफाई के साथ कलात्मक दीवारों के संरक्षण का काम पूरा कर लिया जाएगा। वहीं, 29 और 30 नवंबर को 12-12 घंटे और 1 दिसंबर को 24 घंटे के लिए मंदिर बंद रहेगा। इस बारे में मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि यह निर्णय मुख्य मंदिर के संगमरमर के फर्श की सफाई सहित अन्य प्रमुख कार्यों के लिए लिया गया है, जो भक्तों की उपस्थिति में मुश्किल था।

काशी विश्वनाथ मंदिर अब अपने भव्य स्वरूप में दूर से ही दिखाई देने लगा है।
काशी विश्वनाथ मंदिर अब अपने भव्य स्वरूप में दूर से ही दिखाई देने लगा है।

पूर्व मंडलायुक्त ने जबरन लगवाया था एनामेल पेंट
मराठा साम्राज्य की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने काशी विश्वनाथ मंदिर के गुंबद पर 1839 में सोना चढ़वाया था। यह सोना पंजाब केसरी महाराजा रणजीत सिंह ने दान किया था। काशी विश्वनाथ मंदिर के वास्तुशिल्प के लिए खतरा तब पैदा हुआ था, जब वाराणसी में 2008 के पहले मंडलायुक्त रहे सीएन दुबे ने इसकी दीवारों पर जबरन एनामेल पेंट लगवाया था। उस दौरान इसका काफी विरोध हुआ था। कुछ दिनों बाद ही पता लगा कि एनामेल पेंट की वजह से मंदिर के गर्भ गृह में लगे पत्थरों में श्वसन क्रिया बंद हो गई है। इस वजह से उनका क्षरण होने लगा है।

इसके बाद एनामेल पेंट हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन डेढ़ दशक से ज्यादा हो गया, सफलता नहीं मिल पाई। दरअसल, मंदिर की दीवारों में लगे चुनार के पत्थर केशिका क्रिया के माध्यम से नमक और खनिजों के साथ पानी को अवशोषित करते हैं। लेकिन, प्लास्टिक पेंट लगाने पर वे सड़ने लगते हैं क्योंकि पत्थरों के अंदर नमी बंद हो जाती है।
कई एजेंसियों ने किया प्रयास, लेकिन नहीं मिली सफलता
सपा एमएलसी शतरुद्र प्रकाश ने एनामेल पेंट संबंधी चूक की ओर मंदिर प्रशासन और सरकारी मशीनरी का ध्यान आकृष्ट कराया था। इसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और यूपी सरकार ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की मदद मांगी। साल 2010 में NRLC (राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपदा संरक्षण अनुसंधानशाला) पत्थर की दीवारों से एनामेल पेंट को हटाने के लिए 2.19 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया था। हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।

2013-14 में इसी काम के लिए NRLC ने दिए गए 1.22 करोड़ रुपए के एक अन्य प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया। इसके बाद, मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर की पथरीली संरचना की ताकत का आकलन करने के अलावा मंदिर की कलात्मक दीवारों से एनामेल पेंट हटाने के तरीके खोजना शुरू किया। दिसंबर 2014 में रुड़की के केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) को 57 लाख रुपए का भुगतान किया था। CBRI ने 2015 में एक अध्ययन किया था, लेकिन ट्रस्ट ने उसकी सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया था।

वाटरप्रूफिंग का काम कर कलात्मक दीवारों का संरक्षण शुरू

2019 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने नुकसान का आकलन करने और उसे दुरुस्त करने के तरीके तय करने के लिए मंदिर की कलात्मक दीवारों की 3-डी इमेजिंग और मैपिंग की, लेकिन बात नहीं बन सकी। आखिरकार काशी विश्वनाथ धाम का काम करा रही एजेंसी ने ही विशेषज्ञों की मदद से एनामेल पेंट को हटाने के साथ वाटरप्रूफिंग का काम कर कलात्मक दीवारों का संरक्षण शुरू किया है।

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