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पहले वोट दो, फिर टोल दो:पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे समेत कई हाईवे अभी टोल फ्री, जानिए...चुनाव बीतते ही किन 24 टोल नाकों पर होगी वोटरों से वसूली

वाराणसी8 महीने पहलेलेखक: दिग्विजय कुमार
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यूपी में चुनाव की तारीखों की घोषणा से भी पहले चुनावी सौगात के रूप में जनता को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे मिल गया। लोग 341 किलोमीटर का सफर चार-साढ़े चार घंटे में करने भी लगे। वह भी टोल फ्री। जी हां, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर अभी टोल नहीं लिया जा रहा है। मगर ये सुविधा सिर्फ चुनाव तक ही मिलेगी। एक्सप्रेस-वे पर टोल नाके बनकर तैयार हैं, लेकिन अभी वसूली शुरू नहीं हुई है।

कहा ये जा रहा है कि चुनाव बीतते ही यहां 6 टोल नाकों पर वसूली शुरू हो जाएगी। सिर्फ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे ही नहीं राज्य में कई जगह सिक्स लेन तथा फोरलेन का काम या तो पूरा हो चुका है या अंतिम चरण में है। सत्ताधारी दल के इशारे पर निर्माण एजेंसियां भी फिलहाल टोल वसूलने से कतरा रही हैं। यह तय माना जा रहा है कि चुनाव खत्म होते ही इन सभी नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे को मिलाकर कुल 24 स्थानों पर टोल नाके शुरू हो जाएंगे।

अभी पूरे यूपी में चलते हैं 70 टोल नाके

वाराणसी से सुल्तानपुर होते हुए लखनऊ तक एनएच-56 का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। चुनाव बाद इस राजमार्ग पर भी टोल की वसूली होगी।
वाराणसी से सुल्तानपुर होते हुए लखनऊ तक एनएच-56 का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। चुनाव बाद इस राजमार्ग पर भी टोल की वसूली होगी।

एनएचएआई के एक उच्चाधिकारी की माने तो फिलहाल पूरे उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेस-वे तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थापित 70 टोल प्लाजा पर वसूली हो रही है। इसमें एनएचएआई के वेस्ट रीजन मे 28 और ईस्ट रीजन में 22 स्थानों पर टोल की वसूली हो रही है।

कई हाईवे पर टोल नाके कम या हैं ही नहीं
वाराणसी से गोरखपुर तक एनएच- 29 का निर्माण तेजी से चल रहा है। 203 किलोमीटर लंबे इस हाईवे पर फिलहाल एक टोल गेट है। जहां टोल की वसूली शुरू हो चुकी है। यहां तीन और टोल प्लाजा बनकर तैयार हैं। इसी तरह वाराणसी से सुल्तानपुर होते हुए लखनऊ तक एनएच-56 का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। चुनाव बाद इस राजमार्ग पर भी टोल की वसूली होगी।

जानिए...कहां खुलेंगे, कितने टोल नाके

एनएच/
एक्सप्रेस-वे
खुलने वाले
टोल नाके
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे6
वाराणसी-गोरखपुर NH-293
लखनऊ वाराणसी NH-562
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे2
वाराणसी से हनुमाना NH-72
हनुमाना से मिर्जापुर1
वाराणसी से जौनपुर1
वाराणसी से आजमगढ़2
वाराणसी से रेणुकूट2
अलीगढ़ से कानपुर3

कितनी सफल होगी एक्सप्रेस-वे की सियासत
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे की सियासत कोई नई नहीं है। मायावती के कार्यकाल में आगरा से दिल्ली तक यमुना एक्सप्रेस-वे का निर्माण हुआ था। अगले चुनाव में वह सत्ता से बेदखल हो गईं। इसी तरह अखिलेश यादव ने भी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया। अगले चुनाव में जनता ने उन्हें भी नकार दिया।

योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद गंगा एक्सप्रेस-वे सहित 4 एक्सप्रेस-वे की नींव रख चुके हैं। अब बड़ा सवाल यह कि क्या योगी एक्सप्रेस-वे के सहारे सत्ता में वापसी करने में कामयाब होंगे।

दिल्ली से गाजीपुर 10 घंटे में, सियासत की रफ्तार उससे भी ज्यादा
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे लखनऊ से होते हुए बाराबंकी, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर से होकर गुजरता है। एक्सप्रेस-वे के जरिए दिल्ली से यूपी के पूर्वी कोने तक 10 घंटे के अंदर पहुंचा जा सकता है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की शुरुआत लखनऊ-सुल्तानपुर राजमार्ग पर चंदसराय गांव से होती है और ये गाजीपुर जिले के हलदरिया गांव पर खत्म होता है। 2018 में पीएम मोदी ने आजमगढ़ में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की आधारशिला रखी।

16 नवंबर, 2021 को प्रधानमंत्री ने 22,496 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाले एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन किया था। मगर, उद्घाटन के साथ ही इस पर सियासत भी शुरू हो गई थी। सपा ने दावा किया था कि एक्सप्रेस-वे की शुरुआत उसकी सरकार के दौरान हुई थी। योगी सरकार ने जानबूझकर उस काम में अड़ंगा डाला और नए सिरे से बिडिंग कराकर योजना को हाईजैक कर लिया।

उत्तर प्रदेश की सूरत बदल सकते हैं एक्सप्रेस-वे
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे उन 4 एक्सप्रेस-वे में से एक है जो उत्तर प्रदेश को बदलने की संभावना रखते हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे अन्य तीन हैं। इन चार एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के पूरा होने पर उत्तर प्रदेश में 1,788 किलोमीटर के एक्सप्रेस-वे होंगे, जो देश में सबसे अधिक है।